ममता देवी अध्याय 2
“माँ अब बहुत पराठा खा लिया, अब आप चावल लाओ”। “बेटा पर अभी एक पराठा बचा है ऐसा क्या करेगा, खा तू इसे भी वैसा ही कितना दोगुना हो गया है”। “मां मैं नहीं खा रहा हूं आप ही खा लो इसे, रोकू अच्छा अब मैं आपको अपने हाथो से खिलाऊंगा”। “बेटा एसाकी कोई जरुरत नहीं है”। “चुप करो माँ और आ करो”। ममता थोड़ा मुह बना कर आ कर देता है। “माँ ऐसा नहीं थोड़ा और बड़ा मुह खोलो”। राजू माँ के मुह में पराठे के साथ साथ आपनी उंगलियां भी घुसा देता है और अपनी उंगलीयों को मां के मुह के अंदर रागद कर उनाकी ठुक में लापेट कर बहार निकलाता है। “बेटा ये कैसे बेरहमी से खेला रहा है तू”। राजू आपनी उंगलियों में लगे मां की ठुक को निहारते हुए बोलता है “मां बेरहमी से नहीं मैं तो अंदर तक दाल रहा हूं तक कुछ बहार न गिरे”। “थोड़ा आराम से खिलाड़ी बेटा”। “माँ आप भी ना नखरे बहुत करता हो, चलो अब आ करो”। राजू ऐसे ही ममता को पूरा पराठा खिलाता है, तब ममता राजू की पीठ को सहलाती हुई बोलाती है “चल उठ जा बेटा अब चावल ले कर आती हूं”। “हां मां अभी उठता हूं”।
राजू माँ के जाने के बाद माँ की ठुक से सनी अपनि उंगलियों को निहारते हुए अपनि नाक के पास लता है जिसे एक धिमी सी महक आ रही थी। राजू को ये हलकी गंध भी उत्तेजीत कर देता है और वो बनने हाथ से कच्ची के ऊपर से ही अपने लुंड को दबाता है। उत्तेजीत हो कर राजू एक कर के अपनी सभी उंगलियों को मुझ में भर के अच्छे से चुसता है और दसरे हाथ से अपने जमीन को सह लता है, पर जल्दी ही मां का तुम्हारा स्वागत आना बंद हो गया है। है आपका ठुक”। अब राजू को मां की ठुक का नासा हो गया था और वो कैसे भी ममता की ठुक को चाटने के लिए तड़प रहा था। ऐसी तड़ापति हुई दासा में राजू को मां आती हुई दिखी देती है। “चल बेटा अब जल्दी से चावल खतम कराटे है, फिर तुझे आराम भी तो करना है”। “हां मां सही कह रही है मुझे चाहिए भी आ रही है”। ममता के बैठाने के बाद राजू पहले की ही तरह मां से चिपक कर उनकी भगवान में बैठा है और फिर मां के गाल पर पप्पी दे कर बोलता है “पुच्छ, चलो फिर खिलाओ मां”। “ले बेटा आ कर” ममता जब कड़ी चावल हाथ में लेतक राजू की तरफ बड़ी है तो राजू पहले की ही तरह कड़ी चावल के साथ मां की उंगलीयों को भी चुस लेता है। ममता ऐसे ही राजू को कुछ कवर खिलाती है फिर राजू बोलाता है “मां आप भी खो साथ साथ तो जल्दी खतम होगा”। राजू हाथ में कड़ी चावल ले कर मां की तरफ बड़ा है “आ करो मां”। “आ” राजू फिर से मां के मुह में और तक आपनी घुसा कर मां की जिंदगी और उनके उठो से रागदते हुए बहार निकलता है। ऐसे ही मां बेटे मिल कर पुरा कड़ी चावल खतम कर देते हैं। राजू अन्तिम कवर खा कर माँ के हाथ को पक्का कर बोलता है “लाओ माँ मैं इसे साफ कर देता हूँ”। ममता के हाथ में कफी कड़ी चावल लगा हुआ था। राजू पहले ममता की सबी उंगलियों को एक कर के कास के चुस कर साफ कर देता है छप्प छप्पप्प छप्प छप्प छप्प”। “हो गया बेटा साफ अब चलते हैं”। “रुको बेटा मेरे हाथ को भी तो साफ कर दो”। “अरे बेटा, ला अच्छा” ममता भी राजू के हाथ को जीब निकल कर चाट कर अच्छे से साफ कर देती है पर राजू की उंगलीयों को मुह में नहीं लेटी है “छप्प छप्प आकाअप्प पच्छ पुछह”। “चल साफ हो गया अब तो उठा बेटा”। “हां चलो मां”। राजू उठा कर खड़ा हो जाता है और मां की तरफ मुड़ता है जिससे राजू का खड़ा लुंड ममता के मुह के सामने आ जाता है। ममता सोचती है की इसा चुन्नू फिर से खड़ा है, क्या ये हमसा ही खड़ा रहता है, कहीं राजू को कोई बिमारी तो नहीं। राजू वाही मां के सामने ही आपनी उंगलियों को मुह में लेकर चुसाने चाटने लगता है जिसे देख कर ममता बोलाती है “चल बेटा बहुत चुस लिया अब तू पाही से धो ले बाथरूम में जकार”। “अच्छा माँ” ये बोल कर राजू आपनी उंगलियों को चुसते हुए बाथरूम की तरफ चल देता है। ममता को नहीं पता था की राजू कड़ी नहीं बाल्की उसी के ठुक के स्वाद का मजा ले रहा था। भाग-10
राजू हाथ धो कर बिस्तर के एक तार आ कर जाने देता है। बिस्तर पर लेटे ठनका उसे साड़ी पर हवी होने लगती है और उसकी पालकी बंद हो जाती है। तबी राजू को मां के पायलों और चुडिय़ों की आज नजर आती है प्रीत होती है और वो अपनी आंखे खोल देता है “मां आ गई आप और समय कैसा लगा दिया”। “बेटा मुह भी फ़ोन लग गई थी, तूने जो मेरे गालो को चुम चुम कर चिप छिपा कर दिया था”। “हे वह चलो अच्छा आ जाओ अब सोटे है मां, मुझे बहुत जरूरी है आ रही है”। “आ रही हुं बेटा, पहले ये बता तुझे कोई चादर चाहिए”। “नहीं माँ, वैसा भी बहुत गरमी है, चादर वदर रहा दो। आप बस लाइट बैंड कर दो और दरवाजा भी लगा दो बहुत रोज़ानी आ रही है बहार से”। “ठीक है बेटा, कर रही हूं अभी”। ममता जल्दी से दो दरवाजे लगा कर लाइट बैंड कर देता है और फिर राजू के बगल में आ कर जाति है। “माँ मेरा सर सहला कुत्ता जैसा बचपन में सहलाती थी”। “हां बेटा, चल अब सो जा आराम से” ममता एक हाथ से राजू का सर सहलाती है और दसरे हाथ से राजू के साइन और पेट को सहलाने लगा है। मां का प्यार भरा स्पर्श पा कर राजू को अपार सुकुन मिला है और राजू जरूरत के आगोश में आ जाता है।
ममता की जब आंखे खुली तो राजू अभी भी सू रहा था और राजू के सिने पर रखा हुआ ममता के हाथ राजू की धिमी सांसों के साथ ऊपर नीचा हो रहा था। ममता दीवाले पर लगी घड़ी को देखती है तो रोशनी कम होने के लिए समय का पता नहीं चल पाया। ममता को लगता है सयाद शाम हो गई है क्योंकि खिड़की से रोसानी बहुत कम आ रही थी तो सयाद राजू को अब उठना चाहिए। ममता घिसक कर राजू के एकदम करीब हो जाति है और उसका बदन राजू के बदन से एकदम चिपक जाता है, जिसे करना ममता के दूध राजू के साइन में बुरी तरह से दब गए। “आह्ह्ह मेरा बच्चा, उठ जा मेरा बेटा” ममता धिमी सी आवाज में बोलाती जो राजू की जरूरत को तोडाने के लिए कफी नहीं थी। ममता आगे झुक कर राजू के पास उसे गल पर एक पप्पी देता है, जिसे ममता के दोध और कास के राजू के सिने में दब गए “पुउच्छ मेरा बच्चा उठ जा बेटा उम्म्म्ह मम्माह”। ममता लगार राजू के साइन को सहला रही थी और राजू के कधोर बदन का एहसास अपने शुद्ध बदन पर पाकर बहुत उत्तेजीत हो रही थी। ममता राजू के साइन को सहला रहे हाथ को राजू के चेहरे पर ले जा कर उसे गैलन को सहलाने लगती है और फिर राजू के चेहरे को अपनी तरफ मोड़ कर निहारने लगता है। मैं ममता को राजू पर बहुत प्यार आ रहा था, वो फिर आगे झुक कर सिद्ध राजू के ऊठो पर एक लंबी पप्पी देता है “पक्की, उम्म्ह्ह मम्माआह” राजू की पप्पी ले समय ममता उत्तसुकाता में आकार एक तांग राजू के ऊपर रख देती है जिससे ममता का लगभाग आधा बदन राजू के ऊपर चढ़ जाता है। ममता एक बार फिर आगे झुक कर राजू की गरम से महसूस कराटे हुए उसे ऊथो पर काई पप्पियां ले ले गया है “पुउच्छ् पुच्छ्ह उम्म पुच्छ्ह पुच्छ्ह पुच्छ्ह्ह्ह”। ममता की जॉर्डर पप्पियों से राजू की जरूरत खुल गई। “क्या कर रही हो माँ” राजू मा का ख़ूबसूरत चेहरा अपने पाने पास पकार मुस्कुराते हुए बोलाता है। “तुझे उठा रही हूं बेटा”। “माँ पप्पियों से उठा रही हो कुआ”। बेटे का ये सावल सुन कर ममता सरमा जाती है और पुचती है “तुझे अच्छा नहीं लगा क्या बेटा”। “माँ आप की मीठी पप्पियाँ भला किसको अच्छी नहीं लगेगी”। “तू बाते बनाना बहुत तेज हो गया है, चल अब उठ जा बहुत तो लिया ट्यून”। ममता उठने लगती है पर राजू अपना एक हत्था ममता की कमर पर ले जा कर ममता को उठने से रोक देता है “रुको मां, उठने से पहले एक और पप्पी दे दो ना”। राजू के es anurodh ko sun car mamata ek nahi balki kai pappiyan राजू के othon par deti hai nant apane muh khol car raju ke ko apayane kech daba ko jor daar pappi deti hai “puuuchhh puuuuhhhh humaahhhh puuuuuhhhh hahhhhhhaaaa paaaaaahhhhh hhhhh hahhhhhh “. एटानी काम पप्पियों के बाद दोनो की सासेन कफी तेज हो चुकी और दोनो का सिना एक दसरे से चिपके हुई तेजी से फूल और पिचक रहा था। ममता किसी तरह आपनी सों को कबू में ला कर राजू के हाथ को अपने कमर से हटा कर उठ जाती है और बोलाती है “उठ जा बेटा अब तो तुझे मिल गई ना तेरी पप्पियां”।
