मैं दिवाना बहनों का अध्याय 15

 


          मैं दिवाना बहनों का  अध्याय     15


मेरा अब मन कर रहा था कि मैं निशु को अनवर से चुदवाते देखूँ, सो मैं बोला- अबे साले भड़को मत, दो मजा उसको। मैं मना थोड़े कर रहा हूँ ? फ़िर मैंने निशु से कहा- हाँ निशु, बिल्कुल बिंदास हो कर लो मजा। अनवर लड़की की चूत खाने में माहिर है, साला 15 साल का था तब अपनी बुड्डी मामी की चूत चूसकर ही जवान हुआ। सौ से कम लड़कियाँ नहीं चोदी होंगी इसने, आज देखो कैसे बेचैन है। अनवर ने हँस कर कहा- अरे 38-40 की थी मामी यार ! ऐसी बूढ़ी नहीं थी। मैंने भी कहा- अबे साले ! निशु ने 19 भी पूरे नहीं किए हैं अभी ! निशु सब सुनते हुए खा रही थी। उसकी जाँघें अभी भी भिंची हुई थी जिससे उसकी चूत की फ़ाँक नहीं दिख रही थी, सिर्फ़ ऊपर के झाँट देख रहे थे। यहाँ मैं आप लोगों को बता दूँ कि निशु के चूत और काँख पर खूब बाल हैं। नाश्ता खत्म हुआ तब अनवर का लण्ड अपना आधा जोश खो चुका था, अनवर बोला- अब जल्दी से हाथ धो कर आ जाओ, तुमको फ़िर से मेरा लण्ड मस्त करना होगा, तभी सही मजा मिलेगा तुमको ! निशु सब प्लेट वगैरह ले कर बाहर निकल गई, तब मैंने अनवर से कहा- मैं सब देखना चाहता हूँ, पता नहीं निशु मानेगी या नहीं? देख नहीं रहे मेरे सामने कैसे चुप-चुप थी। अनवर बोला- चिंता नहीं दोस्त, आज तुमको सब दिखेगा, साली को ऐसा मस्त कर दूंगा कि चौक पर पूरी दुनिया के सामने चुदवा लेगी, यहाँ तो बस तुम ही हो। बहुत मस्त लौन्डिया है निशु, इतना तो मुझे अभी तक समझ आ गया है। जब चुदेगी तब बिन्दास चुदेगी। तभी निशु आ गई। उसने एक तौलिए को अपने वक्ष पर लपेट लिया था, जो उसकी आधी जाँघ भी ढ़के हुए था। अनवर फ़िर पहले की तरह काकीन पर लेट गया और लण्ड हाथ में ले हिला कर निशु को आने का न्योता दिया। निशु भी पास बैठ तो गई पर सर नीचे किये हुए शायद मेरे जाने का इन्तजार करने लगी। तभी अनवर सब भाँप बोला- आ निशु डीयर, देख तेरा खिलौना, तेरा लॉलीपॉप तेरे मुँह में जाने के लिए बेकरार है। अपने भैया की फ़िक्र छोड़ो और मस्ती करो। मैंने भी निशु की हिम्मत बढ़ाई यह कहते हुए कि मैंने तुमको कई बार चोदा, पर आज तुमको किसी और से चुदवाते देखना चाहता हूँ ! उसके बदन से तौलिया खींच दिया। फ़िर मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया और फ़िर वहीं सोफ़े पर निशु के बिल्कुल सामने बैठ गया। अनवर ने निशु को अपने ऊपर खींच लिया और निशु को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये। निशु अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। निशु की छाती अनवर के सीने पे दबी हुई थी। अनवर अब निशु को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और निशु अब उसके नीचे हो गई।वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी। अनवर 2-3 मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाँई चूची को हल्के से मसल भी रहा था। निशु की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी। जल्द ही निशु अपने पैर को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी। जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, अनवर उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया। मैं अब निशु की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया। अनवर अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी। उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी। अनवर अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और निशु के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी। अनवर चूसता रहा और निशु चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है। जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई। तब अनवर ने उसको कहा कि अब वो उसके लण्ड को चूस कर उसको एक पानी झाड़े। निशु शान्त पड़ी रही, पर अनवर उसके बदन को हलके हलके सहला कर होश में लाया और फ़िर उसको लण्ड चूसने को कहा। निशु एक प्यारी से अदा के साथ उठी और फ़िर अनवर के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। वो अब मुझसे बिना शर्म किए खूब मजे लेने के मूड में थी। कभी हाथ से वो मुठ मारती, कभी चूसती और जल्द ही अनवर का लण्ड फ़ुफ़कारने लगा, फ़िर झड़ भी गया। झड़ते समय अनवर ने पूछा- क्या वो माल खाएगी? पर निशु ने ना में सर हिला दिया, तब अनवर तुरंत उठा और सारा माल निशु की चूची पर निकाल दिया। झड़ने के बाद भी अनवर का लण्ड हल्का सा ही ढीला हुआ था, जिसको उसने अपने हथेली से पौंछ दिया और फ़िर निशु को कहा- अब इसको चूस कर फ़िर से तैयार कर ! निशु बोली- पानी से धो लीजिए ना थोड़ा, ऐसे तो सब मेरे मुँह में चला जाएगा !


