मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 13
मुझे क्या पता यार” नरेश ने विजय की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।
“यार इन औरतों को देखो अपनी खुजलि मिटाने के लिए वह मरदों से इंजेक्शन लगवाए और बच्चा रोकने के लिए डॉक्टर्स से” विजय ने हँसते हुए नरेश से कहा और दोनों ज़ोर से हंसने लगे ।
“यार तुम बुहत बदमाश हो” नरेश ने ज़ोर से हँसते हुए विजय से कहा।
“और बताओ क्या कर रहे हो सुबह से” विजय ने नरेश के पास बेड पर सोते हुए कहा।
“क्या बाताऊँ यार अपना टेम्प्रेचर तो किसी ने हाई कर दिया है” नरेश ने एक ठण्डी आहहह भरते हुए कहा।
“अब फिर किस ने तुम्हारी नींद चुरा ली” विजय ने नरेश की बात सुनकर उत्तेजित होते हुए कहा।
“अब यार क्या बताऊँ अब तुम गुस्सा न हो जाओ” नरेश ने विजय की तरफ देखते हुए कहा।
“अब बताओ भी मैं नाराज़ नहीं हूंगा” विजय ने वैसे ही उत्तेजित होते हुए बोला ।
“यार वह तुम्हारी बड़ी बहन कंचन ने मेरा लौडा गरम कर दिया है” नरेश ने सीधा सीधा विजय को बताते हुए कहा।
“कंचन दीदी मगर कैसे” विजय ने नरेश की बात सुनकर और ज्यादा उत्तेजित होते हुए कहा।
नरेश ने विजय को पूरी बात बता दिया।
“यार मुझे लगता है यह हम दोनों की बहनें साथ में मिलकर हम दोनों को पागल बना रही हैं और उन दोनों का चाहत अदला बदली करने का है” विजय ने नरेश की बात सुनकर गरम होते हुए कहा ।
“क्या कहा बे शीला भी तुम्हें लाइन दे रही है” नरेश ने विजय की बात सुनकर हैंरान होते हए कहा।
“हाँ यार शीला दीदी जानबूझकर मुझे अपना जिस्म दिखाती रहती है” विजय ने नरेश की बात सुनकर कहा।
“यार कंचन ने तो मुझे पागल बना दिया है काश वह मेरी बहन होती” नरेश ने विजय की तरफ देखते हुए कहा ।
“जल मत बे । वैसे भी वह तुझसे चुदवाना चाहती है” विजय ने नरेश की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
“जलने की तो बात है साले इतना अच्छा माल तुम्हें सारी ज़िंदगी के लिए फ्री में मिल गया” नरेश ने विजय की बात सुनकर उसे देखते हुए कहा।
“क्यों बे शीला भी तो किसी से कम नहीं । साली चलती ऐसे है जैसे उसे अपना जिस्म सम्भाला नहीं जा रहा हो। साली अपनी गांड को ऐसे हिलाती है जैसे की उसकी गांड में लंड पडा हो” विजय ने नरेश की बात सुनकर कहा ।
अब मेरा मुँह मत खुलवा। तुम्हारी बहन कंचन साली का जिस्म कितना भरा है जैसे भगवान ने सारा माल उसके जिस्म में कूट कूट कर डाला है। कितनी बड़ी चुचियाँ और गांड। साले कहीं तू उसकी गांड तो नहीं मारता। साली की गांड डेली बढ़ती ही जा रही है” नरेश ने विजय की बात सुनकर गुस्से से उसकी बहन की तारीफ करते हुए कहा ।
“अबे यार तुम्हारी बहन की चुचियां भी कुछ कम नहीं। साले तू उसकी चुचियों के उभारों को जी भरकर चूसता और चाटता है । इसीलिए तो जब देखो वह साड़ी के ऊपर से ही चमकती रहती है” विजय ने शीला की तारीफ करते हुए कहा।
“छोड़ो यार हम आपस में क्यों लड रहें हैं लगता है हम दोनों पर एक दुसरे की बहनों का ‘जादू चल गया है” नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
“हाँ यार वह हमें पागल बना रही हैं। मेरे पास एक आईडिया है जिससे हमें और ज्यादा मजा आयेगा” विजय ने नरेश की बात सुनते हुए कहा ।
“क्या है बे जल्दी बता ना” नरेश ने उत्तेजित होते हुए कहा।
“यार अगर हम एक दुसरे की बहनों को एक दुसरे के सामने चोदे तो” विजय ने नरेश की आँखों में देखते हुए कहा।
“क्या यार तुमने तो मेरे मूह की बात छीन ली साले बुहत कमीने हो गये हो” नरेश की आँखें विजय की बात सुनकर चमकने लगी और उसने विजय को दाद देते हुए कहा।