ममता उठ कर पहले लाइट जलाती है और फिर दो दरवाजे को खोलती है। ममता की नज़र जब जब राजू पर जाति है तो वो पति है की राजू मुस्कुराते हुए यूज ही घुर रहा है “क्या देख रहा है बेटा”। “कुछ नहीं माँ बस आपको देख रहा हूँ, आप बहुत सुंदर लग रही हो”। ममता मुस्कान देता है और पास में रख सिंगारदान के से मुझे खुद को देख कर बोलता है “अरे मजाक उड़ रहा है ना तू सोने से मेरे बाल बिखर गए हैं”। ममता के सिरफ बाल ही नहीं बाल्की उसकी साड़ी भी बिकनी हुई है और ममता का एक दूध ब्लाउज से कफी बहार आ रहा था और निप्पल के घर का भूरा रंग साफ दिख रहा था। राजू को मां का ये बिकरा रूप बहुत कामुक लग रहा था। राजू को महसूस होता है की ममता उसके सामने बिना संकोच के हम पर भरोसा कर रही थी, जिससे दो का दिल और भी करीब आ रहा था। “सच बोल रहा हूं मां आप बहुत सुंदर लग रही हो, से साड़ी भी आप पर बहुत अच्छी लग रही है और ये ब्लाउज तो गजब का है, एकदम सहरी डिजाइन है इसका, सच में।” ममता खुश हो जाती है की उसका सहर जैसे कपडे पहनने की सोच सही निकली “बेटा मैंने तुझे अच्छा लगेगा यही सोच कर आज के लिए ही ऐसा सिल्वाया था”। “सच में माँ अपने मुझे दिखने के लिए ये ब्लाउज़ सिलवाया था”। ममता अपने बालो और साड़ी को सवारते हुए बोलाती है “और नहीं तो क्या, मुझे पता था की तुझे सहर जैसे कपडे पसंद आएंगे, तो मैंने दरजी से जा कर बोल दिया की एकदम टीवी सीरियल की और जैसा वैसा ही वहां है। बेटा एकदम सहर जैसा सिला है ना” ममता ने अपना पल्लू एक तराफ घिसका कर एक तराफ कर के अपने दूध कासे हुए ब्लाउज में राजू को देखते हुए पुचा। “हां मां लगभाग सहर जैसा ही है, बहुत अच्छा लग रहा आप पर”। “चल तुझे पसंद आ गया तो मेरी मेहंदी और पैसे बरबाद नहीं गए”। “मां मुझसे तो बहुत खुशी हो रही है के आने मुझे खुश करने के लिए ये ब्लाउज सिल्वेया, आप सच में मुझसे बहुत प्यार करता हूं”। “बेटा तुझे नहीं प्यार करुंगी तो किस करूंगी, बस एक तू ही तो है जो मेरा ख्याल करता है”। राजू को भी पता है की उसे पिता मां से सही से बात भी नहीं कराटे “हां मां मैं जनता हूं और मैं जिंदगी भर आपका ख्याल रखूंगा आप चिंता मत करो”। “मुझे पता है बेटा, मैं तेरे नंगे में कभी कोई चिंता नहीं करता, कल अब ये बताता आज रात को क्या होगा” ममता अब आपके आप को सेस के समय पूरी तरह से सवार कर राजू के पास आ है। “मां वो सब छोड़ो आप मेरे लिए एतनी मेहंदी से तयार हुई हो तो मैं आपकी कुछ फोटो खिचना चाहता हूं”। “फोटो? कैमरा है तेरे पास”। “मां मेरे मोबाइल का कैमरा बहुत अच्छा है इसी से खिचूंगा और मैं चाहता हूं कि मेरे मोबाइल में आपकी कुछ सुंदर सुंदर फोटो होन, अभी तो एक भी नहीं है”। “चल अच्छा ले ले फोटो पर क्या अभी खिचेगा”। राजू बिस्तर की बगल वाली टेबल पर रखा अपना मोबाइल उठा कर खड़ा हो जाता है “हां मां अभी सही समय है और आप तयार भी हो”। “ठीक है अब तो मैं क्या करू”। “मां ट्यूब लाइट इस दीवार पर है तो आप दसरी तरह खादी हो जाओ अच्छी फोटो आएगी उधर से”। ममता जहान राजू बोलाता वही जा कर खादी हो कर दोनो हाथो को एक बांध सीधा कर के बोलता है “ठीक है अब खिच ले फोटो”। राजू को ममता का मासूमियत से भरा पोज बड़ा ही प्यारा लगा है और वो ऐसी ही ममता की कुछ फोटो खिच लेता है और फिर उन्हे मोबाइल पर जूम कर के देखने लगता है “मां आपको बोला था न कमर पे साड़ी को और अब आपकी कमर अच्छी नहीं आ रही है”। “अरे तो अब क्या करे बेटा”। “क्या करे क्या माँ आप साड़ी को खोल कर फिर से बढ़ो”। “क्या अभी, अभी तो खाना भी बनाना है बेटा समय कहा है”। “मां अभी तो सिर्फ 5 ही तो बजे हैं खाना बनाने के लिए अभी बहुत समय है, चलो आप जल्दी करो”।
“तू भी ना बहुत जिद्दी है अपनी बात मनवा कर ही मनाएगा” ममता कीचड़ कर राजू की तरफ पीठ कर के साड़ी उतरते हुए बोलाती है। ममता ने साड़ी को उतर कर बिस्तर पर फेक दिया और फिर नादा खोल कर पेटीकोट को नीचे घिसकाने लगी। ममता ने जब पेटीकोट का नाडा खोला तो राजू को ममता की गोरी नंगी कमर और झांघे साफ साफ दिखलाई देती है। राजू के लिए ये नजरा बहुत ही कामुक था, जिस देख कर उसे लुंड फिर से बुरी तरह अकड़ गया। ममता के बाल बढ़े हुए और राजू को पारदर्शी ब्लाउज से ममता की गोरी नंगी पीठ बिलकुल साफ नजर आ रही थी और फिर ममता के पेटीकोट के नीचे घिसकाने से उसकी पीठ छुटडो तक नंगी हो गई थी। ये सब देख कर राजू बहुत उत्साहित हो गया और एक हाथ से अपने अकड़ रहे लुंड को सहलाकर आराम देने की कोसिस करने लगा। ममता जब नाडा बढ़ कर राजू की तरफ मुड़ी तो राजू ने झट से अपना हाथ लुंड के ऊपर से हटा लिया पर राजू को आपने सामने जो दृश्य दिखई दीया इस्तेमाल देखने के बाद राजू के लुंड ने वही ममता के दो मार दी। ममता राजू के सामने बस एक छोटे से ब्लाउज और पट्टीकोट में खादी थी और उसका पेटीकोट किसी तरह उसे कुल्हे की हदियों पर टीका था। राजू को ममता का गोरा नंगा पेट और कमर के साथ साथ उसकी गहरी नभी भी साफ नजर आ रही थी। ममता के हल्के से निकले हुए पेट की चार्बी के बीच उसकी गहरी नभी गजब धा रही थी। ममता के बड़े बड़े गोरे दूध बिना ब्रा के उसके ब्लाउज में मचल रहे थे और ममता के ब्लाउज से बहार आ रहे हैं धुधिया दूधों के बीच की लेकर को देख कर राजू के मुह में पानी आ रहा था। ममता की भी नज़र सीधा राजू के कच्ची के और झटके मरते हुए लुंड पर जाति है और वो सोचती है की राजू का चुन्नू तो फिर से कड़ा हो गया, आदमी का चुन्नू तो बीवी से प्यार कराटे हुए ही खड़ा पर हाय खड़ा हो जाता है, कहीं राजू को वकेई में कोई बिमारी तो नहीं है। ममता को राजू की चिंता होने लगती है और उससे अब रहा नहीं जाता और वो राजू से पुच ही लेती है “बेटा उम्म तेरा वो उम्म चुन्नू एताना कथोर क्यूं हो गया है”। राजू को मां के एस सावल से सदामा सा लगता है और वो समझ ही नहीं पता की मां आखिर जाना क्या चाहता है “क्या मतलब मां”। ममता राजू के लुंड की तरह इसरा कराटे हुए बोलाती है “देख तेरा ये कितना काठोर हो गया है”। ममता को अपने लुंड के नंगे में पुचता देख राजू का लुंड एक और झटका मरता है “देख बेटा कैसे झटका मार रहा है”। राजू सोचा है की मां को ये भी नहीं पता की उसका लुंड क्यों कठौर हो रहा है अब वो मां को क्या बताया। “माँ पहले तो चुन्नू छोटे बच्चों का होता है, मैं बड़ा हो गया और बड़े लड़को के इसे लुंड बोला है”। “ठीक है बेटा तू बहुत बड़ा हो गया है, अब ये तो बता दे तेरा लुंड और कहर क्यों हो रहा है”। “माँ आपको पता नहीं क्या सभी लड़को का होता है”। “वो तो पता है बेटा पर तेरा तो हर समय ही कहर ही रहता है, जब से तू कच्ची पहानी है तब से देख रही हूं लगातर तेरी कच्ची में तंबू बना के खड़ा है”। “हा हा हा हा हा, माँ सयाद ये जवान लड़को का ज़्यादातर खड़ा ही रहता है, मेरे हॉस्टल में बाकी लड़को को भी यही समय था”। “ओह चल फिर थिक है पर दर्द तो नहीं होता तेरे लुंड में दिन भर अकाड़ा हुआ रहता है”। राजू को एक अच्छा मौका नज़र आता है “माँ होता तो है दर्द पर ज्यादा तर काम ही दर्द रहता है बस कभी कभी दर्द ज्यादा बुरा जाता है”। “तो फिर क्या करता है जब दर्द बुरा जाता है”। राजू सोचता है अब क्या बताता है “बस थोड़ी मलिश कर देता हूं लुंड की आराम मिल जाता है”। “तो बेटा कर ले मलिश और अकाड़ा हुआ है दर्द हो रहा होगा”। “नहीं माँ अभी दर्द ज्यादा नहीं है, जब नहीं गया था तो कर थी मलिश”। “चल बेटा फिर थी है, बस मैंने ना तो मेरे पिता जी या फिर तेरे पिताजी से को लुंड से इस समय के नंगे मुझे सुना था”। “मां उनकी उमर ज्यादा हो गई थी और फिर मैंने सुना है कि शादी के बाद ये समय कम हो जाती है”। “वो कैसे बीटा”। “अरे माँ वो तो मुझे भी नहीं पता बस सुना है मैंने”। ममता सोची है सयाद जब आदमी अपने लुंड को बचे हुए करने के लिए आप औरतो की बच्चे दानी के छेद में दलते है तो लुंड को आराम मिल जाएगा और ऐसा करने से धीरे धीरे कम होगा। “तो फिर बेटा तेरी भी जल्द ही शादी करनी पड़ेगी तबी तेरे लुंड को आराम मिलेगा, वह वही है”। “हाहा हा मां अभी कहा उमरा हुई है मेरी शादी की, अभी तो मैं अपना सारा समय आपके साथ बिटाना चाहता हूं”। ममता सरमते हुए बोलाती है “चल अच्छा बहुत बताता है, अब ये तो बताता नीचे थिक है”। “माँ छोटा सा और नीचे करना पड़ेगा”। “बेटा और नीचे करुंगी तो पेटीकोट पुरा नीचे सरक जाएगा”। “माँ ऐसे कैसे सरक जाएगा, आपा पिछवाड़ा बहुत बड़ा है। टीका रहेगा हम पर, आप घबराओ मत”। राजू के मुह से अपने बड़े बड़े छुटों की बात सुन कर ममता सरमा जाती है और बोलाती है “चल अच्छा कोसिस कर के देखता हूं”। ममता पेटीकोट के नादे को खोल कर पेटीकोट को नीची घिसकाती है पर पेटीकोट कुछ ज्यादा ही नीचे सरक जाता है और ममता का लघुभाग पूरी झंठ राजू की आंखों के सामने आ जाति है “आउछ छ”। ममता के झांठे बहुत छोटी छोटी थी, लगता है कुछ दिन पहले ही काची से कटी गई थी। राजू के लिए मां के झांथो की ये पहली झलक बहुत ही कामुक थी और इस दृश्य को देख कर अपने लुंड में मिला हुआ तनव को काम करने के लिए राजू लुंड को मुट्ठी में भर कर वही मां है। ममता पेटीकोट को सबल कर नादे को फिर से बढ़ती हुई राजू की हलत देख कर चिंता हो जाती है और पुचती है “बेटा दर्द बुरा गया क्या तेरे लुंड में”। “हां मां ओह्ह दर्द थोड़ा बुरा गया है”। “तो फिर तू पहले अपने लुंड की मलिश कर ले फिर फोटो खिच लेना”। ममता ने अब पेटीकोट को कुल्हे की हदियों से भी नीचे बंद लिया है और राजू को ममता के पेटीकोट से बहार कमर के बीच में छोटे छोटे मुलायम बाल साफ नजर आ रहे हैं।