मुझे पता था कि निशु ने अभी तक लण्ड के माल को चखा नहीं है। मैं सोच रहा था कि आज निशु को मर्द के माल का स्वाद मिल जाए तो मुझे भी मजा आएगा। अनवर ने उसके अनुरोध की बिना परवाह किए कहा- चल आ जा अब, देर ना कर ! नहीं तो अगली बार माल तेरी बुर में निकाल दूँगा ! फ़िर मेरी तरफ़ देख बोला- क्या यार बहन को अभी तक बताया नहीं कि मर्द का माल लौंडिया के लिये कैसा टौनिक है? मैंने भी जड़ दिया- हाँ यार, यह साली बहन जी की बहन जी ही रहेगी, देख नहीं रहे हो आज तक झाँट भी साफ़ नहीं की, जबकि कई बार मैंने कहा भी कि मै शेव कर दूँगा, पर देख लो ! कहती है कि मम्मी कहती है कि कुँवारी लड़की को ये बाल नहीं साफ़ करना चाहिएँ, नहीं तो मर्द समझेगा कि बीवी अन्छुई नहीं है। अनवर हँसने लगा- अब तक निशु अपने को कुँवारी समझ रही है, कमाल है? क्या इसकी माँ, जब यह घर जाएगी, तब इसको नंगा करके देखेगी? और उसने अब निशु को नीचे लिटा दिया। फ़िर उसकी टाँगों को पेट की तरफ़ मोड़ दिया, खुद अपने फ़नफ़नाए लण्ड के साथ बिल्कुल उसकी खुली हुई बुर के पास घुटने पर बैठ गया। हल्के हल्के से लण्ड अब उसकी बुर के मुहाने पे दस्तक देने लगा था। निशु अपनी आँख बन्द करके अपने बुर के भीतर घुसने वाले लण्ड का इन्तजार कर रही थी। अनवर ने अपने लण्ड को अपने बाँए हाथ से उसकी बुर पर टिकाया और फ़िर उसको धीरे धीरे भीतर पेलने लगा। निशु के मुँह से सिसकारी निकल गई और जब लण्ड आधा भीतर घुस गया, तब अनवर ने अपने वजन को बैंलेन्स करके एक जोर का धक्का लगाया और पूरा 7″ भीतर पेल दिया। निशु हल्के से चीखी- उई ई ईईई ईईईए स्स्स्स्स् स माँ आआआह ! और निशु की चुदाई शुरु हो गई। जल्द ही वह भी अपनी बुर को अनवर के लण्ड के साथ “ताल से ताल मिला” के अन्दाज में हिला हिला कर मस्त आवाज निकाल निकाल कर चुद रही थी। साथ ही बोले जा रही थी- आह चोदो ! वाह, मजा आ रहा है, और चोदो, जोर से चोदो, लूटो मजा मेरी बुर का, मेरी चूत का, बहुत मजा आ रहा है, खूब चोदो ! खूब चोदो ! फ़िर जब अनवर ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई, निशु के मुँह से गालियाँ भी निकलने लगी- आआह मादरचोद ! ऊऊ ऊ ऊओह बहनचोद ! साले चोद जोर से चोदो रे साले मादरचोद। अनवर भी मस्त हो रहा था, यह सब सुन सुन कर मस्ती में चोदे जा रहा था और निशु की गाली का जवाब गाली से दे रहा था- ले चुद साली, बहुत फ़ड़क रही थी, देख आज कैसे बुर फ़ाड़ता हूँ। साली कुतिया, आज लण्ड से तेरी बच्चादानी हिला के चोद दूँगा। साली बेटी पैदा करके उसको भी तेरे सामने चोदूँगा इसी लण्ड से ! देखना तू ! दोनों एक दूसरे को खूब गन्दी गन्दी गाली दे रहे थे और चुदाई चालू थी। थोड़ी देर बाद अनवर थक गया शायद, और उसने अब लण्ड बाहर निकाल लिया। तब निशु ने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। वो अब ऊपर से उसके लण्ड पर कुद रही थी और मैं उसके सामने होकर देख रहा था कि कैसे लण्ड को उसकी बुर लील रही थी। 4-5 मिनट बाद अनवर फ़िर उठने लगा और फ़िर निशु को पलट कर उसको घुटनों और हाथों पर कर दिया फ़िर पीछे से उसकी बुर में पेल दिया, बोला- अब बन गई ना निशु तू कुतिया ! साली चुद और चुद साली ! मम्मी को अपना झाँट दिखा के बेवकूफ़ बना और यहाँ लण्ड खा गपागप गपागप गपागप। मादरचोद ! भैया से चुदी, अब भतार से चुद चुद साली रन्डी। एक से चुदे बीवी, दो से चुदे कौन, बोल रन्डी, बोल साली कुतिया, बोल दो से चुदे कौन? और वो बोल पड़ी- रन्डी रन्डी, साले बहनचोद तुम लोगों ने मुझे रन्डी बना दिया। अनवर अब एक बार फ़िर लण्ड बाहर निकाल लिया और फ़िर उसको सीधा लिटा दिया। ऊपर से एक बार फ़िर चुदाई शुरु कर दी। वो बोले जा रहा था- रन्डी,रन्डी, निशु कौन, निशु कौन? निशु बोलती- निशु है रन्डी, निशु है रन्डी। और करीब 30 मिनट के बाद निशु एक बार फ़िर काँपने लगी, वो फ़िर एक बार झर रही थी। तभी अनवर भी झरा- एक जोर का आआआआह और फ़िर पिचकारी निशु की झाँट पे। सारा सफ़ेद माल काली काली झाँटों पर फ़ैल गया। दोनों निढ़ाल हो कर अब एक दम शान्त हो कर एक दूसरे के बगल में लेट कर शन्त हो गये। मेरा लण्ड भी यह सब देख अपना माल मेरी पैंट में निकाल चुका था। अब एक दम शान्ति थी। करीब 5 मिनट तक वैसे ही रहने के बाद निशु उठी और अपने कपड़े ले कर बाथरुम में चली गई। अनवर भी अपने कपड़े पहनने लगा- यार बहुत मस्त माल है ये, थैंक्स ! मैंने कहा- हाँ यार, पर अब उसको परेशान नहीं करना, या चिढ़ाना मत। अनवर बोला- क्या दोस्त, अभी तक तुझे लगता है कि मैं ऐसा कमीना हूँ? यार मुझे पता है कि लड़की को कैसे इज्जत देनी चाहिए। निशु तब तक आ गई थी और बात भी सुनी थी, अनवर भी उसको बोला- हाँ, निशु तुम बिल्कुल दिल पर न लेना कोई बात। यह सब बस करते समय की बात है, जो भी मैं बोला ! अब आगे से जैसा पहले था, वैसा ही रिश्ता रहेगा हम लोगों का ! निशु ने मुस्कुराते हुए कहा- मुझे पता है अनवर भैया, मैं चाय बनाती हूँ। वो बाहर निकल गई, और हम दोनों दोस्त टीवी खोल कर बैठ इधर-उधर की बातें करते हुए चाय का इन्तज़ार करने लगे।


भैया और सैंया–5


जब सुमित को पता चला कि अनवर ने भी निशु की कमसिन जवानी का मजा लूट लिया है तब उसने भी निशु के साथ सेक्स करने की इच्छा जताई। सुमित और अनवर निशु के लिए नये नहीं थे और जब से उसने वो ताश का खेल हम लोगों के साथ खेला था तब से ही उसको पता था कि उसको मेरे दोनों दोस्त आज न कल चोदेंगे ही। साथ ही मैं भी कहता कि तुम परेशान न हो, वो अगर सेक्स करेंगे भी तो हमेशा नहीं एक दो बार ही करेंगे, क्योंकि उनको पता है कि तुम मेरी बहन कम गर्लफ़्रेन्ड ज्यादा हो। मानसिक रूप से निशु भी अनवर से चुदाने के बाद सुमित से सेक्स करने के लिए तैयार थी। जब सुमित ने मुझे अपनी इच्छा बताई तो मैंने उसको सीधे निशु से बात करने को कहा। अगले रविवार को हम तीनों दोस्त जमा थे और निशु चिकेन पका रही थी कि फ़िर सुमित ने यह बात की। तय हुआ कि आज खाने की मेज पर सुमित निशु से बात कर ले। जैसा तय था, खाने की मेज पर सुमित ने निशु से पूछ लिया कि क्या वो उसके साथ एक बार सेक्स करेगी। निशु भी मुस्कुरा कर बोली कि वो तो बहुत पहले से ही ये सोच रही है कि इतने दिनों तक आखिर सुमित भैया यह बात कह क्यों नहीं रहे हैं और फ़िर उसने तीन चार दिन बाद की बात कही क्योंकि तब उसके पीरियड्स के दिन शुरु हो गये थे। अनवर ने ठहाका लगा कर जोर से कहा- “के एल पी डी” और हम सब हंसने लगे। सुमित का चेहरा देखने लायक था। फ़िर वो निशु से बोल पड़ा- ठीक है पर रोकने का मुझे हर्जाना देना होगा। निशु भी हंसते हुए पूछन लगी- क्या? और सुमित ने कहा-तुम्हें मुझसे अपनी गाण्ड भी मरवानी होगी ! मुझे पता था कि सुमित साला एक नम्बर का हरामी है और चुदाई के मामले में वो लड़की से पूरा मजा लूटता है। अब मुझे निशु के जवाब का इंतजार था, उसका जवाब तुरंत आया- नहीं रे बाप, जब आगे घुसवाने में इतना दर्द होता है तब वहाँ करवाने में तो मैं मर जाउँगी ! पर सुमित भी मिन्न्तें करने लगा। जहाँ निशु कहती कि नहीं और सुमित कहता- सिर्फ़ एक बार ! इसके बाद वो कभी निशु से सेक्स की मांग नहीं करेगा। थोड़ी देर बाद जब निशु का सुर बदलने लगा तो मुझे भी लगने लगा कि अब निशु को सेक्स में पूरा पी०एच०डी० मिल जायेगा। निशु ने तब कहा था- अभी तक सिर्फ़ मैंने सुना है गाण्ड चोदन के बारे में ! तब अनवर ने भी निशु को चढ़ाया कि वो एक बार यह अनुभव भी ले।


