मेरी माँ गर्म अध्याय 8

 

                     मेरी माँ गर्म अध्याय 8

पूनम देवी :: पैगल … ufff .. अननना आहह्ह; hhhhhhhhhhhhhhhhhhh.abbbbbaaaaaaaaaaaaa hatttt बाबा

 सोनू की मम्मी थोड़ा सा आगे जाने लगेंगे बैठे हुए तो सोनू ने पीछे से उनकी दोनो कलाइयां पकाड़ ली

 सोनू की मम्मी;  छोड ना बस कर ना

 सोनू;  ये हाथ मैंने चोदने के लिए पके

 और अपनी उर उनको खिंचा।

 पूनम देवी :::: Ouchhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी kalaiiii

 सोनू :: उन बस दूर दूर जाति हो मुज से, तड़पाती हो मुजे

 सोनू अब कलायों को पीछे से पके हुए ही उसकी मम्मी के कान के पास अपने होने ले गया और कान को चुनने लगा।  धीरे से उनके कान के बॉर्डर पे होठों से चाटने लगा।

 अपनी मम्मी के कान को चुमते सोनू ने अपनी मम्मी के कान को हलके से बहुत ही हलके से होठों से ही काटने किया।

 सोनू की इनी सब हरकत से सोनू की मम्मी बी गरम हो उठी उससे ये सब अच्छा लगा लगा ठकोई बी औरत हो जब जब उसका प्रेमी उसके साथ है तो उससे प्यार करेगा वो तो उसे दीवानी हो जाएगी उसे जाएगी

 पूनम देवी ::: OucchHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHH ShOURUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUHHHHHHHHHHHHHHIIIIII MATT KAR WAISE

 सोनू ने अपने मम्मी के हमें कान को छोटा तो अब दूसरे कान को भी उसी तरह से छेदा और हल्के से होठों से काटने किया।  सोनू की मम्मी तो हरकत से जैसे बिलक ही उठी है।

 पूनम देवी ::::: ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई)

 सोनू;  आदत नहीं तो अब ये आदत दाल लो अब तो रोज़ करुंगा मील

  या जैसे ही सोनू ने जैसे ही उनकी कलाइयां चोड़ी तो वो कोने में घन के बैठे या लंबी लंबी सांस ले कर अपने आप को ठिक करने लगी जिस से उसकी चुचिया आप बड़ी तेजी से ऊपर आला हो रही मां इतनी बड़ी…  जो सब हरकातो से खुल सी गई थी उसे थिक करने लगी तो सोनू अपनी मम्मी के जोड़े के पास बैठा था तो सोनू ने अपनी मम्मी के एक जोड़ी को अपने हाथ में लिया और जोड़ी के अंगूठे को और जोड़ी को चुनने के लिए।

 सोनू :: ummmmmmm आपकी जोड़ी भी कितनी कोमल है

 पूनम देवी :: ऐ ऐ ऐ उफ्फो plss सोनू उन्न्न बदमाशह plss बेटा उन्हुन्नन क्या किया करता है … बास ना आह्ह्ह्ह

 सोनू अब उसकी मम्मी की जोड़ी के अंगूठे को मुह में ले लिया और चुना लगा।  ऐसा करने से सोनू की मम्मी को ऐसा लगा की जैसे सोनू उनके जोड़े के अंगूठे से उनके अंदर एक काम ज्वाला जैसा इंजेक्षन कर रहा हो।

 पूनम देवी ::: उच्ह्ह्ह्ह्ह सोनू।  केया कुररा है

 सोनू :: ummm yummmmmmmmmmmummmmm oummmmmmmmmm…जान आपका अंग चाहिए ना आपका इंच इंच चाहिए ना।  आई लव यू जान।  मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।  आप दुनिया की सबसे सुंदर औरत हो पापा बहुत अच्छे हैं..पर मेरे जितना प्यार आपको कोई नहीं कर सकती मम्मी।  कृपया मेरी हो जाओ ना आप।

 सोनू एक तार से तो मम्मी से रोमांस करके उनके अंदर जैसे भावनायें भड़का रहा था।  दूसरी तरफ अपनी मम्मी की तारीख और उसके दिल में उनके लिए चुपा हुआ प्यार भी ज़हीर कररा था।  अपने बेटे के ऐसे डबल अटैक से सोनू की मम्मी के दिल में अजीब तार की भावना का समुंदर जैसा बह रहा था।

 पूनम देवी: अभी तो इतनी सारी की न बदमाशी मन नहीं भरा तेरा।

 सोनू: नहीं, ऐसे कैसे भर सकता है मेरी प्यारी मम्मी से मन, आपके जीवन भर भी प्यार करुंगा तो मन नहीं भरेगा मम्मी।  आई लव यू

 पूनम देवी : बेटा तेरे पिताजी को……..