राजू ममता के कामुक रूप को देख कर व्यकुल हो जाता है और अपने लुंड को ममता के सामने दबते हुए बोलता है “मां मलिश बाद में कर लुंगा मम्माह पहला आप साड़ी पहानो फोटो अहहत है”। राजू ममता के साड़ी पहनने का इंतजार भी नहीं करता और ममता की कुछ फोटो खिच लेता है। “बेटा साड़ी तो पहनने दे ट्यून तो पहले ही फोटो खिचना सुरु कर दिया”। “मां मुझे आपकी साड़ी पहनते हुए भी फोटो चाहिए, आप साड़ी तो समय मत लगाओ”। “तू भी ना, चल पहन रही हूं”। ममता छोटे कदमो से बिस्तर के पास साड़ी उठने जाति है क्योंकि इसका इस्तेमाल दार लग रहा था की पेटीकोट कहीं फिसल ना जाए। राजू ने अब मां की साड़ी पहनते हुए वीडियो बनाना चालू कर दिया था। राजू ममता के पास आकार उसे एक अंगो को करीब से कैमरे में कैद करने लगता है। ममता के दो दुधों के बीच की दार, उसका नंगा पेट और कमर और जब ममता साड़ी के पल्लो को पेटीकोट में घुसने के लिए पेटीकोट को थोड़ा ऊपर उठाती है तो उसे छोटी छोटी झटके भी कैमरे में कैद हो। राजू उत्तेजीत हो कर लुंड को जोर से दबता है और उसकी आह निकल जाती है “ऊह ममाआह्ह्ह उम्म्ह्ह्ह”। “बेटा दर्द ज्यादा तो नहीं है ना”। राजू वीडियो बनते हुए अब ममता के पिच आ जाता है, तो राजू को ममता की साड़ी के बहार आती हुई ममता के दो छुटडो के बीच की दार दिखलाई देती है। “उम्माअह्ह्ह म्माह्ह्ह”। “बेटा ले पहन ली साड़ी अब जल्दी से फोटो खिच ले मुझे लगता है तेरा दर्द भी बड़ा जा रहा है”। “रुको माँ आपकी साड़ी पिचे से पेटीकोट में थिक से घुसी नहीं है, रुको माई थिक करता हूं”। राजू आपनी एक हाथ की उंगलीयों को ममता के चौदे और कोमल चुतदों और साड़ी के बीच में अच्छे से घुसा कर ममता के चुतदों को दबने लगा है और दसरे हाथ से अभी भी वीडियो बना रहा है। राजू के दोनो हाथ व्यास थे तो अपने उत्तेजीत लुंड को संत करने के लिए राजू लुंड को ममता के गोल चुदाद में हल्के से दबा देता है। “उम्म मम्माह”। “बेटा तेरा लुंड मेरे चुतदों में लग रहा है”। “माफ करना मां गलता से लग गया”। “कोई बात नहीं बेटा मैं तो ऐसी बता रही थी की कहीं तेरे लुंड का दर्द और ना खराब जाए”। “अरे नहीं माँ आपके कोमल पिचवाडे के एहसास से तो मेरे लुंड को आराम मिल रहा है”। “ओह अगर ऐसा है तो डबा ले थोड़ी और डर”। “क्या सच में माँ” राजू का तो जैसा समाना ही सच होने वाला था। “हां बेटा अगर आराम मिल रहा है तो डबा ले थोड़ी देर और”। “ठिक है माँ” राजू वही खड़ा कमर को आगे पिचे कर के ममता के चुतड में दबने लगता है “उम्म मम्माह आह्ह्ह्ह माँ बहुत आराम मिल रहा है माँ अम्माह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जब्म. ममता को राजू के कहने की आजीब सी लग रही थी “अब रहा दे बेटा, फोटो खिच ले फिर मालिस कर लेना”। “ठीक है माँ उम्माः”।
राजू फिर से ममता के सामने आ जाता है “मां पहले अपने दोनो हाथो को कमर पे रखो”। ममता राजू के कहे अनुसार अपने हाथ को कमर पर रख देती है और फिर राजू ममता के पहले दूर से पूरा शरीर और फिर कुछ पास से फोटो ले लेता है “मम्माह आह्ह”। राजू लगार एक हाथ से अपने लुंड को सहले जा रहा है “मम्माह मां अब साड़ी के पल्लू के एक हाथ में लेकर थोड़ा फेलो और दशहरा हाथ कमर पर ही रहा दो। हां मां ऐसे ही”। ममता का पल्लू अब उसके हाथ पर टीका है और राजू पहले दूर से फिर पास आकार ममता के ब्लाउज में चुप दुधो की गजब कामोक फोटो देता है। “मम्माह्ह् आह्ह्ह मां अब दोनो हाथो को आगदयी लेटे हुए ऊपर ले जाओ और फिर दोनो हाथो को आपस में मिला लो मम्म्ह हां ऐसा ही मां बहुत आह्ह्ह्ह अच्छा कर रही हो मांआह”। ममता जब आपके हाथो को ऊपर ले जाती है तो उसका पल्लू नीच गिर जाता है और उसे एक और काम आंग राजू के सामने आ जाता है और वो ममता के बगल के बाल। “मम्ममहह माँ पल्लू को नीच ही रहाणे दो आप ऐसी मुद्रा में रहो अभी”। राजू फिर मां के पास जा कर ममता के बगल के बालो का क्लोज अप लेटा है, अब राजू का लुंड बुरी तरह फड़ रहा था। “उउउम्म्ह्ह माआः अब बगल की तराफ चेहरा कर के खादी हो जाओ और एक हाथ दीवाल पर रखो और मेरी तराफ वाला हाथ ऊपर उठे ही गर दन पर रख लो। हां मां आह एक दम सही”। राजू राजू को अब ममता के एक तरफ के बगल के बाल साफ नजर आ रहे थे। राजू पास जा कर अच्छे से ममता के बगलों के पास लेटा है “आआह्ह्ह्ह माहः अब मेरी तराफ चेहरा घुमाओ। हां मां ऐसे ही मम्माह”। राजू मां की कुछ और फोटो लेता है और फिर बोलाता है “मम्माआह्ह आह्ह्ह माहाह अब पुरा दीवार की तरफ घुम जाओ आह मम्मा अब मेरी तरफ देखो मां आह्ह और हाथ को ऐसे ही कमर पर।” राजू माँ की नंगा पीठ और कमर और साड़ी से बहार आ रहे हैं माँ के चुतडो की काई फोटो ले देता है। राजू अब हद से ज्यादा पैदा होता हो चुका था, वो ममता के चुतडो के पास आ कर एक चुत में लुंड को हल्के से दबते हुए बोलता है “माह्ह्ह आह्ह्ह बहुत दर्द है अहम्”। “बेटा दर्द है तो दबा ले अपने लुंड को मेरे चुतदों में, बेटा आह्ह्ह”। ममता भी अपने चुटडो पर राजू के लुंड का डबव पकार उत्तेजीत होने लग गई थी। ममता के मुह से कटद शब्द राजू को गजब कमुक लगता है और राजू कच्ची को बगल में कर के अपने नंगे लुंड को मां के चुतद पर दबने लगता है “माआह आह्ह अहह मम्माह पाह। ममता के आगे होने पर राजू और ममता दोनो अपने दोनो हाथ पर टीका लेटे हैं और अपने लुंड को सीधे ममता के चुतदों में जोर से दबाता है। ममता के कोमल चुटाडन का लंड पीई सीधाहा एहसास राजू को केओ पागल किये जा रही था “उमुम्म्ह्ह्ह्ह उउमुम्म्ह आहह बहाट आहह अश्हह अमधाह अमाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्षाहह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उउमुधहह”। कुछ ही झटको के बाद राजू का वीर्य बहार निकलाने को आ गया था पर राजू मां की नई साड़ी खराब नहीं करना चाहता था तो वो बगल में हो कर अपने लुंड को हाथ में ले कर उसाका नीसना ते देवर की साथ मुत्त छोडने लगता है। “आआआआह्ह्ह आआआह्ह्ह मम्मम्मा आह्ह्ह्ह मम्माआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् औरद्ध और वद्ध’द्ध। राजू के मुठ की धार रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और ममता घबरे हुए राजू के तड़पते लुंड के चौदे लाल हो गए तोपे से मुथ को निकले हुए देख रही थी। “बैठ जा बेटा आराम से”। राजू माँ की आवाज़ सुन कर बैठा ही नहीं बाल्की बीज फ़र्श पर जाने देता है “मम्म्माआह्ह्ह आआआह्ह्ह माँ बहुत ज्यादा मजा आया माँ बिलकुल सारे दर्द खतम हो गया” राजू मुस्कुराते हुआ बोलता है। राजू के मुर्झाते लुंड और उसे एत्तमिनान से खेले चेरे को देख कर ममता भी खुश हो जाती है और राजू के बगल में बैठा कर उसके सामने को सहलाने लगा है। मिल गया ना, तेरा लुंड तो अब संत लग रहा है”। “हां मां, आराम मिल गया, बहुत मजा आया आज”। “चल अभी तू लेटा रहा, तेरा लुंड गंडा हो गया है। मैं अभी एक कपाड़ा ला कर इस्तेमाल साफ कर देता हूं”। “ठीक है मां आप जाओ मैं लेता हूं”। ममता किचेन से एक मग पानी और एक छोटा तोलिये जैसा कपाड़ा ले कर आती है और फिर कपडे को गिला कर के राजू के लुंड को कपडे से हल्के से सहला कर साफ करने लगा है “बेटा कोई दर्द तो नहीं हो सकता”। “नहीं माँ आप चाहो तो आप और जोर से साफ कर सकता है”। “क्या ठीक है बेटा ऐसे ही साफ हो गया”। ममता लुंड को साफ कर के उपयोग