निशु ने तब मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी ऐसा किया है, और मैंने सच कह दिया कि नहीं, पर साथ ही कहा कि सुमित ही ऐसा करता रहता है लड़कियों के साथ, वो इस मामले में अनुभवी है। अनवर ने अपनी बात कही कि उसने दो-चार बार गांड मारी है और उसको खूब मजा आया, पर सब लड़कियाँ राजी नहीं होती हैं इसलिए बहुत मौका नहीं मिला। सुमित ने उसको तब आश्वस्त किया कि वह निशु को खूब प्यार से पहले गांड मरवाना सिखाएगा और तब उसकी गाण्ड मारेगा। निशु भी तब बोली- ठीक है, पर अगर मुझे दर्द हुआ तो आप भी रुक जाएँगे ! और मुझे और अनवर को इसकी गारंटी लेने को कहा। मुझे तो कोइ आपत्ति होनी नहीं थी। मैं खुश था कि चलो अब निशु के साथ मुझे और ज्यादा मजा का मौका मिलेगा। आखिर सुमित से गाण्ड मराने के बाद उसको मुझसे तो मरवाना ही था। तय हुआ कि सुमित रोज़ शाम को एक घण्टा निशु के साथ बितायेगा और धीरे धीरे उसके डर को एक सप्ताह में खत्म करेगा। गुरुवार को सुमित का फ़ोन आया कि आज वो शाम आठ बजे आयेगा। उस दिन वो एक डी०वी०डी० लाया जिसमें करीब बीस क्लिप थी, सब में 20-22 साल की लड़कियों को चोदा गया था और गाण्ड भी मारी गई थी। दो क्लिप भारत की भी थी। चाय पीने के बाद सुमित ने उस फ़िल्म को चला दिया और फ़िर निशु को अपने सोफ़े के सामने टीवी की तरफ़ मुँह करके झुकने को कहा। निशु सेन्टर टेबल के सहारे झुक गई और


फ़िल्म देखने लगी। सुमित ने उसका लम्बा स्कर्ट कमर से ऊपर कर दिया और फ़िर पैन्टी खोल दी। निशु अब तक बिल्कुल बेशर्म हो गई थी, बोली- आप तो बोले थे कि मुझे पहले सिखाएँगे कि कैसे किया जाता है, फ़िर अभी क्यों? सुमित हँसा-“हाँ मुझे याद है ! आज तुमको सिखाउँगा ही, कुछ दिन में जब तुमको अपनी गाण्ड की मांसपेशियाँ खुद ढीला करना आ जायेगा तब पेलूंगा भीतर ! और फ़िर उसने निशु की बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु किया। फ़िल्म देखते हुए और बुर को ऐसे मसलवाते हुए निशु भी धीरे धीरे कसमसाने लगी। जब उसकी बूर पनीया गई। तब सुमित ने उसकी बुर के पानी को ही उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और फ़िर थूक लगा लगा कर निशु की गाण्ड से खेलने लगा। उसका एक हाथ बूर के साथ खेल रहा था और एक हाथ गाण्ड के साथ। 15 मिनट बाद सुमित ने अपनी उँगली निशु की गाण्ड में ठेली। उसकी उँगली के दबाब को महसूस कर निशु पीछे पलटी, पर फ़िर उसको पता था कि क्या होना है सो वापस अपना ध्यान टीवी पे ले गई। इसी तरह से रोज़ गाण्ड में उँगली करते करते चार दिन बाद रविवार को जब अनवर भी था तब सुमित ने हमें दिखाया कि निशु अब बड़े प्यार से अपना गाण्ड ढीली करके दो ऊँगलियाँ भीतर ले रही थी। इस चार दिनों में जिस तरह से निशु को तैयार किया जा रहा था, उसमें निशु को खुद मजा आने लगा था। उसे लगता था कि वो एक स्पेशल लड़की है। मैंने भी जब उसको चोदा या घर में जब मौका मिला उसकी गाण्ड में उँगली जरूर की। उसको अब समझ में आने लगा था कि इस काम का एक अलग मजा है। मंगल को एक छुट्टी थी, तय हुआ कि उसी दिन दोपहर में निशु की गाण्ड का उदघाटन हो। सुमित ने निशु को पेट साफ़ करने के लिए दवा दी और कहा कि सोमवार की रात वो उसे खा ले और फ़िर मंगल को जब तक उसकी गाण्ड नही मारी जाती वो खाली पेट रहे। मैं और अनवर ऐसे बेचैन हो रहे थे


मेरी कुंवारी बहन की चुदाई


मेरी पहली चुदाई का मजा बहन की चुत चुदाई से मिला था. मेरी दीदी दिखने में एकदम राबचिक पटाखा माल है लेकिन मैं दीदी की चूत के बारे में नहीं सोचता था. फिर एक दिन …


नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रॉय जैन है. मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपने जीवन की पहली चुदाई का आनन्द लिया वो भी खुद अपनी सगी बहन के साथ.


पहले परिचय दे देता हूँ. मेरी बहन का नाम अंकिता है और उसकी उम्र 21 साल की है. मेरी उम्र 19 है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ. मैंने अपनी पहली गर्लफ्रेंड स्कूल में ही बना ली थी. इससे आप समझ ही सकते हैं कि मैं किस प्रकार का इंसान हूँ. मगर पहली चुदाई का मजा बहन की चुत चुदाई से शुरू हुआ था.


मेरी दीदी दिखने में एकदम राबचिक माल है और उसके मम्मों का साइज 32 इंच है. गांड मस्त उभरी हुई है और उसका साइज 34 इंच है. उसकी पतली कमर को देखकर तो कामदेव भी उसे चोदने को अपना औज़ार तैयार कर लें … ऐसी पटाखा माल है.


मेरे घर में मां पापा और हम दोनों भाई बहन हैं. पापाजी गुजरात में जॉब करते हैं. वो साल में 1 या 2 बार ही आते हैं. मम्मी हाउसवाइफ हैं. मेरी बहन कॉलेज के फाइनल में है और मैं फर्स्ट ईयर में हूँ.


जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी बहन दिखने में बहुत सुन्दर है, पर आज तक उसने कभी किसी लड़के की तरफ देखा भी नहीं था, मतलब वो बहुत ही सीधी साधी लड़की थी. मैंने भी अपनी दीदी को कभी गलत नज़र से नहीं देखा था … बस पोर्न देख कर मुठ मारता रहता था.


एक बार पापाजी घर आए हुए थे, तो मम्मी ने कहा- चलो शिखर जी घूमने चलते हैं.

पापाजी ने कहा- हां चलो. मगर कल ही चलना होगा. इस बार मुझे ज्यादा दिन का ऑफ़ नहीं मिला है.


उस वक्त मेरे फर्स्ट सेम के एग्जाम्स चल रहे थे और आखिरी पेपर बचा था. मैं तो जा ही नहीं सकता था. दीदी के भी एग्जाम्स चल रहे थे … तो उसने भी जाने से मना कर दिया. इस प्रकार पापा और मम्मी का अकेले जाने का प्लान बन गया.


उन्होंने जाने के लिए पैकिंग करना शुरू कर दी और अगले दिन की मैंने टिकट बुक करवा दी. सुबह सुबह मैं उन्हें कार से स्टेशन छोड़ने गया और फिर आकर सो गया. अगले दिन मेरा पेपर था, तो सारा दिन और रात भर जाग कर पढ़ाई करनी थी. पहले मैंने सुबह सोने का सोचा.


मैं सुबह के लगभग 9 बजे के करीब उठ गया. दीदी तो पहले ही उठ चुकी थी. उसने मुझे चाय बना कर दी.


मेरे घर में 3 कमरे हैं. एक दी के लिए एक मेरे लिए … और एक मां के लिए. सबके बाथरूम भी अलग अलग हैं. अभी तक तो मेरे मन में दीदी के लिए कोई गलत भाव नहीं थे.


पर जब हम लोग नाश्ता करने बैठे तो पता नहीं दीदी को क्या हुआ था. वो बार बार अपने लोअर को ठीक कर रही थी … और चोरी चोरी नजरों से मुझे देख रही थी. तब मैं पहली बार दीदी के बारे में गलत सोचने को मजबूर हो गया. शायद उसकी पैंटी सही तरीके से सैट नहीं थी, तो वो उसे ही सैट कर रही थी. इसीलिए नाश्ता करने के बाद वो सीधा बाथरूम में गयी थी.


अभी तक मैं अपनी दीदी को पेंटी में होने की कल्पना भी कर चुका था. मेरे मन में रह रह कर गलत ख्याल आने लगे थे, पर हुआ कुछ नहीं. मैं अपने कमरे में आकर पढ़ाई करने लगा और दीदी किचन का काम निपटा कर अपने कमरे जाकर पढ़ाई करने लगी.


पढ़ते पढ़ते शाम हो गयी, जब मैं अपने कमरे से बाहर निकला … तो दीदी रात के खाने की तैयारी कर रही थी. मैं भी किचन में जाकर उसकी मदद करने लगा.