 कहते हैं सोनू की मम्मी रुक गए, फिर से सोनू उनके पास आया फेस के और उनके चेहरे को प्यार से पक्का अपने दनों ही हाथों से और उनकी आंखों में देखते हुए।

 सोनू: शाह, मैं हूं ना पूनम, सब संभल लुंगा मैं, आप पर कोई भी मैं इल्जाम आने नहीं दूंगा, बस मेरे साथ हो तो मुझे किसी का डर नहीं मेरे ऊपर आपको भरोसा है ना।

 सोनू की मम्मी को अपने बेटे पर पूरा भरोसा था, शायद इतना भरोसा उनको दुनिया में किसी और पर नहीं था।  इस्लिये उसके इस्किब प्रशस्त के बावजूद भी और उनके मन में उसके प्रस्‍ताव को पूरी तरह से न मनने के बावजूद भी उन्‍होने बस बेटे की ओर देखे जैसे सर हिलाया के उन्‍को उसपर तो पूरा भरोसा है।  बस तबी अचानक दुकान के दरवाजे पर दस्तक हुआ।  सोनू की मम्मी घबड़ा गई।  सोनू ने भी सोना है समय यहां कौन।वो बुधिया तो नहीं।

 

 हमारे दरवाजे के खटखटने की आवाज ने सोनू की मम्मी को बहुत घबड़ाहट में दाल दिया।  वो झट से उठके अपनी साड़ी जो बिखर गई थी उसे ठीक करने लगी, अपने बाल और मंगलसूत्र भी ठीक करने लग गई वो

 सोनू अपने में ही बात करता हूं की समय कौन आया कबाब में हदी बोलता हुआ दरवाजा की ओर बड़ा खोलने को।  उसे जाकर दरवाजा खोला और बहार वही बुधिया खड़ी थी।

 सोनू :: ओह अम्माजी आप इतनी रात को।

 बूढिया :: वो बेटा माई तो मुझे तुम लोगों को पूछना ही भूल गई थी कुछ खास के नहीं।  ओढ़ने के लिए बस मेरे पास ये एक ही बेडशीट है तुम लोग चाहो तो रखलो बेटा।

 सोनू :: नहीं हैं अम्माजी।  आप आप ओढलीजिये।  बस एक ही रात की बात है ना हम लोग बिटालेंगे और सुबह निकल जाएंगे।

 बूढिया की आवाज़ सुनके सोनू की मम्मी को थोड़ा सा जान में जान आई और वो भी अब दरवाजे के पास आके उनसे बात करने लगे।

 पूनम देवी :: नमस्ते अम्माजी, आपका बहुत धन्यवाद हमको इधर शरण देने के लिए।  हम तो शादी से आरे ना तो खाकर ही आए हैं।  बस बारिश की वजह से भीग कर इधर रुक गए, वर्ना तो शहर को चले जाते।

 बूढिया :: अरे तुम दो तो काफ़ी भीग गए हो।  रुको माई दोनो के लिए चाय ही बनाके लाते हैं।  माफ करना बिटिया क्या करुण अब है बूढ़ी औरत के पास और कुछ ज्यादा नहीं तुम लोगों की मदद को।

 पूनम देवी :: हैं अम्माजी आप आप तकलीफ मत कीजिये न चाय वगेरा की।

 बूढिया :: हैं ऐसे कैसे, हमारे गणव में अतिधि तो भगवान का रूप होता है बिटिया।  रुको बस मैं 5 मिनट में लाती हूं चाय दोनो के लिए।  तुम लोगों को थोड़े गरमी मिलेंगे।

 बूढिया गई चाय बनाने लार वो क्या जाने की सोनू को अपनी मम्मी से और सोनू की मम्मी को सोनू से रोमांस की वजह से गरमी मिल ही रही थी।  अच्छा फ्लो चल रहा था सोनू का जिस्को बूढिया ने तोड़ करदिया था।  सोनू ने फिर से मम्मी की ओर देखा।

 सोनू :: शिट मम्मी, अच्छा प्यार का फ्लो चल रहा था न बूढिया ने आकार परेशान करदाला।

 पूनम देवी :: श कुछ भी ना, इतनी तो बदमाशी की अभी क्या मन नहीं भरा, अच्छा ही हुआ वो आगायी।

 सोनू :: ओह अच्छा जी।  तो क्या हुआ वो बूढिया जाएगी भी ना फिर से चाय देके फिर देखो।

 पूनम देवी :: ऐ शैतान।  मार खायेगा अब.. आज के लिए बस इतना ही।

 सोनू :: ये तो स्टार्टर भी नहीं था न मम्मी ठीक से और पूरा खाना कब मिलेगा मुझे।  ((सोनू ने नॉटी स्माइल दे जैसे डबल मीनिंग में बोला अपनी मम्मी को))

 पूनम देवी :: आआन।  पता नहीं क्या किया करता है बदमाशियां और कहां से मांगे ये सब।

 सोनू :: हे मम्मी।  आजकल तो जमाना फास्ट होगा है।  डैडी ने तो ये सब नहीं किया होगा न ही पता होगा न ठीक से..वैसे क्या तुम ये सब अच्छी नहीं लगी बदमाशिया। पिता जी ने तो कुछ पढ़ाया नहीं होगा अब मेरी हो गई हो ना तो मैं सब या फिर सिखा दूंगा  मम्मी को पिच से अपनी बहो मी भर लिया

 

  पूनम देवी :: ओयेई ची, पागल कहीं का, शैतानन्नन्नन (सोनू की मम्मी ने सोनू का कान पक्का))

  तबी अचानक बूढिया के आने की आहट हुवी तो सोनू की मम्मी ने उसका कान छोड दिया।

  बूढिया :: लो लो बेटा, बिटिया तुम भी लो गरमा गरम चाय।  ये अद्रक वाली चाय है बारिश में बहुत अच्छी होती है ये।

  सोनू :: थैंक यू अम्माजी।

  पूनम देवी :: आपका बहुत बहुत धन्यवाद अम्माजी।  आप ने सहारा नहीं दिया होता तो बड़ी मुश्किल हो जाते हैं मुझे।