एक हाथ से उठ कर राजू के टैटू को भी साफ कर देता है “बेटा अब उठा के बिस्तर पर बैठा जा मैं फ़र्श और दीवार भी साफ कर देता हूं, बहुत पानी चोड़ा है बेटा”। “माँ पानी नहीं एसाको मुथ बोले है”। “हां चल जो भी बोले है अब तू उठ जा”। “हां मां उठ रहा हूं” राजू उठा कर बिस्तर पर बैठा और फ़र्श पर बैठी ममता को निहारने लगा। ममता फ़ार्स पर घुटने के बाल हो कर सफाई कर रही थी और साड़ी नीचे करने की वजह से ममता के चुतड़ साड़ी से बहार होने को आ रहे थे। ममता के साड़ी से बहार आते हुए छूदों और चुटों के बीच की दार को देख कर राजू के लुंड में फिर से खून का बहाव तेज होने लगा था, पर अभी झड़े हुए लुंड में फिर से खून का खेल तेज होने से मेरे सामने हलका दर्द उठ जाता है। ममता सफाई के साथ साथ राजू को अपने चुटडो के दर्शन देते हुए राजू से पुचती है “बेटा ये तो बता आज रात को क्या होगा”। “पटा नहीं माँ आपा जो मन करे बना दो, फिर पिता जी से पुछ लेते हैं”। “अरे तेरे पिता जी घर पर नहीं खाते और वो सयाद कल दोपहर को ही आएंगे। मैं सोच रही थी कि पनीर मटर बना दूं”। “सही सोच रही हो माँ, पनीर ही बना दो”। “तो बेटा मटर तो है घर में तू पनीर ले आएगा बाजार से”। “हां मां क्यों नहीं, आपको पता है बाइक की फिर कहां है”। “वाही बेटा बाइक जिस छज्जे के नीचे खादी है वही किसी की खूटी पर तगी होगी”।
राजू भी अब आपके लुंड को आराम देना चाहता था, तो राजू भी ममता के कामुक बदन से दूर जाने से दुखी नहीं था। “ठिक है मां तो मैं जाता हूं अब शाम भी हो गई है”। “जा बेटा पर कुछ पहन तो ले, फिर मां की कच्ची पहन कर ही शुद्ध गाव में घूमेगा, हा हा”। “वह वह, क्या बात कर रही है माँ कुछ पहन कर ही जाउंगा”। राजू ने एक लंबी शॉर्ट्स और एक टी शर्ट, और बाइक से बाजार की ओर चल दिया और ममता कीचेन में जा कर खाना बनाने की तयारी करने लगी। जब तक राजू बाजार से वापस आता है ममता प्यार टमाटर कट के मसाला भी तयार कर देता है और अभी वो आते को गुत्थी है। राजू जब बाजार से आता है और ममता को आटा गुथते देखता है तो उसकी नजर में ममता के लाते और झूले दूध पर जाति है “लो मां ले आया पनीर और साथ में सलाद के लिए भी ले लिए”। “अच्छा किया बेटा अब जा बहार से आया है हाथ मुह धो ले बाथरूम में बहार से आया धूल धक्कड़ से”। “ठीक है माँ हाथ मुह धो कर आता हूँ”। राजू बेडरूम में जकार पहले कच्ची को छोड कर बाकी सारे कपड़े उतर देता है और फिर बाथरूम में जा कर हाथ मुह धोने लगता है। राजू जब बाथरूम से बहार आया तो डोरियों पर लातेके हुए कपड़ो को देखता है। एन कपड़ो में उसकी और ममता की कच्ची भी थी जो उसे खुद धूली थी। सारे कपडे सुख चुके थे तो राजू उन्हे एकथा कर के रूम में लिया और बिस्तर पर रख दिया और फिर ममता के पास किचेन में गया जो पनीर के छोटे टुकड़े को जमीन पर ताल रही थी। राजू पिचे से आकार ममता को गले लगा लेता है और अपने दोनो हाथो से ममता के पालतू को जकड कर उने पालतू की कोमल तवाचा को सहलाने लगा है और साथ ही पिछे से अपने बदन को मां बदन से पूरी कर रहा है बेटा, हाथ मुह धो लिया ट्यून?”। राजू पिचे से मां के गल पर पप्पी लेते हुए बोलाता है “पुच्छ, उउम्म्ह्ह हां मां हाथ मुह धो लिया और बहार जो कपडे लाते द उन्हे भी कमर में बिस्तर पर रख दिया”। ममता चेहरे को घुमा कर राजू के गल पर पप्पी देते हुए बोलाती है “पुच्छ, अरे मेरा प्यारा बेटा, कितना ख्याल रखता है तू मां का”। “मां प्यार जो करता हूं आप से और अब ये बता और कोई काम है मेरे लिए”। “नहीं बेटा तू अब जा कर आराम कर”। राजू माँ के कमर पर अपनी पकाड़ को और कास के ममता की बगीचा पर एक छोटी से पप्पी दे कर बोलता है “पुच्छ, पर माँ मैं किचेन में ही आपके साथ समय बिटाना चाहता हूँ, कुछ तो काम होगा मेरे लिए”। “सच में बेटा कोई काम नहीं है, तू जा कर कुछ डर टीवी देख मैं अभी जल्दी से सब्जी छोंक कर आती हूं”। “ठीक है मां फिर मैं जा रहा हूं, पुच्छ”। राजू मां को एक और पप्पी दे कर लिविंग रूम में आ जाता है और टीवी ऑन कर के चैनल बदला लेता है। चींटी में किसी कॉमेडी फिल्म को देखने लगता है। ममता किचेन के काम निओता कर लिविंग रूम में आती है “बेटा क्या देख कर अकेले अकेले मुस्कान रहा है”। राजू सोफ़े पर तांगे फेल कर देता हुआ था “मां आ गई आप बस एक कॉमेडी फिल्म देख रहा हूं तो हसगा ही”। राजू मां को देख कर उनके लिए जग खाली करने के लिए उठ कर बैठाने लगा है “अरे लेटा रह बेटा माई एस सोफे पर बैठा जाऊंगी”। “नहीं माँ आप मेरे पास ही बैठाओ”। ममता भी राजू की बात मान कर उसे पास बैठा गई “ले अच्छा बैठा तेरे पास अब तू मेरी भगवान में सर रख कर ले जा”। “ये सही सोचा माँ आपने”। राजू भी खुशी आकार ममता की भगवान में सर रख कर ले गया। राजू ममता की झांघो पर साड़ी के ऊपर ही अपना चेहरा हलके से रागदते हुए बोलाटा “मां आज एतेने दिनो बाद आपकी भगवान में सर रख कर बहुत अच्छा लग रहा है”। “क्यूं बेटा ऐसा क्या है मेरी भगवान में”। “माँ आपकी भगवान की कोमलता का एहसास और प्यारा है और जब भी आपके पास आता है आप एक मीठी सी सुगंध आती है”। तबी राजू का पास ही टेबल पर पड़ा फोन बजने लगता है। “नमस्ते”। “जी छोटे ठाकुर माई बड्डू बोल रहा हूं”। “ओह हां बोलो क्या बात है”। “जी वो खेतो को पानी देना है तो आप वो ट्यूबवेल चालू कर दिजिये”। “अच्छा थिक है करता हूं अभी” बोल कर राजू फोन काट देता है। “मां वो बद्दू ट्यूबवेल चालू करने के लिए बोल रहा है”। “हां बेटा जा कर दे पहले स्विच को नीचे गिरा देना और फिर लाल बटन दबा देना”। “ठीक है मां फिर ट्यूबवेल चालू कर के आता हूं”।
राजू वापस आ कर फिर से मां की भगवान में सर रख कर बैठा जाता है पर एस बार वो टीवी को नहीं बाल्की ऊपर मां के मस्कुराते सुंदर चेहरे को देख रहा था। एटाने पास से मां के दो दूध राजू को दो बड़े पहाड़ जैसे लग रहे थे और ममता का चेहरा उन दो पहाड़ों के बीच से निकले हुए सूरज जैसा लग रहा था। राजू का मन तो कर रहा था की वही पक्का कर मसाला दे मां के दो दूध के गुब्बारों को पर वो ममता को डरना या नारज करना नहीं चाहता था कि ऐसा मन कर लेता था किसी तरह। “मां वो बद्दू ने आपके फोन पर कॉल क्यों नहीं किया”। “हां वो मेरा फोन बहुत पुराना हो गया है घंटे की आवाज बहुत कम हो गई है उसकी पता ही नहीं लगता तो अक्सर गेट खत खाता कर ही बोलता है, पर आज भी पर कॉल कर दिया जरूर तेरे पिता जी ने बोला होगा की तुझे कॉल कर दे”। “मां तो आप नया फोन क्यों नहीं ले लेटी”। “क्या बेटा मुझे कोई जरुरत नहीं है नए फोन की”। “क्यूं नहीं जारूरत है मां आज कल के फोन में कितनी धेर साड़ी चीजे कर सकते हैं और फिर जैसे मैंने अपने फोन में अपनी औरत धर साड़ी फोटो खिच ली वैसी ही आप फोन में भी तो मेरी फोटो होनी चाहिए”। “ठिक है बेटा तू चाह वैसा ही करुंगी, दिला दे मुझे नया फोन”। “ये मेरी प्यारी मां मेरी हर बात मनाती है, पुच्छ” राजू खुश हो कर ममता के पेट पर कभी के पास पप्पी ले लेता है। “वह वह, बेटा मेरे पेट में सरत मत कर मुझे गुडगुडी हो रही है”। “हा हा अब बता दिया तो और भी करुंगा, पुच्छ पुच्छ पुउउच्छ” राजू लगातर ममता के पेट पर काई धर साड़ी पप्पन दे देता है। “हा हा हा बेटा मन हा हा भी जा हा हा”। राजू अपने ऊथों पर मां के पालतू जानवर की कोमल चारबी के अहसास से उत्तेजीत होने लग गया था, अब वो अपना मुंह खोल के ममता के पेट को अपने जेब से सहलाने लगा है पा “पुच्छ पाच पाच पाच”। ममता भी अपने बेटे की गिली जीब का स्पर्श अपने कोमल पेट की तवाचा पर पा कर उत्तेजीत होने लगता है “बेटा उम्म्ह्ह तू बहुत साराति मम्म्ह हो गया है मम्म्ह्ह उउउउम्ममह अब मान”। राजू तो उत्तेजना में बह चुका था रुकने की बजाय वो तो ममता के पालतू की कोमल चार्बी को मुह में भर भर के चुसाने लगा है “छप्प चुउउप्प्प्प चुउउप्प चुउउउप चुउउप्पा चुपुप्प छुप्पुप।” ममता की सांसे बहुत तेज हो चुकी थी, वो भी कामुकता में आ कर अपने आस पास की दुनिया को भूलने लग गई थी और राजू के सर को सहलाते हुए अपने पेट में और जोर से दबा रही थी और साथ ही संत करने के लिए उपयोग करें अपने दोनो झंघो के बीच दबने की कोसिस कर रही थी “”उम्ह्ह उम्म्म्म्ह्ह मम्माआह बेटाआह थोड़ा आराम आआह से कर मम्म्माआह अहह बेटाआह: मम्म्माह। यह जीब ममता की गहरी नाभी में घुसा दी और मां की गहारी कोमल नाभी का चुस के