उसने पूछा- कैसी चल रही पढ़ाई?

मैंने कहा- बढ़िया … और आपकी?

उसने बोला- हां मेरी भी ठीक ठाक ही चल रही है. एक ही पेपर बचा है.

मैंने कहा- हां मेरा भी आखिरी ही बचा है.


ये कह कर मैं चुप हो गया.


दीदी ने बोला- आज रात को मूवी देखें?

मैंने बोला- कल पेपर है दोनों का.

तो वो बोली- अरे पेपर तो हो ही जाएगा और वैसे भी साल भर से पेपर के लिए ही तो पढ़ रहे हैं.

मैंने कहा- ठीक है … पर कौन सी फिल्म देखेंगे?

वो बोली- एवेंजर एन्ड गेम.

मैंने कहा- वो तो मैं 40 बार देख चुका हूँ.

वो कहने लगी कि तो क्या हुआ. … एक बार और देख ले मेरे लिए.

मैंने कहा- चलो ठीक है.


फिर हम दोनों ने खाना बनाया और खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया और दीदी किचन में बर्तन साफ करने चली गयी.


कुछ मिनट बाद वो आयी. लैपटॉप उसके हाथ में था और वो मेरे पलंग पर आकर बैठ गयी. दीदी ने ब्लू कलर का टॉप पहना हुआ था और ब्लैक कलर का कैफ्री डाली हुई थी. मैं सिर्फ बरमूडा में पढ़ाई कर रहा था … ऊपर मैं हाफ टी-शर्ट पहने हुए था.


दीदी कमरे में आयी और फिर हमने एन्ड गेम लगाकर देखने लगे. मैं थोड़ी ही देर में बोर होने लगा क्योंकि मैं उसे बहुत बार पहले भी देख चुका था.


मैं दीदी को देखने लगा, तो दीदी मुझसे कहने लगी- मूवी क्यों नहीं देख रहा, मुझे क्यों देख रहा है?

मैंने कहा- मैं बहुत बार देख चुका हूं … कुछ और करते हैं.

वो कहने लगी- क्या?

मैंने कहा- चलो ट्रुथ और डेयर खेलते हैं.

वो बोली- चलो ठीक है.


मैं पेप्सी की वो छोटी वाली शीशी होती है ना … वो फ्रिज से ले आया.


आधी मैंने पी ली और आधी दीदी को पीने के लिए दे दी.


फिर मैंने कहा- अब शुरू करें?


दी बोली- हां.


सबसे पहले मैंने बोतल को घुमाया, तो वो आकर मेरे पास ही रुकी.


दीदी ने बोला- बोल क्या लेता है … ट्रुथ या डेयर?

मैंने कहा- ट्रुथ.

उन्होंने एकदम से मुझसे पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं?


मेरी तो फट ही गयी. आज तक दीदी और मेरे बीच कभी भी ऐसे प्रकार की बात ही नहीं हुई थी, पर आज पता नहीं दीदी कौन से मूड में थी.

मैंने भी बोल दिया- हां, मेरी गर्लफ्रेंड है.


चूंकि मेरी तो 3-4 जुगाड़ें हैं … पर मैंने दीदी को सिर्फ एक की बात बताई. फिर वो कहने लगी कि उसकी फोटो दिखाओ.

मैंने कहा- एक बार में एक ही सवाल.

वो हंसने लगी.


मैंने फिर से बोतल को घुमाया. इस बार वो बोतल का मुँह दीदी के पास जाकर रुका.


उसने भी ट्रुथ ही लिया.

दीदी की गर्लफ्रेंड वाले सवाल से मुझमें भी जोश आ गया था. मैंने भी उससे पूछ लिया- आपका कोई बॉयफ्रेंड है?

उसने साफ मना कर दिया. मेरी दीदी बहुत सीधी है, मैंने आपको पहले ही बताया था.


इसके बाद फिर से बोतल घुमायी गई. इस बार फिर से उसके पास ही जाकर रुकी. उसने इस बार भी ट्रुथ ही लिया. मेरी हिम्मत थोड़ी थोड़ी बढ़ती जा रही थी.


मैंने इस बार पूछ लिया कि जब सुबह आप नाश्ता रही थीं, तो बार बार लोअर ठीक क्यों कर रही थीं?


मैं डरते डरते उनके चेहरे को ही देख रहा था. उसने थोड़ी देर तक तो कुछ नहीं बोला, पर फिर वो बोली- वो मेरी पैंटी सही सैट नहीं थी, इसीलिए.

उसके मुँह से पैंटी सुनकर मैं हैरान रह गया.


उसके बाद उसने कहा- अब ख़त्म करो … मुझे नींद आ रही है.

मैंने कहा- ओके.


वो मेरे कमरे में ही सो गयी. मैं पढ़ाई करने लगा. रात के 2 बजे तक मैं पढ़ता रहा … फिर दीदी के बगल में आकर सो गया. दीदी सीधी लेटी हुई थी और उसके 32 इंच के चुचे उसकी सांस के साथ साथ ऊपर और नीचे हो रहे थे. मैं काफी देर तक उसके मम्मों को देखता रहा, पर मेरी हिम्मत उन्हें टच करने की नहीं हुई.


मैंने बाथरूम में जाकर मोबाइल में पोर्न देख कर मुठ मारी और आकर सो गया.


सुबह पेपर था, तो मैं जल्दी उठ गया और दीदी भी नाश्ता करके हम दोनों अपने अपने कॉलेज निकल गए.


दीदी का कॉलेज मेरी कॉलेज के रास्ते में पड़ता है, तो रोज मैं उसे अपनी बाइक से छोड़ता हुआ जाता हूँ. आज बात कुछ अलग थी. कल हम दोनों के बीच में कुछ अलग ही बातचीत हुई थी, जिससे कि मैं दीदी के बारे में काम भाव से देखने लगा था. आज मैं ब्रेक भी बार बार लगा रहा था और दीदी भी अपने गोल गोल बूब्स बार बार मेरी पीठ पर दबा रही थी.


बस ऐसे ही हम लोग कॉलेज पहुंच गए. लौटते टाइम भी मैंने बहुत ब्रेक लगाए और दीदी के मम्मों का आनन्द उठाया. शायद दीदी भी थोड़ा थोड़ा समझ गयी थी.


इसके बाद हम लोग घर आ गए. हम दोनों के ही आज सारे पेपर खत्म हो गए थे, तो दोनों ही फ्री थे. पर मुझे नींद आ रही थी … क्योंकि मैं रात में लेट सोया था. मैं जल्दी सो गया.


जब मैं सो रहा था, तो मुझे किसी के चिल्लाने की आवाज ने जगा दिया. मैंने जब वो आवाज ध्यान से सुनी, तो वो मेरी बहन चिल्ला रही थी. मैंने जाकर देखा, तो मेरे होश उड़ गए. मेरी बहन किचन में स्टूल पर से गिर गयी थी और उसके ऊपर बेसन का डिब्बा भी गिर गया था, जिससे उसके सिर में भी चोट लग गई थी. उससे खड़ा होते भी नहीं बन रहा था. पहले मैं उसको गोद में उठा कर ले गया और उसके पलंग पर लिटा दिया. फिर डॉक्टर को कॉल किया. मैं बेहद घबरा गया था.


डॉक्टर आया और उसने दवाई दी. वो कहने लगा कि दिक्कत की कोई बात नहीं है … बस मालिश की जरूरत पड़ेगी.


ये कह कर उसने मुझे एक तेल की शीशी दी और कहा कि इससे, अपनी बहन के पैर की मालिश कर देना.

डॉक्टर चला गया.


उस दिन मैंने खाना बाहर से मंगवा लिया और दीदी को लेटे लेटे ही खिलाया.


उसके बाद मैं जाने लगा, तो उसने मुझे बुलाया.

फिर बोली- कुछ नहीं.


शायद वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी, पर शर्मा रही थी.

मैंने पूछा- बोलो ना!

उसने बात पलट दी और कहने लगी- वो तेल से पैर की मालिश कर दे.


मैंने भी भूलने जैसे रिएक्ट किया और तेल की शीशी ले आया. मैं उसके पंजे की मालिश करने लगा. वैसे भी वो घर में कैप्री पहनती थी, तो मालिश करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी.