  बूढिया :: हैं बिटिया, तुम लोग तो मेरे महमान हो और इतने भले लोग हो।  बहुत साल बाद ऐसी बारिश देखी मैंने।  यहां तो बारिश हो तो तीन दिन तक होती रहती बिटिया।

  पूनम देवी :: हे भगवान।  अम्माजी सुबा तक रुक जाए तो ठीक है हम लोगों को शहर भी जाना है।

  बूढिया :: बिटिया चिंता मत करो।  बारिश न भी रुके तो इधर रह सकती हो कोई चिंता की बात नहीं।  आगे सड़क भी बहुत ही खराब हैं।  बारिश रुक भी जाए तो एक दो दिन तक कच्ची सड़क पर जाना ठीक नहीं।

  ये सुनके सोनू के दिमाग का बल्ब चमक और वो सोने लगा की गर यहां पे दो दिन रहने का मौका मिल जाएगा तो बहुत मजा आएगा।  ऐसा मम्मी के साथ इस्को प्राइवेसी फिर घर पे मिलना मुश्किल होगा।  मम्मी अगर डैडी को फोन पर बताएंगे की यहां बारिश नहीं रुकी और इधर ही रुकना होगा एक और दिन तो डैडी भी मना नहीं करेंगे।

  चाय पीने के बाद बुद्धि वो चाय के मिट्टी के कप लेके जाने लगी।

  बूढिया :: अच्छा बिटिया अब दरवाजा लगालो एयर सोजाओ।  सुबाह उठके मैं दरवाजा मारूंगा ठीक है ना तुम लोगो को नशा दूंगा।

  पूनम देवी :: ओह अम्माजी बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

  सोनू की मम्मी ने फिर से दूर के पास खड़ी होके बारिश देखराही और बूढिया को अपनी झोपड़ी में जाते देख रही थी।  अब वो जैसे ही दूर लगा तो अचानक सोनू ने उनकी कमर के साइड पे वही दूर के पास चूम लिया।  उनकी कमर के साइड पे जो गुना पढा था वो सोनू को बहुत पसंद था और सोनू से रहा नहीं गया और उसे होने वहां कमर के गुना पे लगादिये।

  पूनम देवी :: ISSSSSSSSSShhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh .. Kyaa kartaa hai UNN Jaate हाय Shuru प्राथमिकी से Teree badmaashi isshhhhhhh।

  सोनू तो पीठ से मम्मी की कमर पक्कड़ के साइड पे कमर के भूल से चूम रहा था।  या चुमते बोला मेरी रानी इसे बदनामी नहीं प्यार कहते हैं

  सोनू :: ummm yummmmm yummmmmmm yummmmmmmmmmmmmmmmm

  पूनम देवी :: उफ्फ्फू श्ह्ह्ह्ह ऐ बस भी अब ना..सोनू…..बेटा..

  सोनू की मम्मी ने उसे दूर किया और साड़ी ठीक करली।

  पूनम देवी :: बहुत बदमाश है तू सोनू।

  सोनू :: आप इतनी सुंदर हो इसमे मेरे क्या गलते हैं।

  पूनम देवी :: कोई सुंदर नहीं.. बस झूठी तारीफ करके नकाब लगाती है ना।  तेरे पिता जी ने तो आज तक नहीं कहा:

  सोनू :: मुझे सच करो।  आप तो हीरोइनों से भी सुंदर हो मम्मी।  कसम से.  भगवान ने मेरी मम्मी को बहुत ही फुर्सत से बनाया है।  स्वर्ग की अप्सरा हो आप. राही बात पिता जी उनके पास वक्त ही कहा होता है आपके लिए

  पूनम देवी :: हाहा… पागल…इतना झूठ… स्वर्ग की अप्सरा।

  सोनू :: हा स्वर्ग की अप्सरा ही इतनी सुंदर हो सकती ना।  मैं कितना लकी हूं जो आप मेरी मम्मी हो..आई लव यू

 

  सोनू ने मम्मी के गाल को हल्के से चूमा।

  फिर से वो उनकी आंखें में देखने लगा।  सोनू की मम्मी भी जैसे अब धीरे धीरे उसके प्यार में विवाह होराही थी।  पर वो गिल्ट और डर के मारे पूरी तरह से दिल को नहीं मन पा रही थी।  एक तराफ था उनका सागा बेटा जो उनपर जान चिदकता था।  पर दूसरी तरफ समाज को और उनके पति को बात का पता चल जाने का डर है।  ये सोने में थी उसकी मम्मी सोनू की आंखें में देखते हुए की सोनू ने फिर से प्यार से अपनी मम्मी को घन में लिटा दिया।  पर आखिर वो एक मां थी और अपने ऋषि बेटे को ऐसे करते देख शर्म से लाल तो हो ही रही थी.क्यूकी वो एक औरत बी थी या कोई मर्द और रात में अकेले किसी मर्द के साथ हो या वो उससे आपके साथ  दे तो वो कह तक उसका विरोध कर शक्ति थी

  ऐसे ही अपनी मम्मी की आंखों में प्यार से देखते हुए फिर से सोनू ने अपना हाथ आला ले जा कर उनकी साड़ी का पल्लू हटके साइड कर डाला