लिए स्वद लेने लगा “चुप चुउउप्प लाछ लाछ छप्प लच्छ”। थी, जिसासे राजू का ठुक मां को कभी को भराने के बाद नीचे बह कर ममता की साड़ी को भीगो रहा था और राजू अपने एक हाथ से ममता के पेट की चारबी को मूर्ति में भर के हल्के से निक ममता की नाभी के और अर बहार ऐसे कर रहा था मानो ममता की नाभी को अपने जीभ से चूड़ रहा हो “छप्प छप्प छप्प चुउप्प चुउप्प चुप चुप”। राजू ने ममता की नाभि से खिलवाड़ कर के ममता की छुट को झडाने के करीब पहुंचा दिया था “उम्म्म्ह्ह्ह मम्माआः मम्ह्ह्ह उम्मम्ह्ह उउउम्ममह मम्म्ह्ह्ह्ह बेटाआह्ह्ह”। पर जब ममता झडाने के करीब पहंचती है तो वो डर जाति है और राजू को खुद से दूर कर देती है “उउउम्माआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह बेटा रुक जा आह ममहह बेटा पनीर”। “अरी माँ” ममता उठ कर खादी हो गई और अपने पेट पर लिपटे हुए राजू के धर सारे ठुक को साड़ी से पोछते हुए किचेन की तरफ चल दी और राजू वाही सोफे पर बैठा हुआ अपने गालों पर लगा से . कुछ डर बाद ममता की आवाज आई “बेटा मैं अब रोटी बना रही हूं तू एन खिरो को और एक प्यार को भी सलाद के लिए काट दे”। “ठीक है मां अभी आ रहा हूं।” राजू जब किचेन में पहुंचता है तो ममता रोटी बना रही थी और राजू की तरफ अपनी साड़ी से बहार आ रही गंद को राजू की तरफ कर के खादी थी। ममता के रति बेलने के करण उसे शुद्ध बदन के साथ उसके चुतड़ भी हिल रहे थे जिन्हे देख कर राजू के मुह में पानी आ रहा था जिसे राजू पी कर बोलता है “घूट, मां आ गया बताओ चिल्लानी कहा है”। “देख तेरे पिचे ही ऊपर”। “ओह मिल गई”। “जा अब धो कर रूम में ले जा, वही पर कात लेना”। “ठिक है मां” राजू बिना मां से बहास करे रूम में आ गया, वो सोफ़े पर की गई अपनी हरकत से थोड़ा दार गया था और मां को और परसान नहीं करना चाहता था। कुछ डर बाद राजू का फोन फिर से बजाता है “छोटे ठाकुर, जी माई डब्बू बोल रहा हूं”। “हां बोलो”। “जी वो ट्यूबवेल बंद कर दिजियेगा”। “ठिक है वो तो मैं बंद कर दूंगा, ये बताओ पिता जी कहां है”। “जी ठाकुर साहब तो अभी व्यास है पर उन्होनें बोला है की कल दोपहर को घर जाएंगे”। “ठीक है अच्छा रखो फिर फोन”। राजू अब घर के पिचे जा कर पहले ट्यूबवेल को बंद करता है और फिर वेल से जुड़े हुए छोटे 8 बाय 4 मीटर के पास जा कर उसे आ रहा ताजे पानी की ठंडा और खुशबु का मजा लेने लगता है। एस गरम मौसम में ठंडा ताजा पिनी मानो राजू को सम्मोहित कर के बुला रहा था। राजू आपनी कच्ची को उतर कर पास ही बनी छोटी सी दीवार पर रख देता है और खुद पानी में कुछ जाता है। “आआआआ माजा आ गया” राजू मस्त हो कर थांडे पानी के बड़े लाता है और हमें छोटे से तालाब में आगे पिचे तेराता है। एधर ममता रोटी बना कर जब बहार आती है तो पानी के छपने की जोरों से आवाज आती है जिसे सुन कर ममता सीधे घर के पिच आ जाती है। ममता जब तालाब के पास पूँछती है तो राजू तालाब में तेराता हुआ देखाई देता है और साथ ही दीवार पर तगी राजू की कच्ची भी ममता की नजरों में आती है “बेटा क्या कर रहा है चल रोटी बन गई खाना खा ले”। “मां, बस ठंडे पानी का आनंद ले रहा हूं। बहुत मजा आ रहा है मां आप भी आ जाओ” राजू मां के साथ नहीं जाने के नंगे मुझे सोच कर उत्सुक हो जाता है। “मुझे नहीं नहना बेटा, चल अब तू भी बहार आ जा रोटियां थंडी हो रही है”। “परसां मत हो माँ आ रहा हूँ” राजू पुरा नंगा ही माँ के सामने आ कर खड़ा हो जाता है जिसे देख कर ममता के बदन में एक लहर सी दुध जाति है। ममता को राजू का गीला पानी टपकता हुआ नंगा बदन बहुत ही कामुक लगता है। राजू के एस रूप को देख कर ममता का राजू को और भी प्यार और दुलार करने का मन करने लगता है “यही खड़ा रह बेटा मैं तोलिया ले कर आती हूं”। ममता अपने कामरे में आती है और सुखे हुए कपड़ो के धर से एक तोलिया निकलती है जिसे राजू ने ला कर याह रखा था। ममता टोलिये के साथ राजू के पास आकार सबसे पहले राजू के सर और उसके बालो को पोचती है। अब ममता राजू के बालो को सुखा कर उसे साइन को पोछाने लगता है और पाताल से तोलिये से राजू के सिने की कथोरता को अच्छे से महसूस कर के खूब मजे लेटी है “बेटा तेरा बदन तो तगड़ा हो गया है”। “हां मां मेरे फुटबॉल के कोच सर ने बड़ी मेहंदी है ऐसे लिए”। ममता अब और नीचे आ कर बैठ गई और राजू के कमर और फिर उसी झांटो को भी अच्छे से सुखाया जिससे राजू का लता हुआ लुंड का बार ममता के हाथ से तकरया और उसे ध्यान आकारसीत किया। ममता अब तोलिये के साथ राजू के लुंड को अपनी हाथी में भर कर अच्छे से सुखाती है जिससे राजू के लुंड में खून का बहाव खराब जाता है। ममता को जब राजू का लुंड अपने हाथी में कठोर होता हुआ महसूस होता है तो वो तुरंत दार से लुंड को छोड कर राजू के टंगों को पोछाने लगता है। ममता अब राजू को समाने से पुरा पोचने के बाद खादी हो कर राजू से बोलाती है “बेटा अब घूम जा पीछे से भी पोच दन”। राजू बिना कुछ बोले घुम जाता है और ममता उपयोग पोछने लगती है। है राजू की पीठ को पोछते हुई ममता की नजर राजू के नन्हे और सुडोल छुटडो पर ही टिकी हुई थी, राजू के पीठ को महसूस करने के नंगे में ही सोच कर ममता के मुंह में पानी जैसा . ममता अब झुक कर बैठ जाती है और तोलिये से राजू के दोनो छुटों को एक साथ दबोच लाती है। ममता पानी पोछाने के नाम पर राजू के दो छुटडो को अच्छे से डबा कर महसूस करता है। ममता की हरकातो से अब तक राजू का लुंड पूरी तरह से आकार के झटके मार रहा था “आह्ह्ह मां जरा आराम से पोचो”। ममता राजू के चुतड को जरा जोर से दबा देती है तो राजू की आवाज निकल जाती है जिसे सुन कर ममता का ध्यान राजू के चुटडो से हटा है और वो खादी हो जाती है “दर्द हुआ क्या बेटा”। राजू मुस्कुराते हुए बोलाता है “नहीं माँ बस हलका सा दर्द हुआ”। ममता राजू की मुस्कान देख कर निश्चिंत हो जाती है और राजू के नांगे सुडोल चुतड़ पर हल्की सी चपत मारती हुई बोलाती है “चट्ट, चल अब बेटा ये तोलिया लापेट ले और अंदर जा, खाना खाते है”। राजू के नांगे चुतड़ को अपनी हाथी पर महसूस कर के ममता के बदन में फिर से एक लहर दौड़ जाती है। राजू जब और जाते हुए आपनी कच्छी उठा है तो ममता उपयोग रोक देती है “इस कच्ची को याही रहा द, इस गंदी दीवाल से गंदी हो गई होगी मैं इसे बाथरूम में दाल दूंगा, तू और जा”।
ममता जब खाना लेकर आई तो राजू पहले से डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर तोलिया लाते हुए बैठा हुआ था। ममता को देख कर राजू मुस्कुराते हुए बोलाता है “माँ एक ही थाली लेई हो, तो फिर हम लोग एक साथ ही कहेंगे”। “तू ऐसे पुच रहा है, तो क्या तुझे मेरे साथ नहीं खाना”। “नहीं माँ, ऐसा नहीं है, मुझे लगा आप मेरी सारातो से ठक गई हो तो मुझे फिर से नहीं खिलागी”। “दत्त, मैं क्यूं थकुंगी तेरी सारातो को तेरे बचपन से झेल रही हूं, चल अब आजा मेरी गोद में” ममता आपनी झंगो के तारफ इसरा करती हुई बोलाती है। “आ रहा हूं मां” राजू खुशी खुशी आ कर मां की गोद में बैठा और ममता ने अपने पास घीसाका कर अपने बदन से चिपका लिया। ममता राजू के गाल पर एक पप्पी देता है और राजू की झंगों को सहलते हुए बोलता है “पुच्छ, बेटा आराम से बैठा ना”। राजू भी मां के कांधे पर हाथ रख कर उसे गल पर पप्पी देते हुए बोलता है “पुउच्छ, हां मां माई तो आराम से बैठा हूं आप को कोई परसानी तो नहीं है ना मां”। “नहीं बेटा तू मेरी चिंता मत कर ले एसे खा” ममता पनीर को रोटी के टुकड़े से लापेट कर राजू के मुह में घुसा देती है और राजू भी बड़े प्यार से ममता के हाथ से खाना सुरु कर देता है खाना बनाना है”। “अच्छा तो तू आज एक रोटी ज्यादा खाना, तुझे खिलाला कर मोटा करना है अब मुझे”। “मां आप ऐसे ही प्यार से खिलाड़ी तो मैं दास रोटी भी खा जाऊंगा, पुछ” राजू ममता के गल पर एक पप्पी देते हुए बोलता है। “हा हा बस बाटे बनावा लो तेरे से चल अब खा जल्दी जल्दी”। राजू एक पूरी रोटी खतम करने के बाद बोलता है “मां अब आप भी खाओ एक रोटी पहले” और फिर ममता को रोटी का एक टुकड़ा खिलाता है। ऐसे ही दोनो मां बेटे जल्दी जल्दी रोटियां खतम करने लगते हैं, पर अचानक से राजू के हाथ से मटर का एक दाना ममता के दूध के बीच गिर जाता है। “माफ करना माँ”। “क्या कोई बात नहीं बेटा, अच्छा हुआ साड़ी या ब्लाउज पर नहीं गिरा नहीं तो तेल का दाग पद जाता, तू इस मटर को उठा के खा जा”। राजू