अभी भी मैं उसके चेहरे पर कुछ परेशानी देख सकता था. तो मैंने फिर से पूछा- बताओ न दीदी … क्या दिक्कत है?

वो बोली- बेसन मेरी ब्रा के अन्दर भी चला गया है … और ऐसी हालत में मैं खुद से उसे उतार नहीं सकती हूँ.

मैंने बीच में ही टोकते हुए कहा- अरे … मैं आपका भाई ही तो हूँ … मुझसे क्या शर्म?

उसने बोला- ठीक है.


पहले मैंने उसको बैठाया और उसका टॉप उतार दिया. अब मेरी खुद की सगी बहन मेरे सामने सिर्फ ब्रा में थी. मैं तो उसको ही देख रहा था.


उसने गुस्सा होते हुए मुझसे कहा- ऐसे क्या देख रहा है?

मैंने कहा- सॉरी … कुछ नहीं!


फिर मैं टॉवल ले आया और उसकी पेट और पीठ सभी जगह लगे बेसन को साफ करने लगा, पर ब्रा की वजह से ठीक से साफ नहीं कर पा रहा था.


मैंने उससे कहा- ब्रा भी उतार दो.

वो गुस्से से बोली- अपनी बहन को नंगी देखना चाहता है.

मैं बोला- मुझे क्या है … तुझे ही बेसन अच्छा नहीं लग रहा था … तो मैं बोल रहा हूँ … और तू मुझे ही गुस्सा बता रही है.


थोड़ा गुस्सा मैंने भी बताया, तो वो फिर प्यार से बोली- अरे मैं वो नहीं कह रही … पर हम भाई बहन हैं, तो मैं तेरे सामने नंगी कैसे हो सकती हूं.

मैंने कहा- जैसे मैं नंगा हो सकता हूँ, तो तुम भी हो सकती हो.


ये कहते हुए मैंने अपनी टी-शर्ट उतार कर फेंक दी.

फिर वो कहने लगी- अच्छा ठीक है.

मैं ख़ुशी से उछल पड़ा.


उसने फिर कहा- आकर खोलो तो इसे अब.


मैंने स्पीड में जाकर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसके 2 गोरे गोरे गोल गोल बूब्स, जिन पर हल्का हल्का बेसन लगा हुआ था, मेरी आंखों के सामने आ गए.


मेरा लंड आज तक इतने उफान पर नहीं आया, पर खुद की बहन के चुचे देख कर आज साला क़ुतुबमीनार को भी मात दे रहा था.


फिर मैं टॉवल लेकर उसके बाजू में खड़े होकर उसके मम्मों को साफ करने लगा.


इस प्रक्रिया में उसके हाथ में मेरा लंड टकराने लगा. वो कहने लगी- ये क्या है जो मेरे हाथ में बार बार लग रहा है.


मैंने ‘कुछ नहीं..’ कहा, तो वो कहने लगी दिखाओ- क्या है?

मैंने कहा- लंड है मेरा.

वो कहने लगी- दिखाओ मुझे.


मैंने झट से अपने पेंट को नीचे सरका दिया और साथ में मेरी अंडरवियर भी उतर गयी.


मेरे लंड को देखकर दीदी बोली- इतना बड़ा. वो भी खुद की बहन को देखकर ये सलामी मार रहा है … शर्म नहीं आती तुझे.

मैंने कहा- क्या करूं … आप हो ही इतनी सेक्सी.


वो मेरे मुँह से सेक्सी सुनकर हैरान हो गई और कहने लगी- कब से लग रही हूँ मैं तुझे सेक्सी?

मैंने कहा- जब आप अपना लोअर ठीक कर रही थी, तब से.

वो कहने लगी- अच्छा बच्चू.

मैंने कहा- दीदी एक बार बस आपके दूध पी लेने दे.

वो कहने लगी- सिर्फ दूध ही पियेगा या कुछ और भी करेगा.

मैंने कहा- जो जो आप कहोगी.


मैं फटाक से उठा और दीदी के मम्मों को चूसने लगा और दीदी गरम आहें भरने लगीं ‘आह आह आह…’


इससे मुझे और जोश चढ़ने लगा. मैं तो पहले से ही नंगा था, मैंने दीदी की कैप्री को एक झटके में उतार कर अलग कर दिया और फिर उनकी नारंगी रंग की पैंटी को देखने लगा.


वो कहने लगी- ऐसे क्या देख रहा है?

मैंने कहा- इसका रस पीना है मुझे.

दीदी कहने लगी- तुझे रोका किसने है?


मैंने फटाक से दीदी की पैंटी उतार दी. और अपनी जीभ को उसकी बिना वालों वाली बुर में घुसेड़ दी.


दीदी अभी तक वर्जिन थी … तो उसकी चूत चिपकी हुई थी और फूली थी. कुछ मिनट चुत चूसने के बाद मैंने उसे एक लंबा सा फ्रेंच किस किया. अब तक वो भी पूरे जोश में आ चुकी थी और मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी.


मैंने अपने होंठ उसके होंठ से हटा कर उसके मम्मों पर लगा दिए और एक हाथ से उसकी चूत से खेलने लगा.

उसके मुँह से मस्त आवाजें निकल रही थीं.


मैंने दीदी को अपना लंड दिखाते हुए बोला कि इसको मुँह में लो.

उसने लंड चूसने से मना कर दिया. मैंने भी ज्यादा जबर्दस्ती नहीं की.


इसके बाद मैं कोल्ड क्रीम ले आया, वो मैंने अपने लंड पर लगायी और थोड़ा सा दीदी की चूत पर भी लगा दी. फिर उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और अपना लंड डालने का प्रयास करने लगा. मेरी बहन की चुत सील पैक होने के कारण बार बार मेरा लंड फिसल रहा था.


फिर मैंने दीदी की टांगों को अपने कंधों पर रखा और पेलने की तैयारी में आ गया.


दीदी कहने लगी- धीरे से करना.

मगर मैंने पूरी ताकत से अपना लंड उसकी चुत के छेद में लगा कर घुसेड़ दिया. एक ही झटके में मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में समां गया और वो चीख पड़ी. उसकी आंखों से आंसू आ गए.


शायद उसकी.सील टूट चुकी थी. मेरे लंड में भी बहुत दर्द हो रहा था. मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया. फिर दीदी धीरे धीरे अपनी गांड हिलाने लगी, तो मैं समझ गया कि अब वो चुदने को तैयार है. अब अगले झटके दिए जा सकते हैं.


मैंने फिर एक बार पूरी ताकत से झटका मारा और इस बार मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में समा गया.

इस बार उसको थोड़ा कम दर्द हुआ पर वो लगातार चीख रही थी ‘आह आह..’

मैं रुक गया.


थोड़ी देर बाद जब दीदी नार्मल हो गई, तो मैं धक्के लगाने लगा. वो भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी. हम दोनों पूरे दस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करते रहे. फिर थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए. मैं नंगा ही दीदी के ऊपर पड़ा रहा. फिर थोड़ी देर बाद मैं उसके बाजू में सो गया.


तो दोस्तो, कैसे लगी मेरी बहन के साथ सेक्स कहानी …


मेरी प्यारी बहना की बुर की चुदाई


अपने दोस्त की बहन की चुदाई का कोई मौक़ा मुझे नहीं मिल रहा था तो मैं चूत का प्यासा हो रहा था. इसी बीच मुझे अपनी कुंवारी छोटी बहन की बुर की चुदाई का मौक़ा कैसे मिला?


नमस्कार दोस्तो, मैं राज आज एक नई कहानी को लेकर हाजिर हूँ।


दोस्तो, पिछले महीने की उन्नीस तारीख को एक दोस्त की शादी में मैं और मनीष दोनों गांव आये हुए थे।

पड़ोस में ही शादी हो रही थी और मनीष घर पर था तो मुझे पीहू को चोदने का कोई मौका नहीं मिल रहा था। इसलिए खाना खाकर मैं छत पर जाकर पीहू से फोन पर बात करने लगा।


मैं उससे बातें कर रहा तभी मेरी बहन ज्योति छत पर आ गयी और उसने मुझे रोमांटिक बातें करते हुए सुन लिया।

वो मेरे पास आकर बोली- किससे बात कर रहे हो?