   ब्लाउज़ मी क़ैद किसी पहाड़ की तरह खादी सोनू की मम्मी की बड़ी बड़ी चुचिया जिस को देख कर कोई देवता दो पागल हो जाए सोनू तो इतने करिब से अपनी मम्मी के रसभरे संत्रो को निहार रहा था।  सोनू अपनी मम्मी के ब्लाउज़ मी कासी चुचियो को देखता हूं थोड़ा सा नीचे को आरा था।  ब्लाउज काफ़ी भीग चुका था जिस के उनके स्तन का आकार और निप्पल का आकार भी स्पष्ट रूप से सोनू को नज़र आरा था।  उसकी मम्मी ने शर्मा के ब्लाउज के ऊपर हाथ रख डाल।  सोनू के पिता जी के बाद सोनू दसरा मर्द था जो पूनम देवी की चुचियो को इतने करिब से देख रहा था तो सोनू थोड़ा और नीचे को गया।  सोनू की मम्मी के दूधिया गोर पेट पर सोनू की नज़र पड़ी।  उनका पेट और कमर तो सोनू को बहुत ही ज्यादा पसंद था।  उस दुकान की मंद रोशनी में भी उनका पेट और गोरा बदन जैसा चमक रहा था गोरा होने के करन।

  सोनू ने अब फिर से उसकी मम्मी की कमर को दोनो साइड से हाथ से और झुकते हुए अपने होते हैं उनके गोरे पेट पर लगादिए।  सोनू की मम्मी का पेट ऐसा था मानो की मक्खन और मलाई मिलाके किसी ने उसपर लेप लगा हो।  बहुत ही सॉफ्ट, बहुत ही गोरा चिकना मानो अगर हाथ रख दो तो फिसाल जाए।  अब ऐसे खूबसूरत अपने मम्मी के पेट पर सोनू के होने लगे थे।  चूमने लगा सोनू अपने मम्मी के गदराए चिकने पेट को।  वो पेट को छुमते हुए उनके दोनो जोड़े को पकडे था साइड में लेटा।

  सोनू: उम्म मम्मी आपकी कमर और पेट तो एकदम मखन जैसा है यम्मी यम्मी,

  सोनू::उम्म..पूछ्ह्ह.उम्मम्म.उम्मम्मम्मम्मम्म.उम्मम्मम्म.उम्मम्मम्म.उम्मम्मम्मम्म.उम्मम्मम्म.पूउओओकचह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्,ममम.ममम.मम.मम.मम.मम्म.मम्म.मम्म.द्ध.

  पूनम देवी :: ईश ऐ उन्हुन्नन्नन्नन्न…गुडगुदी होती है ना।  उन सोनूउउउउ बेटाआ ….उन्नन्नन्नन्नन्नन

  सोनू उनके मखन जैसे पेट पर धीरे धीरे चूमते हुए एक बार अपने जीभ से हलके से चाट भी लिया।  तो सोनू की मम्मी जोर से सिसक उठी उसे हलत खराब होने लगी वो अपने दोनो जोड़ी को आपस में रागद रही थी।

  सोनू की मम्मी को ऐसा सोनू का उनके पेट पर चूमने से एक अजीब देखें गुडगुडी के साथ साथ हल्की हल्की उनके अंदर की कामुक भावना भी भदक रही थी।  अपने बेटे के सर को पडके वो उसके बालो में उंग्लियां फ़र्ने लगी।  उसकी मम्मी थोडा सा साइड को अपनी बॉडी ट्विस्ट करते तो उनका क्लीवेज और थोड़ा सा ज्यादा नजर आता पर वो टैब उनके कमर के साइड को चुनने लगता है।  बिलकुल भी मम्मी को ब्रेक नहीं दे रहा था सोनू.आज तक सोनू के पिता जी ने सोनू की मम्मी के पेट को इस तरह से नहीं चाटा था सच में उससे बड़ा मजा आया था जिस सा सबूत उनकी चुत से निकला था  जो की उसकी पैंटी को पूरी तरह से भीगो दिया था।

  सोनू की मम्मी हमेशा साड़ी से नाभि के ऊपर ही बंदती थी।  सोनू ने ऐसे उनके पेट को चोमते हुए धीरे से उनकी साड़ी जो पेट के सेंटर में टक (बंधी हुई) होती उसे ढीले कर डाला और कमर के दोनो पक्षों से धीरे से साड़ी पका के थोड़े नीचे खिस्कादे।  ऐसा करते ही सोनू की मम्मी की गोल गहरी नाभि अब नजर आएगी।  सोनू ने उनकी साड़ी को नाभि के 2 इंच नीचे तक खिस्काया था।

  पूनम देवी :: हैं क्या करता है तो मेरी साड़ी क्यूं उफ नीची सोनू।

  सोनू :: उम्म आप न बहुत होशियार हो मम्मी, सब स्पेशल चीज चुपके राखी हो ना..आपकी नावेल को हमशा चुपाके राखी हो।

 

  सोनू :: उम्म आप न बहुत होशियार हो मम्मी, सब स्पेशल चीज चुपके राखी हो ना..आपकी नावेल को हमशा चुपाके राखी हो।

  पूनम देवी :: आई आई बदमाश .. कृपया उधार मत कुछ भी .. मार खायेगा।

  सोनू :: हे क्यों .. सब स्पेशल चीज मेरे लिए मन है क्या मम्मी।  वैसा ये आपकी नाभि आपके पेट पर उम ऐसे लग रागी जैसे की वो मखन के बीच में जलेबी।  उम्म मुझे जलेबी बहुत पसंद है मम्मी..