मां की इस बात से अचंभीत हो गया क्योंकी मटर को दाना ममता के ब्लाउज में कासे दो दूध के बीच फासा था और हमें देने को उठने के मतलब था की राजू अब पहली बार ममता के दूध को बीजे से अपने में। राजू जब ममता के दूध की तरफ हाथ बड़ा रहा था तो उसके हाथ काप रहे थे और साथ ही उसमें में पानी भी आ रहा था अपनी मां के गोरे मोटे दूध को देख कर। राजू उसी कपटे हाथ से ममता के दूध की कोमलता को अपनी उंगलियों से महानोस कराटे हुए मटर के दान को उठा है और फिर खा जाता है। ममता भी आपने दूध पर राजू की उंगलियों का एहसास पा कर उत्तेजीत हो रही थी “बेटा वो जो तेल लग गया है मेरे ऊपर भी साफ कर दे नहीं तो ब्लाउज पर ना लग जाए”। “अच्छा माँ” राजू कुछ सोचता है फिर आपनी दो उन लोगों को मुह में ले कर उन पर अच्छे से ठुक लगा लेता है और फिर ठुक से गीली उंगलियों को ममता के दूध पर रागद कर मटर के साथ भी साफ दूर को साथ ही साथ आपनी हाथी को ममता के दूध पर अच्छे से डबा कर उनकी कोमलता को महसूस भी करने लगता है। राजू की एन हरकतो से उसका लुंड बुरी तरह अकड़ के तोलिये के अंदर तंबू बना रहा था। ममता भी अपने दूध दबावा कर उत्तेजीत हो रही थी और इसी उत्तेजना में राजू के गल पर पप्पी दे कर बोलता है “पुच्छ, बेटा जल्दी कर”। जब राजू को लगता है की उसकी उंगलियां सुख रही है तो वो इस बार अपने चारो उन पर अच्छा सारा ठक लगा लेता है और फिर उन ममता के दूध पर अच्छे से रगड़ कर अच्छे से जाने देता है . राजू का लुंड ममता के दूध के कोमल एहसास से फड फडने लग गया था। राजू उत्तेजना में आ कर अपानियों को ममता के दो दुधो के बीच में घुसा कर उसे एक दूध को अच्छे से दबोच लेता है और डबा दबा कर मजे लेने लगता है। “बस साफ हो गया बेटा अब छोड दे” ममता फिर से दर कर राजू के उत्पन्ना में बड़ा दाल देता है। राजू ममता की आवाज सुन कर बे मन से अपना हाथ पीछे खिच लेता है और ममता के गल पर पप्पी दे कर बोलता है “पुच्छ, ठीक है मां चलो अब खाना खतम कराटे है”। माँ बेटे दोनो जल्दी ही सारी रोटियां खतम कर देते हैं, दोनो ने आज एक दसरे के प्यार में आ कर अपना भुख से ज्यादा ही खा लिया था। “माँ आज तो पुरा पेट भर कर खाया है मैंने”। “हां बेटा लगता है आज मैंने भी जरूरत से ज्यादा लिया, बेटा जरा वो गिलास का पानी देना गला सुख गया है”। राजू पानी से भरा गिलस उठा कर ममता को देने के बजय सीधा ममता के मुह के पास ले जा कर बोलता है “आ करो मां जल्दी से”। ममता भी मस्कुरेट हुई आ कर मुह खोल देती है और राजू तूरंत गिलस को तेरा कर मां को पानी पिलाने लगा है और जब ममता की प्यास भी जाती है तो ममता राजू बेटा को रकती है “उउउमममः ऊउमममः नीच भी गिर गया”। राजू को जबरजस्ती रोकाने के चक्कर में कुछ पानी ममता की साड़ी और दूध पर भी गिर गया था। “माफ करना मां मुझे लगा बहुत प्यार लगा है तो पूरा ग्लास ही पियोगी” राजू ये बोल कर ममता के दूध पर गिरे पानी को पोछाने के बहाने एक बार फिर ममता के दूध को दबने लगा है। “चल कोई बात नहीं अब रहा दे”। “ठीक है माँ पर अब आप भी तो मुझे पानी पिलाओ”। ममता जब गिलस राजू के मुह के पास ले जाती है तो राजू उपयोग रोक देता है “मां ऐसे नहीं”। “तो फिर कैसे बेटा”। “माँ पहले आप गिलास का पानी अपने में मैं भर लो फिर पानी को अपने मुह से मेरे मुह में डालो”। “क्या? दही ऐसा कौन पिलाता है पानी”। “क्या माँ बहुत से लोग पिलाते है ऐसे, जो लोग आप में बहुत प्यार कराटे है ऐसे ही पानी पिलाते है”। “ना ना मैंने तो ऐसा कभी नहीं देखा, तू सीधे गिलास से ही पाई ले बेटा”। “नहीं माँ मेरा आपके मुह से ही पाइन का बहुत मन हा, माँ मन जाओ ना”। “नहीं मैं नहीं पिलाती, ये तारीका तो बहुत ही अजीब है”। “माँ मान जाओ, तुम्हें मेरी कसम”। ममता राजू की कसम की बात सुन कर परसान हो जाती है और राजू की पीठ पर हलके से मरते हुए बोलता है “धप्प, कसम क्यों दे रहा है इस बात के लिए”। राजू माँ को दुखी देख कर अपने बहुत लताका कर बोलता है “ठीक है माँ रहा दो अगर आपका मन नहीं है तो”। ममता का दिल राजू का दुखी चेहरा देख कर पिघल जाता है और वो मुस्कान कर बोलता है “चल अच्छा नोटंकी मत कर पिलाती हूं तुझे जैसा तू चाहता है”। “यी माँ आप बहुत प्यारी हो, पुउउच्छ” राजू ममता के गल पर पप्पी देते हुए बोलता है। ममता अब मस्कुराते हुए अपने मुह में पानी भर कर दो गैलन को फुला लेटी है, पर जब राजू को पिलाने जाति है तो मुश्किल आती है क्योंकि राजू का मुह तो ममता के मुह से कफी ऊपर था क्यों की जहां पर बड़ा है। ये देख कर ममता पानी खुदी पी गई और फिर बोली “घूट घुट, बेटा तेरा मुह कफी ऊपर है ऐसे पिलाना तो कफी मुश्किल है”। राजू कुछ डर सोच कर खड़ा हो जाता है “मां रुको एक तारीख है”। राजू आपनी टैंगो को ममता के दोनो तारफ लताका कर ममता की तरफ मुंह कर के बैठा और उसे अपने पीठ पीछे झुक कर तबल पर टीका ली। अब राजू ममता की भगवान में उसकी तराफ मुह कर के पीछे झुका हुआ बैठा था, जिसासे राजू का मुह ममता से थोड़ा नीचे आ गया पर उसका अकादता लुंड ममता के पेट की नजर चारबी के कफी करीब आ गया था। “मां अब सही है ना अब पिलाओ”। “हां पिलाती हूं” ममता फिर से मुझ में पानी भर कर आगे झुक कर राजू के मुह के करीब आती है और राजू अपना मुह अच्छे से खोल लेता है। ममता आपने ऊथ राजू के ऊठो के बहुत से करीब ला कर मुह को खोलती है और थोड़ा पानी राजू के मुह में गिराने देती है पर कुछ पानी बहार भी गिर जाता है। ममता जब राजू के बिलकुल करीब आई तो राजू को ममता की गरम सास अपने चेहरे पर महसूस हुई और ममता की ससून की सुगंध राजू के नाक में घुस गई “घूट मां थोड़ा और पीछे आ गया”। ममता की नज़र जब नीच गई दीखा की कफी पानी राजू के तोलिये पर गिर गया था पर साथ ही तोलिए में टेंट बना हुआ राजू का अकाड़ा हुआ लुंड भी दिखा रहा है जो अब ममता के पेट को हल्के से चू रहा था। ममता के मुह में अब भी पानी था तो वो कुछ बोल नहीं पति है और फिर से झुक कर राजू के पास जाति है और इस बार अपने ऊथों को राजू के उठो से बिलकिल चिपका लेति और अपने में भारी पानी घोट के मुह में दाल देती है। राजू के मुह में इस बार ममता के मुह से पानी के साथ ममता की ठुक और ममता के मुह की गरम हवा भी आती है जिसाका स्वद राजू को कफी उत्तेजीत कर देता है और राजू उत्पन्ना में आ पेट कर डाबा देता है “घूट घुट घुत पुच्छ्ह मम्माआह आह्ह्ह्ह और पिलाओ मां जल्दी से” ममता जब उठा रही थी तो राजू ममता के ऊथो पर हल्के से पप्पी दे देता है। “आह आह्ह्ह्ह्न पिला रही हूं बेटा” ममता तेज सास लेटे हुई बोली और फिर अपने मुह में पानी भर के राजू की तरफ झुकी और एक ही बार में राजू को सारा पानी पिला देती है बार फिर राजू ममता के ऊठो को अपने ऊथो के बीच में हलके से दबा कर पप्पियां ले लेता है। “आह्ह्ह ह्ह्ह्ह मम्माआह अभी और पिलाओं बेटा”। राजू ममता की ठण्डियों पर लगे पानी को पोछते हुई ममता के ऊँटों पर अपनी उंगलियां फिरता है और बोला “हां मां अभी तो बहुत प्यार है मेरे अंदर”। गिलास में पानी खतम हो गया था, तो ममता सीधे जुग से पानी अपने मुह में भर के राजू की तरफ झुकती है। हां की हिम्मत और उत्तजाना अब बहुत खराब गई थी, इस बार वो ममता के सर को दोनो हाथो से पका कर पानी पाइन के बाद ममता के ऊठो को चुस चुस कर बहुत अच्छा लेटा है मम्माआह्ह्ह”।
हुह फिर जल्दी से मुह में पानी भर कर राजू को पिलाने के लिए झुकती है और इस बार राजू पानी पिते समय आपनी जीभ ममता के मुह में घुसा कर ममता की जेब को अपने जहा से सहलता अह्म घुत पुच्छ मम्माआह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जब तक किया जा सकता है. इस बार जब ममता राजू से दूर हुई तो दोनो के ऊथो के बीच ठुक की एक लेकर बन गई थी जो टूट जाती है। ममता भी कफी जोश में आ गई थी, अपने पेट में राजू का पत्थर जैसा लुंड चुभाता हुआ महसूस हो रहा था। गुट फिर से जलदी से मुह में पानी भर कर राजू की तरफ झुकी और एस बार फिर राजू ने अपनि जीभ ममता के मुह में गुसा कर ममता के मुह के अंदर की कोमलता को अपने घर पर महसूस मांजे के लिए Puuuchh aaahhh mmmaaaahh pachhh ahhhh पुउच पुचह mmmahhh पुच आहह “। ममता जब थोड़ा पीछे हटी तो राजू इस बार ममता के गीली ठड्डी पर लगे पानी को चाटने चुसाने लगा “पाछ छप्प पुछ पुच्छ छप्प पाछ”। “बेटा रुक जा पानी तो ढेर पहले”। ममता एस बार जब राजू को पानी पिलाने लगी तो फिर से राजू ने ममता के मुह के अंदर ग़ुस्ल कर ख़ूब मजे लिए “घूट घुट घुत घुत पुउच्छ आह्ह्ह मम्माहह पाह्ह्ह पुचह पुहः इस बार पानी खतम होने के बाद भी दोनो एक दसरे के ऊठो को चुस रहे थे और साथ ही जीभ से दोनो एक दुसरे की जेब को सहला रहे थे। “मम्माह्ह्ह चुप्प्प पुउच्ह्ह पुउउच्छ्ह आह्ह्ह्ह मम्माह्ह पुउउच्छ चुउप्प”। तीन चार मिनट तक दो ऐसे ही एक दसरे से चिपक कर जाने देते हैं और फिर सास लेने के लिए अलग हुए। “आआआह्ह्ह आह्ह्ह्ह बेटा अब तो तेरी प्यास भुज गई ना”। “आआआह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः”. “चल अब उठ जा मैं बारात रख कर आऊं”। राजू ममता के भगवान से उठ गया और ममता बरतन समत कर किचेन में चली गई।