मैंने कहा- किसी से नहीं!

तो उसने कहा कि मैंने सुना है तुम किसी से बात कर रहे थे।

मैंने अपना बड़ा वाला फोन उसे देते हुए बोला- देखो किसी से बात नहीं कर रहा था।

मेरी बहन ने कहा- ज्यादा चालाकी मत करो भैय्या, तुम किसी से तो बात कर रहे थे।


इतना कहकर वो मुझसे मेरा छोटा वाला फोन झटके से छीन लिया.

उससे मैंने अपना फोन छीनने का प्रयास किया तो फोन को वो दोनों हाथों से कसकर दबाकर घुटनों के बल बैठ गयी उसके हाथ उसकी गोद में उसके घुटनों और सीने के बीच में था।


मैंने उससे कहा- प्लीज फोन दे दो!

तो मेरी बहन ने कहा- पहले बताओ?

मैंने कहा- यार कुछ बातें पर्सनल होती हैं.

और उससे फ़ोन छीनने के लिए उसके पीछे आकर उसके दोनों हाथों को बाहर खींचने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाया।


उसके बाद मैंने उसके दोनों हाथों के कंधे के नीचे थोड़ी जगह जो बची थी उसमें से अपने हाथ झटके से अंदर डाल दिया मेरे हाथ अंदर जाते ही वो और कसकर चिपक गयी और मेरे हाथों के पंजे उसकी दोनों चूचियों पर लग गए।


चूंकि वो कसकर चिपक कर बैठी थी तो मेरे हाथों के पंजे उसकी नर्म चूचियों का अहसाह पा रहे थे। उसकी चूचियों का अहसास होते ही मेरे अंदर वासना जागने लगी।


अंधेरा काफी हो चुका था इसलिए मैं भी निश्चिन्त था कि कोई हमें देख नहीं पायेगा और वासना के वशीभूत होकर मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा।


मैं उससे सट कर उसकी चूचियों पर हाथों का दबाब बढ़ाते हुए उससे बोला- ज्योति प्लीज दे दो.

तो वो हँसती हुई बोली- नहीं भैय्या, मैं नहीं दूंगी।

मैंने अपने हाथों का दबाब उसकी चूचियों पर थोड़ा और बढ़ाते हुए, जिससे उसे पता चल जाये कि मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा हूँ, और अपने होंठों को उसके गर्दन से सटाते हुए बोला- ज्योति दे दो।


ज्योति हँसती हुई बोली- भइया, मैं नहीं दूंगी.

अब तक उसकी सांसें तेज़ चलने लगी थी जिन्हें मैं महसूस कर रहा था।


अब तक मैं भी समझ गया था कि जो मैं कर रहा हूँ ज्योति भी उसका मज़ा ले रही है इसलिए डर मेरे मन से निकल गया। मैंने ज्योति की चूचियाँ दबाते हुए उसे खड़ा कर दिया। उसकी दोनों चूचियों को दबाए हुए ही मैं अपने होंठों को उसके कानों के पास ले जा कर उससे कहा रहा था- ज्योति प्लीज दे दो!

और वो कह रही थी- नहीं दूंगी।


ज्योति अपने चूचियों पर से मेरे हाथों को हटाने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी बस उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और हंसकर वो कह रही थी- नहीं दूंगी।

बहन का कोई प्रतिरोध नहीं देख कर मैं समझ गया कि रास्ता क्लियर है और खुलकर बहन की दोनों चूचियाँ दबाने लगा.


तब भी वो कुछ नहीं बोली।


तब मैं बहन की गर्दन पर अपने होंठों से किस करने लगा।

अपने दोनों हाथों को मैंने उसकी टीशर्ट के नीचे डालकर उसकी ब्रा के ऊपर से बहन की चूचियाँ दबाने लगा.


इस पर ज्योति बोली- भइया क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कुछ नहीं … बस तुमसे प्यार कर रहा हूँ। क्या तुम्हारा मन नहीं करता है कि कोई तुमसे प्यार करे … अपनी बांहों में भरकर तुम्हें जिंदगी का सबसे हसीन सुख दे दे।

ज्योति ने कहा- भइया, आप मेरे भाई हैं. किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी।

मैंने कहा- मैं तो किसी से नहीं बताऊंगा. क्या तुम बताओगी?

तो उसने कहा- नहीं।


तब मैंने कहा- बस तो जिंदगी के मज़े लो! क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है?

तो बहन ने कहा- भाई, बहुत मज़ा आ रहा है।


तब तक मम्मी ने नीचे से आवाज दी और ज्योति ने मुझसे कहा- भैया मुझे जाना होगा.

तो मैंने कहा- सबके सोने के बाद छत के ऊपर वाले मेरे रूम में आ जाना.

बहन ने कहा- दरवाजा खुला रखना।


मैं भी उसके जाने के बाद अपने कमरे में आकर आराम करने लगा। मुझे नींद नहीं आ रही थी.


रात में लगभग ग्यारह बजे कमरे का दरवाजा खुला और मेरी बहन ज्योति अंदर आकर दरवाजा बंद करने लगी।

इतने में मैं उठकर उसके पास गया और पीछे से बहन की दोनों चूचियाँ पकड़ कर दबाते हुए बोला- कितना इंतज़ार करवा कर तड़पा रही थी!

तो उसने कहा- भईया, जब सब सो गए तो मैं आयी हूँ।


ज्योति को पलट कर मैं उसके पूरे चेहरे पर किस करने लगा. मेरी बहन ने भी मदहोश होकर मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया।

बहन ने मुझसे कहा- भैया, लाइट बन्द कर दो, शर्म आ रही है.

तो मैंने कहा- मेरी प्यारी बहना … कुछ देर बाद तुम्हें चोदकर तुम्हारी शर्म मिटा दूंगा।


उसने अपना सर मेरे सीने में छिपा लिया।


मैंने उसके हाथों को ऊपर उठाकर बहन की टीशर्ट को उठाकर निकाल दिया। बहन की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा भी निकाल दी।

तब मैंने अपना टीशर्ट और बनियान निकाल दिया।


बहन की बर चुदाई

बहन की बर चुदाई

मैंने कहा- ज्योति, तुम बहुत खूबसूरत हो!

तो उसने आँखें खोल कर मेरी आँखों में देखते हुए कहा- सच में भैया?

मैंने कहा- पागल … तेरे भैया तुमसे क्यों झूठ बोलेंगे?

और उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी।


कुछ देर उसके होंठों को चूसने के बाद मैं झुककर बारी बारी बहन की दोनों चूचियाँ को चूसने लगा. वो आँखें बंद कर मेरा सर सहलाते हुए चूचियाँ चुसवाने का मज़ा ले रही थी।


इसके बाद मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसके पेट को चूमने और अपनी जीभ से उसकी ठोढ़ी के आसपास चाटने लगा।

ज्योति अपनी आँखें बंद कर मेरे सर के बालों को सहला रही थी।


उसके बाद मैंने बहन की लैग्गिंग्स उतार दी. फिर मैंने बहन की पैंटी भी उतार दी। अब मेरी बहन मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

मेरी बहन की बुर पर एक भी बाल नहीं था. लग रहा था शाम को ही उसने अपनी चूत के बाल साफ किये हैं।


मैंने ज्योति को दीवार से सटा कर खड़ी कर दिया और उससे कहा कि वो अपना एक पैर मेरे कंधे पर रख दे.

वो अपना एक पैर मेरे कंधे पर रखकर मेरे सर को पकड़ कर दीवाल के सहारे खड़ी हो गई।


मैंने ज्योति की कमर को पकड़ कर बहन की बुर पर एक किस किया.

वो सिहर गयी.

फिर मैंने अपनी बहन की बुर में अपनी जीभ डाल कर चूसना शुरू कर दिया.


वो मुझसे कहने लगी- भईया प्लीज छोड़ दीजिए!

लेकिन मैंने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और बहन की बुर चूसता रहा.