  पूनम देवी :: ना..ओय बदमाश… नहि ना उधार मत करना plss.

  सोनू की मम्मी की नाभि 10 रुपये का सिक्का जितनी बड़ी और गोल थी ये तो आप जाते ही होंगे, पर सोनू के डैडी ने कभी उनकी नावेल से नहीं प्रेम किया था।  बस सहलाया था।  कितने बेवकूफ होते हैं डैड्स।  इतनी खूबसूरत पत्नी भी होते हैं पूरा मजा नहीं आने देते और बेटे को बस मां बेटे की रिश्ते की वजह से करने का मौका नहीं मिलता।  पर आज सोनू मां बेटे के रिश्ते की दीवार को तोड़ देना चाहता था।  इसलिये वो अपनी मम्मी को नए अनुभव दे रहा था जो शायद उनको पिताजी से नहीं मिले।

  सोनू ने अब कमर कसके पक्की और सीधी अपनी मम्मी के नावेल पे होते लगा दिए।  ऐसा करते ही सोनू की मम्मी ने अपने बदन को ट्विस्ट कर डाला और तिलमिला उठी।

  पूनम देवी ::: aabbbbbabbbabababa aaaaaaa arghhhhhhhhhhhhhhhh aahhhhh Sonuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu

  सोनू ने अपने होने को अपनी मम्मी की नवल के साथ चिपका हुआ था जैसा कोई भावरा किसी फूल प्रति बैठा उसका रस चुस रहा हो।

  .  उसकी मम्मी तिलमिलके आहें भर रही थी।  थोड़ा सा सोनू की मम्मी तो इधर उधर लेफ्ट राइट भी बॉडी मूव करने की कोशिश में थी।  पर सोनू तो उनकी कमर को दोनो पक्षों से अच्छे से पके हुए था।

  अब सोनू ने अपने होठों के अंदर से अपनी जीभ को बहार निकला।  उसे जान बुझ के अपनी ज़बान को नोकीला (तीक्ष्ण) किया।

  फिर से उसे झुककर अब मम्मी के गहरे नाभि के अंदर जीभ दाल दी।  ऐसा करने से सोनू की मम्मी और भी ज्यादा मचल उठी।

  पूनम देवी :::: heyyyyyyyyy bhagwaaaannnn ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh issssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooooooooo ishhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Sonuuuuuuuuuuuuuu

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  सोनू अपनी नोकीली ज़बान को उसके मम्मी की गोल गहरी नाभी के पूरा और तक डालके फिर नाभि के अंदर की दीवारों को भी छेद रहा था ज़बान से।  उनकी नाभि के अंदर का हिसा तो नाभि के ऊपर उनके से भी ज्यादा मुलायम था।  इसी वजह से सोनू के ऐसा लगाने से उसकी मम्मी पागल हो रही थी।  ज़बान वो एक बार निकला बहार नाभि से तो उसकी मम्मी ने चेन को सांस ली पर अगले ही पल सोनू ने फिर से दाल दी।

  पूनम देवी ::: ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई)

  सोनू ::: ummmmmSlurrrppppp.ummm slurrpppppp ummmmslurrpppppppppppppppppppppppppppppppppp

  सोनू अपनी मम्मी की नाभि को पांच मिनट तक लगातर चाटता रहा अपनी टिंगु से जिस की उसकी मम्मी बहुत ज्यादा पगला रही थी।  उनके कहीं सब्र का बंद न टूट जाए ये डर था उनको।  पास की दुकान में बूढिया को बिलकुल भी अंदाज नहीं था की ये मां बेटे के बीच क्या चल रहा।  उधार शहर में सोनू के पिताजी भी आराम से सो रहे थे।  वो बिलकुल अंजान द की उनकी खूबसूरत पत्नी पूनम देवी और सोनू की मम्मी के साथ सोनू रोमांस कर रहा था।  सोनू के दोस्त लोग को भी नहीं पता था कि सोनू ने मम्मी के साथ रोमांस चल किया था।  ये बात बस एक मां और बेटे के बीच तक ही सीक्रेट थी अभी तक।

  सोनू अचानक नाभी को छोड अब उत्पन्ना में उसकी मम्मी के ब्लाउज के पास आके पहले का हुक निकलाने लगा।

  पूनम देवी :: नहीं plss सोनू उन नहीं मत निकल।  आज बस अब कृपया बीटा।

  सोनू :: एक बार न मम्मी देखने दो ना

  पूनम देवी :: शर्म आती मुझे तू अब कोई छोटा बच्चा नहीं रहा सोनू।

  सोनू :: बचपन में तो मैं शायद यहीं से आपका दूध पीठा था होगा ना..