राजू ममता के जाने के बाद एक दुखियारे इंसान की तरह खड़ा था और अपने खड़े लुंड को सहला रहा था। राजू टीवी के सामने जा कर बैठा और फिर से चैनल बदलाने लगा। राजू एक मूवी चैनल पर रुक गया जिसमे बिकनी में तीन हेरोइन पानी से बहार आ रही थी। “ये क्या देख रहा है बेटा” ममता कामरे में आ गई और राजू को पता भी नहीं चला। “मां ये कॉमेडी फिल्म सुरु हो रही है, चलो देखते हैं”। ममता राजू के पास सोफ़े पर बैठे हुए बोली “तेरा मन है तो देख लें, मुझे तो आज कल की फिल्म समझ नहीं आती बिलकुल”। “अरे माँ आप ज़िंदगी भर गावं में ही रही हो और फिल्म में ज़्यादातर सहर का रहा सहाते हैं, तो आप को कैसे समझ आएगी”। “हां सही कह रहा है बेटा, पर मैं कर भी क्या सकाती थी मेरी जिंदगी में चार दिवारी में बीट गाही और मुझे बहार घुमना अंजान लोगन से बटियाना भी अच्छा नहीं लगता”। “मां आप अब चिंता मत करो, मैं हूं न मैं आप को सब पढ़ा दूंगा, मां आप मुझ पर छोड दो मैं आप को सहर की हेरोइन जैसा बना दूंगा”। “अरे नहीं बेटा मुझे नहीं बनाना हेरोइन जैसा, अब एन्हे देख कैसे ये तीनो सिरफ कच्ची पहन कर सबके समान घूम रही है, मैं तो ऐसा कभी ना कर पाऊंगी”। “मां ये कच्ची थोड़े ही है, ये बिकनी है। सहार में औरते जब समुद्र, तालाब वगेरह में तायरने जाति है तो यही वहांती है”। “फिर भी बेटा सबके समान, एन्हे सैम नहीं आती”। “हाहा माँ सरम क्यूं आएगी, देखो कितना सुंदर बदन है तीनो का, जो भी देखेंगे ख़ुश ही होगा। सरमाते तो वही लोग है जो आपके आप को सुंदर नहीं समजते”। “हां सुंदर तो है तीनो, तुझे मजा आ रहा है तो देख कर”। “अरे माँ मेरे पास तो आप हो, आप उन तीनो से कहीं ज्यादा सुंदर हो”। ममता मुसकुराते हुई बोली “अच्छा तो तू टीवी को क्यों घुर रहा है मेरी तरफ क्यों नहीं देख रहा”। “हा हा मां आगर आप भी ऐसी तरह बिकनी पाहन कर आओ तो मैं सिरफ आपकी तरफ ही देखूंगा”। “तो तू माँ के कपडे उतरवाना चाहता है”। “अरे माँ सच बोल रहा हूँ, देखो एन्का बदन कितना सूखा हुआ है, सहर की औरते मोटा होने के डर से ठीक से खाती नहीं है, बाल्की आपका बदन कितना भरा हुआ और मुलायम है। मुझे सच करो”। “चल तू तो बस मेरी तारीफ ही करेगा”। “क्यूं मां, ऐसा क्यों सोचती है”। “क्या तू मुझसे प्यार करता है ना तो तू मेरी तारीफ तो करेगा ही”। “वो तो है, पर सच में मां आप से बहुत से ज्यादा सुंदर हो। अगर आप बिकनी पाहन कर निकलोगी तो सब पागल हो जाएंगे और आप ऐसे फिल्म में आ गई तो वो फिल्म रातो रात सुपरहिट हो जाएगी”। “बेटा क्या सच में तुझे ऐसा लगता है”। “क्या माँ आप को मेरी बात पर भरोसा नहीं है क्या”। ममता राजू के गाल पर एक पप्पी दे कर बोलाती है “पुच्छ, बेटा भरोसा है तुझ पर मुझे लगता है तू मेरा प्यारा बेटा है ना इस्ली मेरे प्यार में आकर तुझे ऐसा लग रहा है”। “ठीक है माँ अगर आप को मेरी बात का भरोसा नहीं है तो मैं आप को एक सुपर स्टार बना के ही दिखूंगा”। “क्या बेटा मुझे फिल्मो की हीरोइन नहीं बनाना”। “मां मैं भी फिल्मो की बात नहीं कर रहा हूं, आज कर कोई भी मोबाइल से इंटरनेट पर फोटो दाल कर मशूर हो सकता है और आप तो एतनी सुंदरो हो देखना आप बहुत जल्दी हीरोइनों से भी ज्यादा मशरूम हो जाएगा”। “भट्ट ऐसा नहीं होगा कभी”। राजू अपना मोबाइल निकल कर ममता को इंस्टाग्राम दिखता है “मां आपको मेरी बात का भरोसा नहीं है तो ये देखो ये साड़ी मॉडल आज कल हीरोइनों से भी ज्यादा मशहूर है और पैसा भी खूब कामती है बस अपने फोटो बना और छोटे”। राजू ममता को काई मोडल्स की तस्वीरें और लघु वीडियो दिखलाती है। “बेटा तुझे लगता है मैं ये सब कर पाउंगी, देख इसे एसाकी वो जो तूने बताया था है बिकनी ऐसी बिकिनी से टीवी वाली लड़कियों से भी ज्यादा छोटी है, एसाका तो सब कुछ ही दिख रहा है। “. “मां आप तो साड़ी में ही खूब मसूर हो जाओगी, आप बस मेरे पर छोड दो, आज से मेरा सपना है की मैं आप को एक सुपर स्टार बनाऊं”। “अरे बेटा तू पद लिख कर बड़ा आदमी बन, मेरे चक्कर में अपना समय बरबाद मत करना”। “मां आप पर्सन मत हो मैं भी फोटोग्राफी सीखना चाहता हूं तो आपकी फोटो खिच कर मुझे भी शिखाने को मिलेगा और सयाद आपकी मदद से मैं एक अच्छा फोटोग्राफर बन जाऊं”। ममता राजू के गाल पर एक और पप्पी देकर उसे कांधे पर सर रख कर बोलता है “ठीक है बेटा अगर तुझे पढ़ाना है तो मैं जरा मदत करुंगी पर फोटोग्राफर क्या ठीक था, काम भी पता है”। “क्या मां बड़े फोटोग्राफर बहुत कमते हैं और बड़ी बड़ी मॉडल से फोटो खिचवाने के लिए लाइन लगती है”। “पर बेटा हर कोई बड़ा फोटोग्राफर तो नहीं बन पाता होगा”। “हां मां पर मैं कोसिस करना चाहता हूं और फिर आपकी मदत से सयाद मशहूर भी हो जौन”। ममता राजू की एक और पप्पी ले कर उसे कांधे पर सर रख कर आंख बंद कर बोला है “बेटा तेरी मदत के लिए तो मैं हमा तैय्यार हूं”। राजू माँ की थकन को देख कर बोला “माँ आपको आ रही है तो जाओ”। “नहीं बेटा जरूरत नहीं आ रही बस थोड़ा लेने का मन कर रहा है, बदन में ठनका है”। “माँ तो फिर यही ले जाओ सो सो पर मेरी गॉड में सर रख कर”। “अरे नहीं बेटा भला एक मां अपने बच्चे की भगवान में सर रख कर कैसे तो सकाती है”। “मां आपको कितनी बार बोला अब मैं बच्चा नहीं हूं, चलो अब जिद्द मत करो और लेटो।
ममता मुस्कान और सरमते हुए राजू की भगवान में सर रख कर दो गई और राजू की तरफ देख कर बोली “उम्ह्ह्ह, बेटा मुझे थोड़े सरम आ रही है ऐसी तेरी भगवान में सर रख कर लेने से”। राजू ममता के चेहरे से बाल को हटा कर उसे कोमल गल को सहलते हुए बोला “मां धीरे धीरे आदत लग जाएगी, फिर सरम आना बंद हो जाएगी” और फिर ममता के गाल को अपने अगुथे और हैं। “आउच, बेटा सराते करना बंद करगा, तू मेरे प्यार का बहुत फ़ायदा उठा रहा है”। “हाहा मां आप के साथ सरत करने में बहुत मजा आता है, अब आगे फिल्म देखोगी या फिर मेरी ही सकल देखती रहेगी”। ममता कीचड़ कर राजू की तरफ पीठ कर के अपने बगल में जाने दो और टीवी देखने लगी “ले नहीं देखती तुझे अगर तुझे बुरा लग रहा है”। “मां मुझे क्यों बुरा लगेगा, मैं तो चाहता हूं की आप फिल्म के मजा लो, कितनी अच्छी फिल्म है”। ममता के मुदने के बाद राजू मां के गदरए बदन को अच्छे से निहार पा रहा था, उसकी पूरी नंगी पीठ, गदरई चार्बी से भारी कमर और उसके छोटे से ब्लाउज से बाहर बड़े बड़े दूध राजू को उत्तेजीत कर रहे थे। राजू का लुंड अब फिर से जगना सुरु हो गया था और ममता के गल को हल्के से सहला रहा था। “बेटा क्या देखता हूं तो समझ भी नहीं आ रहा क्या चल रहा है इस फिल्म में”। राजू एक हाथ से ममता के सर को सहलता है और दसरे हाथ से ममता की चिकनी और कोमल कमर को सहलाते हुए बोला “मां क्या समाधान है बस ये किशोर हीरो है जो किशोर हीरोइनो को खोजने की कोसिस कर रहे हैं”। हेरोइन का डांस चल रहा था जिस्म हेरोइन को कफी पास से देखा जाता है जिसे देख कर ममता बोला है “बेटा एन सहर की लड़कियों के बाल नहीं निकलेते देख कितनी साफ है एन्की”। “माँ बाल तो सबे आते हैं, बस सहर में लड़किया सब साफ कर लेटी है”। “कैसा साफ करता है बेटा देख ऐसा बागल में जरा से भी बाल नहीं है बिलकुल चिकनी है इसकी बगल”। “बहुत तारीके है, कोई शेव करता है, कोई क्रीम लगता है और कोई वैक्स करता है। क्या आप अपने बगल के बाल नहीं साफ करता देखो मेरा भी बिलकुल साफ है” राजू ममता को अपना जाना बगला दी। ममता राजू के बगल को सहलते हुई बोली “हां बेटा तू कैसे साफ रखता है”। “मां मेरे अभी ज्यादा मोटे आए नहीं है तो बस कच्ची से काट लेता हूं”। ममता भी राजू को अपना हाथ उठा कर अपना बागल दिखते हुए