लगभग सात या आठ मिनट बाद ज्योति का शरीर अकड़ने लगा और मेरी बहन की बुर ने पानी छोड़ दिया मैं उसका सारा पानी पी गया।


इसके बाद ज्योति ने मुझसे कहा- भैया, मुझे आपसे बात नहीं करनी है. आप मेरी बात नहीं मानते हैं.

मैंने उसके माथे पर एक किस करते हुए कहा- पागल ये बता कि तुझे मज़ा आया या नहीं?

तो उसने मेरे सीने पर किस करते हुए अपना चेहरा मेरे सीने में छिपा लिया।


मैंने ज्योति को सामने बैठने का इशारा किया तो वो मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी।

मेरे इशारे पर ज्योति ने मेरे लोवर और अंडरवियर को उतार दिया।


अब मेरा खड़ा लन्ड उसके सामने था. वो बोली- भइया कितना मोटा और बड़ा है आपका!

तो मैंने कहा- मेरा लंड मेरी बहन के लिए है!

वो शरमा गयी।


मैंने उसे लन्ड को चूसने का इशारा किया तो वो मेरा लन्ड अपने हाथों में लेकर चूसने लगी और मैं उसके सर के बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगा।


कुछ देर तक लन्ड चुसवाने के बाद मैंने ज्योति को खड़ी कर दिया और उससे पूछा- कभी किसी से चुदी हो?

तो वो मेरा कसम खा कर कहने लगी- नहीं भईया!

मैंने कहा- पागल, कसम खाने की क्या जरूरत है? मुझे अपनी बहन पर पूरा भरोसा है।


फिर मैंने उससे पूछा- तू इतनी खूबसूरत है, तेरे चक्कर में तो बहुत सारे लड़के पड़े होंगे?

तब उसने कहा- हाँ बहुत लड़कों ने मुझे प्रपोज़ किया है पर मैंने किसी का असेप्ट नहीं किया है।


मैंने कहा- ज्योति कोई पसन्द हो तो बताना. मैं उसके बारे में पता कर बताऊंगा कि वो तुम्हारे लायक है कि नहीं.

इस पर ज्योति बोली- अब से सिर्फ आप और जिसे आप मेरे लिए ढूँढेंगे, वो ही मेरी जिंदगी में होगा।


मैंने ज्योति को गोद में उठा लिया औऱ बिस्तर पर लिटा दिया. बहन की दोनों टाँगों को फैलाकर उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया।


मैं अपने लन्ड को बहन की बुर पर सेट करने जा रहा था कि ज्योति ने मुझे रोक दिया और बोली- भैया सच बताइए, अब तक कितनी लड़कियों को चोदा है?

तो मैंने कहा- बस पीहू को!

वो बोली- बस एक लड़की अभी तक?

तो मैंने कहा- नहीं … आज दूसरी चोदूंगा।


ज्योति हँसते हुए बोली- हाँ … और दोनों तुम्हारी बहनें ही हैं।

मेरी बहन ने फिर कहा- कोई बात नहीं भईया, अब आपकी लड़कियों से सेटिंग मैं ही करवाऊँगी।


मैं अपने लन्ड पर थूक लगाते हुए बोला- ज्योति पहली बार में दर्द होगा, उसको सह लेना. शोर मत मचाना.

तो उसने आँखों से इशारा किया- ठीक है।


इसके बाद मैंने अपने लन्ड का सुपारा बहन की बुर के छेद पर रखकर हल्का सा पुश किया तो उसकी बुर के छेद में सुपारा सेट हो गया.

मैंने झुककर ज्योति के दोनों होंठों को अपने मुंह में लेकर एक झटका उसके दोनों कंधों को अपने हाथों से दबाते हुए लगाया. तो आधा लन्ड मेरी बहन की बुर में धंस गया.

पीहू नीचे छटपटाने लगी थी.


तभी मैंने दूसरा धक्का मारकर पूरा लन्ड बहन की बुर में डाल दिया।

मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लन्ड कुछ चीरते हुए आग की भट्टी में चला गया है।


नीचे मेरी बहन छटपटाकर रह गयी.


कुछ देर बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ दिया तो वो बोली- भईया, आप बहुत बेरहम हो. निकालिये इसे … बहुत दर्द हो रहा है.

तब मैंने उससे कहा- कुछ देर और सह लो, उसके बाद मज़ा आएगा।


कुछ देर बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाकर उसे चोदना शुरू किया।


थोड़ी देर बाद उसने अपने दोनों पैरों को मेरी कमर में लपेट दिया और कसकर मुझे अपनी बांहों में भर लिया.

मैं समझ गया कि मेरी बहन अब अपनी चुदाई का मज़ा ले रही है।


मैंने ज्योति से पूछा- बहना … चुदाई का मज़ा आ रहा है?

तो उसने कहा- हाँ भइया।


लगभग दस मिनट बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया।

उसके बाद मैंने भी जोर जोर धक्के लगाकर ज्योति को चोदना शुरू कर दिया. कमरा फच फच की आवाज से गूँजने लगा।


मैं बहन की बुर में से लन्ड किनारे तक निकाल कर उसके कंधों को अपने दोनों हाथों से दबाकर जोर का झटका लगाकर उसकी बुर चोद रहा था। हर झटके पर पूरा बेड हिल जा रहा था।

ज्योति भी अपनी गांड उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी।


करीब दस मिनट और चोदने के बाद मेरे लन्ड ने बहन की बुर में पानी छोड़ दिया, मेरा पूरा शरीर कांप गया।


पानी छोड़ने के बाद भी दो मिनट तक बहन की बुर में धक्के लगाता रहा और उसके बाद निढाल होकर ज्योति के ऊपर ही लेट गया।

उस रात मैंने ज्योति को एक बार और चोदा.


वो सही से खड़ा नहीं हो पा रही थी. मैंने उसे दर्द की गोली दी और उसे उसके कमरे में छोड़ कर वापस अपने कमरे में आ गया।


भैया मैं आपकी छोटी बहन हूँ-1


मेरी फॅमिली मे हम 4 मेंबर्ज़ हैं.मेरे पापा जो की एम.पी मे सरकारी जॉब करते


हैं और मोन्थ मे 1 या 2 बार ही घर आते हैं.


मेरी मम्मी, भैया और मैं. मेरा नाम कंचन है और मैं 13 साल की एक सुंदर


गोरी लड़की हू और 8थ क्लास की स्टूडेंट हू ,मेरी हाइट 5फ्ट,3इंच है, मेरा बदन


बहुत ही कोमल है और मेरा फिगर 32-28-34 है. मेरे बड़े भैया का नाम अनुज


है और उनकी एज 21 यियर्ज़ है और वो बी.ए फाइनल एअर की स्टडी कर रहे


हैं.ओके अब मैं आप लोगो को अपने बारे मे बता देती हू मैं एक बहुत ही शरीफ


लड़की हू और अपनी क्लास मे सबसे सुंदर हूँ, मेरी क्लास के लड़के और बाकी


स्कूल के लड़के मुझे अक्सर छेड़ते रहते है, और मेरी सेक्सी बॉडी पर कॉमेंट्स मरते, लेकिन मैं ने कभी मूड कर उनको कोई रेस्पॉन्स नहीं दियाया क्योंकि मेरे मन मे सेक्स के बारे मे कभी कोई ख़याल नही आया.