  पूनम देवी :: उन्ं हा वो तो हर माँ अपने बच्चे को…… आज बस बेटा अभी सोजा ना मेरा प्यारा बेटा ना।

  सोनू :: उन बेरहम मम्मी .. अच्छा आज के लिए बस मतलाब कल याहिन से आगे शुरू करेंगे न मम्मी रोमांस अपना।

  पूनम देवी :: हट..पागल…बदमाश…हाहा.. अब सोजा देख रात बहुत होगी बेटा।

  सोनू :: अच्छा मेरी प्यारी मम्मी..आज के लिए बस करता हूं…पर आप मुझे गले लगाकर सोजाओ ना plss।  मुझे भी ठंडा लगा आपको भी।

  सोनू की मम्मी शर्माते हुए सोनू के चेस्ट पे सर रखली और सोनू ने उन्हे बहों में भरलिया।  सोनू एकदम मम्मी को थपकी देके उनके सर को सहलाके प्यार से सुलाराहा था।  ये सब देख।  सोनू की मम्मी उसके चेस्ट पे सर रखके सोने रही थी “” कितना प्यार करता है मेरा बेटा मुझे।  “”

  सोनू :: गुड नाइट मम्मी (सोनू ने मम्मी के फोरहेड को चूमा))

  पूनम देवी :: शुभ रात्रि बेटा।

  एक दोसरे की बाहों में ऐसे सोनू और उसकी मम्मी को हम ठंडी रात में ऐसा लिपट कर सोना ही उनके लिए कंबल का काम कररा था।  अपनी मम्मी के सार ऐसे सोने का सपना सोनू का तो आज पूरा होरा था।  बस अब उसे अपनी मम्मी को पूरी तरह से अपना बनाना था।  उनके अंग पे अपना कॉपीराइट सोनू का ही होना चाहिए।  ये सोनेते हुए दोनो मां और बेटे मीठी जरूरत में डूब गए एक दूसरे से लिपट कर।

  हमें दुकान में सोनू और उसकी मम्मी एक दूसरे को गले लगाकर सो रहे थे।  उधार शहर में सोनू के पापा भी आराम से सो रहे थे।  सोनू के दोस्त अभिनव की लाइफ में बदला आया था।  अभिनव के दादाजी की तबियत अचानक बड़ी गई।  उनके दादाजी ने अपने वकील को बुलाके अपनी वसीयत के कागजात बनवाए जिसमे उन्होन अपनी आधी जाएदा अभिनव के नाम लिख डाली।  अभिनव पहले से ही अमीर बाप का लड़का था पर अब ऐसी वसीयत इतनी मिलने के बाद वो ज्यादा पैसे वाला बन गया।  उधार सोनू का दोस्त राज बस सबह शाम अनाचार के वीडियो देख देख के पागल होराहा था और वक्त गुजार रहा था।

  सुबाह 7 बजे सोनू की आंख खुली।  उसकी मम्मी उसके चेस्ट पर सर रखे अभी भी गहरी मुझे सो रही थी।  सोनू उनके खूबसूरत चेहरे को वैसे ही 5 मिनट तक भूत रहा, निहारता रहा।

  फिर उसे चुपके से मम्मी को अपने चेस्ट से हटा के आराम से दिया और झोपड़ी के बहार आया।  बारिश तो अब रुक चुकी थी पर हल्की बूंदी होराही थी।  बूढ़ी औरत वो शायद उस गई थी जैसे की गणव के लोग अक्सर सुबह जल्दी उठ जाते हैं।  सोनू बूढिया की झोपड़ी में जाके बात करने लगा।

  सोनू :: नमस्ते अम्माजी..उठगेई आप।  वो क्या ईधर कुछ नाशते का इंतजारम हो सकता है।

  बूढिया :: हा बेटा।  मैं दाल और रोटी बनाऊंगा फ़िकर मत करो।

  सोनू:: आपका बहुत बहुत एहसान है अम्माजी..आज भी सोनचरे हम की रुक जाए याहिन।  फिर कल सड़क भी थोड़ी ठीक रहेगी तो कल शहर को निकलेंगे अम्माजी।  पर आज पूरे दिन का खाने का इंतजारम हो सकता है क्या।

  बूढिया :: हा हा बेटा तुम लोग जब तक चाहो रुक जाओ।  खाने का तो हो सकता इंतजारम पर..

  सोनू ने अब अपनी जेब से 100 रुपये के दस कड़क नोट निकले के बूढिया को दिए।

  सोनू :: ये लिजिये अम्माजी।  आप इतनी मदद कर रही है हमारी।  वो थोड़ा इसमे से खाने का इंतजाम कर दिजिएगा कृपा क्षरके।

  हमें बूढ़ी औरत के लिए 1000 रुपये बहुत बड़ी रकम थी।  उसका एक महिना का खाने का खारचा निकला जाता उससे।  वो खुश होगा बहुत पैसे लेके।

  बूढिया :: ओह्ह्ह बेटा तुम लोग भी तो मेरे इतनी मदद कर रहे हो।  फ़िकर मत करो।  मैं आज पूरे दिन का खाने का इंतजार करूंगी।  गरमा गरम सब्जी रोटी बना रही अभी नशा कर लेना।

  सोनू :: अच्छा अम्माजी।  इधर नहने को कहीं जग है क्या।

  बूढिया :: बेटा अब यहां तो कह शहर जैसा होगा।  वो पीछे थोड़ा सा मैंने झड़ के पत्ते लगाके चारोन तारफ बलती रखके नहीं लाते हुं।  जाओ तुम नहालो बेटा।  कोई भी नहीं आएगा पीछे।

  सोनू :: अच्छा अम्माजी अब तो वैसा ही नहीं पड़ेगा.. मजबूरी है

  सोनू गया और वहन पे पीछे बाल्टी और सबुन राखा था झोपड़ी के पीछे और चारो तरफ बड़े बड़े पत्ते और लकडिय़ां से ढकी थी जगा।  सोनू ने अपने कपड़े उतारे और नहीं लगा।  ठंडे पानी से नहाते हुए वो अपने लुंड को देखा तो हमें अभी एहसास हुआ की रात में मम्मी से रोमांस करने के बावजूद भी उसका लुंड सख्त ही था और लीक नहीं हुआ था।  हकीम की दवाई सच में असरदार थी।