बोली “देख बेटा मैंने भी अभी 4-5 दिन पहले ही कटे फिर खराब गए”। राजू ममता की कख में उंगलीयों से सहला कर ममता के छोटे छोटे कांच के बालो को सहलाता है। राजू को ममता के बगल में आए पसीन से उंगलीयों पर जिला पान महसूस हो रहा था। ममता के बगल की कोमल तवाचा का अहसास राजू को कफी उत्तेजीत कर रहा था, जिससे उसे लुंड ऊंचा कर तोलिये के नीचे से ममता के गल को सहलाने लगता है। राजू अपने हाथ को मुह के पास ले जा कर सुनता है तो ममता के पासे की तेज गंध आती है, जिससे राजू कफी उत्तेजीत हो गया और उसे लुंड पुरा कड़क हो कर ममता के गल को लाना जोर से चाहिये सिर्फ काटने से काम नहीं चलेगा”। “बेटा मैंने कभी शेव नहीं किया है आज तक”। “कोई बात नहीं माँ मैं आप को सिख दूंगा”। “बेटा मुझे लग रहा है तेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया, कहीं उसे ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा।” “हां मां पर दर्द ज्यादा नहीं है तो परसन होने की जरूरत नहीं है”। “ठीक है बेटा पर दर्द ज्यादा हो तो मलिश कर लेना फिल्म के बाद”। मूवी में हीरोइन एक सेक्सी नाइटी में थी जो सिरफ उसके आगे झांघो तक ही आ रही थी और ऊपर से दो दूध कफी बहार आ रहे थे। “ये कैसा कपाड़ा पहन कर ये सोने जा रही है”। “मां ये नाइटी है, सहर में साड़ी औरते नाइटी पाहन कर ही सोती है”। “क्यूं ऐसा क्या खास है नाइटी मी”। “माँ देखो कितना खुला और ढीला कपाड़ा है, ऐसे कपड़ो मुझे अच्छी आती है और ज्यादा पसीना नहीं होता है जैसा तवाचा भी साफ और सुंदर बनी रहती है”। “लो ये तो मुझे पता ही नहीं था, तबी मुझे रात को बहुत पसेना आता है और कभी कभी पाने से दान भी निकल आता है”। “कोई बात नहीं बेटा, अब मैं आ गया हूं न सब पढ़ा दूंगा”। दोनो फिल्म देखने लग जाते हैं पर राजू का ध्यान तो ममता के खूबसूरत बदन पर ही टीका हुआ था। राजू धीरे धीरे अपनि कमर हो हिला कर ममता के गल को अपने लुंड से सहलाने की कोसिस कर रहा था और एक हाथ से ममता के नजुक पेट की चार्बी को डबा कर उसे कोमलता के बड़े ले रहा था।
ममता की आंखे भारी हो चुकी थी और राजू के हल्के हलके हिलाने से तो वो और भी आसनी से जरूरत के आगोश में आगई। एडर राजू उत्तेजना में आकार ममता के पेट को जोर से दबने और सहलाने लगा “उम्म्ह्ह्ह मम्माः”, पर जब ममता ने कुछ नहीं बोली तो उसे आगे बढ़ने के लिए खराब कर देखा की उसकी मां से इतनी चुकी थी। राजू की कामुकता अब पागल कर रही थी का उपयोग करें। उसे ममता के सर को धीरे से थोड़ा सा उठा और नीचे से एक तरफ से तोलिये को हटा दिया। अब उसका 6 इंच का अकड़ा हुआ फड़ फदता लुंड बहार खुली हवा में खड़ा था। राजू अब ममता के मुह को वापस अपने लुंड पर रख कर ममता के ऊपर वाले गल को डबा कर उसके नीचे वाले गल से अपने लुंड को दबाता है। “मम्म्माआह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह किया किया किया किया किया किया किया किया किया गया वीडियो कहा. राजू अपने दुसरे हाथ को ममता के पेट से हटा कर उसे छुटों की तरफ ले जाता है और ममता के गांद की चार्बी को अपनी मूठी में भर के दबने और सहलाने लगता है। “उउउम्म्म्ह आह्ह्ह्ह मम्माआह्ह्ह”। राजू का लुंड अब और डबव महसूस करना चा रहा था और राजू की उत्तेजन को और बड़ा रहा था। राजू ममता के चेहरे को और झुका कर अपने लुंड से ममता के उठने को सहलाने लगता है। “आगे से आह्ह्ह्ह मम्म्माआह्ह्ह मम्म्माआह्ह्ह” अपने लुंड पर ममता के कोमल उठो का अहसास पा कर राजू का उत्तेजीत लुंड फड़ने लगा है, जिससे राजू उत्तेजना में आ कर ममता के उठने से मुझे आ गया है पर ममता की जरूरत भी खुल जाती है। “उउउम्म एह ये क्या कर रहा है बेटा”। राजू गबारा गया और ममता के गंद से अपने हाथ को हटा कर बोला “वो मां मेरा लुंड अकड़ गया था और उसमे बहुत दर्द हो रहा था”। “तोलिया कैसे हट गया और अपने लुंड को तू मेरे मुह पर क्यों रागद रहा था। “जब वतन दर्द था तो मुझे उठ क्यों नहीं बेटा” पप्पी देते हुए बोली “पुच्छ, क्या ऐसा मत किया कर बेटा अगर कोई परसानी है तो उठा दिया कर, मेरे सोने के लिए तो पूरी रात पड़ी है। अब ये तेरा दर्द कैसे काम होगा। “मां इसकी मलिश करनी पड़ेगी।” “बता बेटा कैसे कराटे है मैं कर देता हूं तू अभी बहुत दर्द में है।” राजू अपने लुंड को अपने ही हाथ से हल्के से कहते हैं हुए हैं “मां बस ऐसे ही आपने हाथ से मलिश कर दो, पहले आप यहां मेरे जोड़े के बीच आ कर बैठाओ”। अब लुंड को पकड कर हलके सहलो। ममता अपने एक हाथ को राजू के लुंड की तरफ घबते हुई बड़ी है और अपनी उंगलियों से उसके 6 इंच लंबे लुंड को जकड लेटी है। “आआआह आआह्ह्ह मम्माह्ह्ह आआह्ह्ह मांआः” “बेटा अभी भी दर्द हो रहा है क्या”। अपने मुह का पानी गिरा दो मेरे लुंड पे। “मतलब ठुक ??”। “हां मां ठुक से चिपकन बिलकुल खतम हो जाएगी।” “ठीक है बेटा” ममता मुह मुझे अच्छा ठुक भर कर अपना मुह राजू के लुंड के ऊपर ले जाति है और मुह खोल कर जीब को हलका सा निकला कर ठुक को राजू के लुंड पर गिरा देता है फिर अपने हाथ से सारा के लुंड फेल रा देता है। अब ममता का हाथ राजू के लुंड पर और भी आराम से सरक रहा था “आआआह्ह्ह मम्माह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्ह मम्मा अब बहुत आराम मिल रहा है आह्ह्ह”. राजू को आराम मिलाता देख ममता ख़ुश गो गई “बेटा और ठुक लगान की इतना अच्छा है”। “आह्ह्ह्ह आह्ह्ह मां थोड़ा और लगा दो आह्ह्ह्ह मम्माः”। ममता फिर से मुह में ठुक भर कर राजू के लुंड पर गिरती है “छप्प छप्प छप्प बेटा आराम मिल रहा है ना”। “आह्ह्ह आह्ह्ह्ह हां मां बहुत माजा आ रहा है ऐसा ही करता रहा, आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह”. ममता का मुह राजू के लुंड के कफी करीब आ गया था और वो राजू के लुंड के टोपे से निकलाती गंध को सुंघ कर माधोस हो रही थी। पता नहीं क्यों राजू के लाल रंग के तोपे को और इतने करीब से देख कर ममता के मुह में और भी पानी आ रहा था। “आह्ह्ह आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह मां दुसरे हाथ से लुंड के आने वाले उनके को भी सहला दो आह्ह्ह्ह ममह्ह्ह”. ममता मुह के पानी को सीधा राजू के लुंड के टोपे पर गिरती है और अपने दुसरे हाथ से बहुत हलके हाथ से लुंड के टोपे पर अपना ठुक मलने लगा हा। “पाछ पछ छप्प पच्छ पच्छ”। ममता के कोमल हाथ का एहसास अपने लुंड के टोपे पर पकार राजू उत्तेजना की चारम सीमा पर पांच गया था और उसे लुंड अब झडाने के लिए बिलकुल तयार था। एडर ममता राजू के फड़ फदते लुंड को देख कर चिंता हो रही थी कि राजू कफी दर्द में है और वो बेटे को आराम देने के लिए न जाने क्यों आएगे झुक कर लुंड के टोपे पर हलकी सी “पू दे देता है”। राजू जब मां को अपना लुंड चुमते हुए देखता है तो उसका सबरा का बंद टूट जाता है “आह्ह्ह आआआआह माआआआआह बस निकलाने वाला है मांह”। ममता समाज गई की पिचली बार की तरह ही तो मुठ की नदी बहा दूंगा। तो वो अपना साड़ी का पल्लू राजू के लुंड के सामने लगा देती है और राजू ममता की साड़ी में ही झडाने लगता है “आहःहः आआहः मम्माआ पछ्ह पाछः आह्ह्ह्ह पछ्ह आह्ह्ह्ह ममहह पहः मम्हह पहः मम्हः मम्हः आखिर दो मिनट बाद राजू का लुंड संत होता है और ममता साड़ी के पल्लू में राजू का सारा मुथ लापता कर सरे से ही राजू के लुंड को साथ ही नीचे गिरे एक दो बुंदो को साफ कर देता है। “अब आराम है ना बेटा”। “हां मां आज आपके हाथ से मलिश करवा कर बहुत बड़ा आया”। “अच्छा है, चल अब बाथरूम में तेरा लुंड साफ कर देता है ऐसा ही ठुक वगेरा लगा हुआ है”। ममता राजू का हाथ पक्का कर उपयोग बाथरूम में ले गई और पानी से उसका लुंड साफ करने लगी “आह आराम से करो मां”। “चल हो गया अब तू जा के सो जा मैं भी आ रही हूं”। राजू के जाने के बाद ममता ने अपनी साड़ी उतर कर पानी में भीगो दी और फिर बाथरूम में ही अपनी कच्ची नीचे कर के बदले के लिए बैठ गई। जब ममता हाथ मुह धो कर कमरे में आई तो राजू नंगा लंगे फेला कर सो रहा था। “इतनी जल्दी सो भी गया, लगा है बहुत ठक गया था” ममता ने राजू के नंगे बदन को एक चादर से धक दिया और फिर लाइट बुझा कर राजू के पेट पर हाथ रख कर खुद भी उसे पास सो गई। सोते समय भी उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी क्योंकि बहुत दिनो बाद उसके अकेलेपन से भारी जिंदगी में प्यार ही प्यार नजर आ रहा था।