मेरे भैया मुझे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी. लेकिन मुझे क्या पता था


की भैया ये भाई-बहन वाला प्यार भूल कर मुझे ही चाहने लगे थे और मुझ से सेक्स के खाविश्मंद थे. अच्छा तो अब मैं अपनी मैं टॉपिक पर आती हूँ. ये बात आज से 4 महीने पहले की है जब मेरी मम्मी को एक हफ्ते के लिए आउट ऑफ स्टेशन जाना पड़ा क्योकि मेरे मामा की शादी थी. पर उस टाइम मेरे एग्ज़ॅम्स चल रहे थे जिसके कारण मैं नही जा सकती थी और मम्मी मुझे अकेला छोड़ के भी नही जा सकती थी क्योकि उस टाइम पापा भी एम.पी मे थे इसलिए मम्मी भाई को मेरा ख़याल रकने के लिए मेरे पास ही रहने को कहा और


चली गई.भैया मम्मी को स्टेशन ड्रॉप करने गये फिर मैने डोर बंद कर दिया,


और टीवी देखने लगी. शाम के करीब 6 बजे भैया स्टेशन से वापस आए फिर


भैया और मैं बातें करने लगे. हम दोनो ने मिल कर


डिन्नर बनाया और फिर रात को डिन्नर कर के भैया और मैं टी.वी पे मूवी देखने


लगे और मूवी देखते देखते मुझे पता नही कब नींद आ गई रात करीब 1:30


बजे मेरी नींद खुली, कमरे मैं नाइट बल्ब की मधाम रोशनी हो रही थी. मैने देखा भैया ने अपना लंड पैंट से बाहर निकाल रखा था और उसे सहला रहे थे और एक हाथ से


मेरे नन्हे नन्हे मासूम बूब्स को सहला रहे थे. ये देख कर मुझे भैया पे बहुत तेज गुस्सा आया और मैं भैया पर भड़क उठी,भैया ये आप क्या कर रहे हो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.भैया एक दम से डर गये उन्हो ने अपनी पॅंट ठीक की और कहने लगे कंचन आइ लव यू. मैने कहा भैया ये किया बदतमीज़ी है मैं आपकी छोटी बहन हूँ.


आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं, अगर आप मेरे साथ ऐसी बदतमीज़ी


करोगे तो मैं आपसे कभी बात नही करूँगी और मैं रोने लगी. फिर भैया


ने कहा सॉरी कंचन मैं बहक गया था मैं अब ऐसा नही करूँगा मुझे माफ़


करदो. मैं कमरे से बाहर निकली डोर बंद किया और मैं अपने रूम मे जाके सो गई.


अगले दिन मैं सुबा जल्दी उठ कर नहाने चली गई, नहाने के बाद मैने येल्लो


कलर का टॉप और वाइट स्कर्ट पहना फिर मैं भैया को जगाने गई, उस हादसे के


बाद मुझे भैया के पास जाना अजीब सा लग रहा था, पर वो थे तो मेरे भैया


मुझे लगा की भैया अब सरमिंदा होंगे. मैने उन्हे जगाया और कहा भैया चलिए


जाकर मूह धो लीजिए मैं चाइ लेके आती हूँ और मैं चाइ बनाने चली गयी.


थोड़ी देर बाद मैं चाइ लेके आई,तो भैया ने मुझ से बोला कंचन, कल रत को जो हुआ तुम उसके कारण मुझसे नाराज़ तो नही हो ना! मैने कोई जवाब नही दिया फिर भैया ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा, देखो कंचन मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हू और जैसे जैसे तुम जवान हो रही हो मैं तुम्हे और भी प्यार करना चाहता हूँ


मैं फिर से रोने लगी और कहा भैया मैं आपकी छोटी बहन हूँ आप जो भी


कर रहे है वो सब ठीक नही है, और आप मेरे बड़े भाई हो आप मेरे साथ ऐसा


नही कर सकते ये सब ग़लत है.


भैया को मेरी बात और आँसुओं का कोई फ़र्क नही पड़ रहा था. और फिर भैया


ने मेरे कदमों पे अपना सिर रखते हुए कहा, कंचन,मैं तुझ से बहुत प्यार


करता हूँ मैं पूरी ज़िंदगी तेरा गुलाम बन कर रहूँगा,तू जो


कहोगी,करूँगा, लेकिन मुझे निराश मत कर,वरना मेरी हालत एक मुर्दे जैसी हो


जाएगी.प्लीज़, कंचन तुम मेरी बेहन हो,मेरे ऊपेर रहम खारो,प्लीज़ मान जाओ एक


भाई अपनी बेहन के कदमों में पड़ा अपने प्यार की भीक माँग रहा है और अगर


मेरा प्यार मुझे नही मिला तो मैं अपनी जान दे दूँगा.


अब मुझे भैया के उपर तरस आ रहा था और अपने लिए अपने भैया का प्यार देख


कर मेरे सारे बदन मे आग लग गई फिर मैने भैया का हाथ पकड़ा और कहा


ठीक है भैया लेकिन यह संबंध समाज के मुताबिक अवैध हैं और अगर किसी


को भी मालूम हो गया तो हमारी बहुत बदनामी होगी ये शब्द कहते ही भैया ने


मुझे अपनी बाहों मे भर लिया और मेरी कमर मे अपना हाथ डालते हुए कहने लगे


कंचन तो चिंता मत कर और मेरे कुंवारे गुलाबी होंटो को चूसने लगे और कहने लगे आइ लव यू कंचन अगर तू मुझे नही मिलती तो मैं मर ही जाता तो मैने कहा नही


भैया मैं भी आप से बहुत प्यार करती हून आज के बाद कभी मरने की बात मत


करना. फिर क्या था मेरे इतना बोलते ही भैया की ख़ुसी का तो कोई ठिकाना नही


रहा. उन्होने मुझे अपनी बाँहों मैं उठाया और अपने रूम मैं लेगये. और मुझे


बेड पर लिटा दिया और मेरे होटो को बुरी तरहा चूमने लगे. भैया इस तरहा मेरे


होटो को चूम रहे थे जैसे से आग बरसों पुरानी हो. वो एक हाथ से मेरी जाँघो


(थाइस)को सहलाने लगे. आफ्टर 5 मिनट मुझे भी सेक्स का भूत सवार होने लगा.


मेरी छोटी छोटी सी निपल्स टाइट होने लगे थे.और फिर भैया ने धीरे से अपना हाथ मेरी


टी-शर्ट मे घुसा दिया और मेरे बूब्स पे ले गये और सहलाने लगे मेरे पूरे


शरीर मे कुछ हो रहा था अब मैं भी किस्सिंग में भैया का साथ देने लगी.


मेरा रेस्पॉन्स देख भैया धीरे-धीरे अपना हाथ मेरी चूत की फांको के पास ले गये और चूत को सहलाने लगे. मेरी चूत में अब गुदगुदी होने लगी थी. उउउफफफ्फ़ ओउउच


मैं फर्स्ट टाइम किसी के साथ सेक्स कर रही थी वो भी मेरे भैया के साथ.


मेरा पूरा जिस्म कांप रहा था तभी भैया उठे और मेरी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार


दी अब मैं भैया के सामने सिर्फ़ पॅंटी मे थी शर्म के मारे मेरा चेहरा


लाल हो गया था और मेरा बदन कापने लगा मुझे बहुत शर्म आ रही थी.भैया


की आँखों की चमक और बढ़ चुकी थी. और भैया मेरे नंगे छोटे छोटे मुम्मों


को सहलाने लगे.. मेरे मूह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली आअहहसिईइ आईईईई भैया


यह आप क्या कर रहे है प्ल्स मुझे छोड़ दो


कंचन मेरी प्यारी बहन तुम्हारा भाई तुमसे प्यार कर रहा है आज अपने भैया को


मत रोको और देखते ही देखते उन्होने मेरी ऐक चूची अपने मूँह मैं भर ली,. मेरे सख़्त और नुकीले मुम्मो को देखके भैया से रहा नही गया और वो कहने लगे कितना गदराया हुआ और सख़्त बदन है तेरा कंचन तेरा. और मेरी एक चुचि को मूह मे लेके चूसने लगे मेरे शरीर मे करेंट सा दौड़ने लगा. ये सोच के मेरे सगे भैया


अपनी सग़ी छोटी बेहन के बदन को चूम रहे है.


भैया मेरे मुम्मो को बारी बारी से चूस रहे थे और कभी कभी निपल्स को


काट भी रहे थे और मेरी तो जैसे जान ही निकल रही थी . .. और मैं


सिसकिया लेने लगी .. . अयाया . .भैया ..उफ़फ्फ़. और भैया मेरे निपल्स के साथ


खेलते हुए मेरी मरमरी चिकनी चिकनी जंघे को भी सहला रहे थे फिर भैया


धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे और नाभि


पे किस्सिंग करने लगे और फिर मेरी थाइस चूमने लगे और फिर मेरी गोरी


जाँघो को सहलाते हुए उन्होने मेरी पॅंटी खींच दी और भैया


मेरी छोटी सी बिना बालो की गोरी गुलाबी चूत को देखते ही रह गये.


भैया मैं 

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