  वो नहीं के बाद फिर से बाहर आया तो वहा एक दूधवाला जराहा था।  सोनू ने हमें दो लीटर दूध लेलिया।  बूढिया ने सोनू के लिए चुने पर दूध गरम करदाला।  सोनू की मम्मी अब भी पास की झोपड़ी में आराम से सोरही थी।  सोनू ने दूध के साथ वो हकीम की दवा खाली।  जबसे वो दावा रहा था तबसे सोनू को अपने और अजीब तकत और उसके लुंड के और घंटों तक भी खड़ा रह पाएगा ऐसा महसूस होराहा था।

  बूढिया :: बीटा हैं।  9 बह रहे हैं।  बुरा करो..तुम्हारे मां नहीं उठी क्या अभी।

  सोनू :: जी जी मैं उठा हूं उनको अभी जाके।  अम्माजी तब तक आप खालो।  मम्मी को उठाऊंगा मैं।  उनके नहीं के बाद हम दो खलेंगे।

  बूढिया :: अच्छा बेटा ठीक है जाओ उठादो अपनी मां को।

  सोनू अब दुकान में गया तो उसकी मम्मी अब भी सो रही थी।  वो उनके पास जाके लाता घन्स में और बहुत प्यार से उनके चेहरे पर सहलाया और फुसफुसाहट किया उनके कान में।

  सोनू :: गुड मॉर्निंग रानी साहिबा .. उम्म उठोगी नहीं 9 बज गए हैं।  नास्तिक कार्लो।  या सोनू ये बोल कर जोड़ी से

  बहार निकल गया

  पूनम देवी ::: उन्न्नन्नन ((धीरे ​​से आंखें खोलते हैं और अंगदाई लेटे हुए)) उफ्फो 9 बज गए क्या.. आंख लग गई थी गेहरी। लेकिन उसका दिल उठने का नहीं कर रहा था वो वही लाती से एक पड़ाव  उठा कर उसे ज़मीन से खुरदती

  रात की बातो को सोचने लगी की कैसे सोनू ने रात को उससे अपनी बहो में भर कर प्यार किया था।  कैसे उसके गालो को चुसा था

  उसके गुलाबी होंतो को अपने होंथो मि कैसे चुसा या कैसे वो उसके प्यार में खो गई थी सच में उससे वो कल की रात किसी सपने से काम नहीं लग रही थी या खुद ही धीरे से कह रहा था जो वो रुक गया था  या वो दो कर्ता तो सयाद मील उससे रोक नहीं पाटी या तबी पूनम देवी की आंखों के सामने सोनू का मस्त लुंड आ गया

  या वो मंजर याद आते ही सोनू की मम्मी के चेहरा शर्म से एकदम लाल हो उठा या अपने चेहरे को अपने हाथों से धरे हुए, हाय का हाथियार तो बहुत बड़ा ही जिस के लिए उसे और कर दिया  .  अब सोनू की मम्मी ये बात दो अच्छे से जान चुकी थी की सोनू का ये खंजर किसी या की फड़े या ना फड़े उसकी जराूर आज नहीं तो कल फड़ेगा

 

  सोनू :: सोनू फिर से जोड़ी के अंदर आया या (प्यार से उनके बाल सहलाते हुए)) कोई बात नहीं ना।  नशा बूढिया ने तैयर करदिया है महारानी पूनम देवी।  बस आप जल्दी से नहालो तो खेलेंगे हम।  मुझे भी भुख लगी है।

  पूनम देवी :: हट उन्न पागल।  कोई महारानी नहीं मैं।  और तूने ही तो डर तक सोने नहीं दिया इसलिय आंख नहीं खुली मेरी।

  सोनू :: हे।  महारानी जी आप महारानी ही हो किसी देश की ना सही लेकिन मेरे दिल की तो महारानी हो रानी साहिबा या अपना एक हाथ मम्मी के कांधे पर रख दसरे हाथ से मम्मी की चिन से उनका मुह घुमा कर अपना का तार, करके

  क्यू प्रिय बोलो हो या नहीं हो मेरे दिल की महारानी

  सोनू की मम्मी सोनू की ये प्यार भरी बात सुन कर कुछ नहीं बोली बस मुस्कान कर अपनी आंखे नीची करके ग्रीन सिग्नल दे दिया

  सोनू की मम्मी;  क्या तुम बी तुम्हें हर वक्त रोमांस हाय सुजाता हाय

  सोनू;  ऐसे खूबसूरत प्रेमिका के साथ तो मैं पूरी जिंदगी रोमांस कर सकता हूं

  पूनम देवी :: हत्त… कुछ भीई… बदमाश।

 

  सोनू की मम्मी अब उठ गई और जोड़ा बंधते हुए अब दुकान से बहार आई और बूढ़ी औरत से मिली।  उसे बता के पीछे नहीं जाने की जग है।  पर वो साड़ी भी बदलना चाहती थी।  अनहोन सोनू को बोला के कार में पैड बैग से दूसरी साड़ी ब्लाउज ले आए।

  पूनम देवी :: सोनू बेटा ज़रा जाकर वो कार में बैग से साड़ी ब्लाउज ले आना कृपया।

  सोनू :: अच्छा मम्मी रुको अभी लता हूं।

  सोनू जाके कार से मम्मी का ब्लाउज और साड़ी ले रहा था। जो बरसात के पानी से भीग चुकी थी साथ में ब्रा भी थी वो भी लेके आ गया और पैंटी भी वो ब्रा और पैंटी अपने हाथ से उन लोगों से रागद कर महसूस कर रहा था

  सोनू को अपनी मम्मी की ब्रा और पैंटी उसे अजीब उत्तेजना दे रही थी।  उनकी डोरी वाला ब्लाउज को भी उसे एक बार सूंघा।  पैंटी ब्रा को भी किस किया और अब कार से उतरके मम्मी के पास जाके दे दिया

  पूनम देवी :: ये ये सब भी ले आया तू.. (सोनू की मम्मी शर्मा रही थी उसके हाथों से ब्रा पैंटी लेटे हुए))

  सोनू :: क्यों मम्मी आपके ही तो है ना ये भी।  (सोनू ने नॉटी स्माइल देते हुए बोला))

  बूदिया;  अरे बेटी तेरी साड़ी तो सारी गीली हो गई ही रम मेरे पास एक जोड़ी लहंगा चोली ही वो देती है उसे लेना जब ये सुख जाए ना तो फिर ये जाने लेना

  पूनम देवी;  जी अम्मा जी

  पूनम देवी ::: गंडे बच्चे …. हट …. आती हूं मैं नाहाके तू अम्माजी को बोल्डे खाना लगान बेटा।

  सोनू :: हे।  अच्छा ममी।  ठीक है।

  सोनू की मम्मी झोपड़ी के पीछे नहाने चली गई।  बूढिया सोनू और उसकी मम्मी के लिए खाना निकला रही थी।  सोनू का लुंड अब दवा खाने के बाद और ज्यादा हरकत में था।  उसका लुंड जैसा कह रहा था की जाके देखो मम्मी को नहीं।  क्या पता कुछ दिख जाए।  सोनू अभी गया भी नहीं था वहां के सोनू की मम्मी दुकान के पीछे जाकर झट से अपना ब्लाउज साड़ी खोल रही थी नहने को।  पर उन्होन अपना पेटीकोट नहीं खोला था।  बस ब्लाउज ब्रा साड़ी निकल कर शायद वो नहीं वाली थी।

  सोनू चुपके से गया पीछे तो वहन पैटों से ढाका हुआ था।  उसे पूरा ठीक से तो नहीं नज़र आरा था।  पर उसकी मम्मी पेटीकोट बंद के ही नहीं रही थी।  ब्लाउज़ ब्रा सोनू को नज़र आ गए थे क्यों की लकड़ी पर टंगे हुए थे।  सोनू को पैटन के बीच से उनकी पूरी नंगी पीठ नजर आराही थी।  वो नीचे बैठेके नहीं रही थी।

  वो अपने गालों ले।  गले पे हाथों पे।  कमर पे.  बूब्स पे भी शायद अच्छे से रागद के नहीं रही थी।  पर सोनू की तरफ उनकी पीठ होने के करन उसे बस उनकी नंगी पीठ और थोड़े से बस साइड उल्लू नजर आरे थे।

  उनके साइड बूब्स देखें ही आइडिया लगारा था की उनके बूब्स कितने बड़े और गोर होंगे।  सोनू का लुंड तो ये देखके 90 डिग्री खड़ा होगा था।

 

  अब सोनू की मम्मी नाहा के नया ब्लाउज़ ब्रा वगैरह देखने रही थी।  उत्थान वो सोनू की तरह पीठ की ब्लाउज ब्रा जब पहनने लगी तो पीछे से नंगी पीठ कमर और हलका सा साइड उल्लू देखके उसका लुंड तो जैसे पंत खोलकर बहार आने को मचल रहा था।  इतना गोरा खोबसूरत बदन है मेरी मम्मी का, बस पूरा मिल जाए तो मुझसे लकी कोई नहीं होगा, यही सोंच रहा था सोनू।

  अब वो पूरी उन्होन पैंटी उठाये पर उसी समय बूढिया ने आवाज लगाई।  “बेटा कहां हो खाना लगा दिया” .. सोनू वहां से जल्दी जल्दी चला आया झोपड़ी में

  सोनू :: अरे अम्माजी वो मैं बस ऐसे ही आस पास के नज़र देख रहा था गणव के।  मम्मी मेरी नहीं रही शायद..विह आते ही खालुंगा.अब बूढिया को क्या पता था की सोनू कोन सा नज़र देख रहा ही सोनू की मम्मी अब नहीं कपड़े बदलके अगली तो देखा खाना तय्यर था.

  पूनम देवी :: वाह हैं.. अम्माजी खाना तय्यर हैं।

  बूढिया :: हा बिटिया .. फ़िकर मत करना ..दोपहर और रात का खाना भी वनावडुंगी .. तुम लोग जब तक चाहे रह सकते हो।

  पूनम देवी :: नहीं हैं अम्माजी वो बस हम लोग आज एक दिन ही रुकेंगे क्यूं की सड़क ठीक नहीं होगी ना।  कल सुबह निकल जाएंगे वहा घर पर भी काम रहता ना।

  सोनू तोबस अपनी मम्मी को निहार रहा था जो है लहंगा चोली मील बिलकुल गोवा की कच्ची काली लग रही थी एक दम कमसिन कली।  सोनू को अपनी या फिर निहारते हैं

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