बस यार तुम्हारी ही संगत का असर है” विजय ने नरेश की तरफ देखते हुए कहा और दोनों ज़ोर से हंसने लगे,
“यार एक बात कहुँ तुम्हारी किस्मत मुझसे अच्छी ही है क्योंकी तुम्हारी माँ भी किसी से कम नही” नरेश ने फिर से विजय की तरफ देखते हुए कहा ।
“अब फिर से शुरू हो गया मुझसे पहले तो उसका रस तुमने चखा और अपनी माँ को भी पटा लिया साले । मुझे सलाह ही नहीं की” विजय ने नरेश की बात सुनकर उसे टोकते हुए कहा।
“क्या साले अब तुम्हारी नज़र मेरी माँ पर भी है क्या?” नरेश ने हैंरान होते हुए कहा।
“क्यों बे तुम्हारी माँ कौन सी दूध की धूलि है जो मुझसे चुदवाने में उसे तकलीफ होगी” विजय ने नरेश की बात सुनकर गुस्सा होते हुए कहा।
“साले गुस्सा मत हो चोद लेना मेरी माँ को भी। मुझे कोई ऐतराज़ नहीं पर जैसे तुमने हमारी बहानों के बारे में आईडिया दिया है अगर वैसे ही हम अपनी माँओं के साथ करें तो” नरेश ने विजय की आँखों में झाँकते हुए कहा।
“साले कमीने अपनी माँ को मेरे सामने चुदता देखना चाहते हो” विजय ने नरेश की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।
“हा बे और तेरी माँ को भी तेरे सामने चोदना चाहता हूँ ताकी तुम्हें पता चले की वह कितनी बड़ी छिनाल है” नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
“साले छिनालपन तो हर औरत में होता है बस उसे निकालने वाला होना चाहिये” विजय ने नरेश की बात सुनकर हँसते हुए कहा और दोनों आपस में गप मारने लगे ।
मुकेश ऑफिस से वापस आ चुका था और वह खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने लगा ।
मानिषा अपने बापू के कमरे में आ गयी थी । अनिल अपने कमरे में बेड पर लेटा हुआ था । वह सोया हुआ नहीं था।
“बापु अब तबीयत कैसी है” मनीषा ने अपने बाप के पास बेड पर बैठते हुए कहा।
“बेटी अब सही है। मैं भी तुम्हें ही याद कर रहा था” अनिल ने बेड से उठते हुए अपनी बेटी को अपनी गोद पर लिटाते हुए कहा।
“बापु मैं तो आपकी सेवा करने के लिए ही हू” मनीषा ने अपने बाप के सिकुड़े हुए लंड को धोती के ऊपर से ही अपने हाथ में लेते हुए कहा।
“ओहहहह बेटी आज रात को तुम जी भरकर मेरी सेवा कर लेना” अनिल ने अपनी बेटी के बालों में हाथ ड़ालते हुए कहा।
“हाँ बापू मैं रात को ज़रूर आपकी सेवा करूंगी। मगर इस वक्त थोडी सेवा तो कर ही सकती हू” मनीषा ने अपने पिता की धोती में से उसके लंड को खींचकर बाहर निकाकर सहलाते हुए कहा ।
मानिषा के मूह उसके बाप के लंड के बिलकुल क़रीब था । वह अपने बाप के लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए बुहत गौर से बड़ा होता हुआ देख रही थी, कुछ ही देर में अनिल का लंड बिलकुल तनकर फनफनाने लगा।
मनिषा ने अपना मुँह थोडा नीचे करते हुए अपने बाप के लंड को चूम लिया।
“हाहहह बेटी” मनीषा के होंठ अपने लंड पर पडते ही अनिल सिसक उठा । मनिषा अपना मूह थोडा सा खोलते हुए अपने बापू के लंड के सुपाडे को अपने होंठो के बीचे ड़ालते हुए बुहत ज़ोर से चूसने लगी ।
“ओहहहह हहः” अनिल के मुँह से जोर की सिस्कियाँ निकल रही थी और वह मज़े से अपनी बेटी के बालों को सहला रहा था । मनीषा अपने होंठो से अपने बाप के लंड को चूसते हुए अपने एक हाथ से उसकी मोटी गोटीयों और दुसरे हाथ से उसके लंड को सहला रही थी।
अनिल मज़े के मारे हवा में उड़ रहा था। उसे अपना लंड अपनी बेटी के लबों के बीच आगे पीछे होता हुआ जन्नत का मजा दे रहा था।
“आजहहहह बेटी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है” कुछ ही देर में अनिल का जिस्म काम्पने लगा और वह सिसकते हुए बोला। मनीषा अनिल की बात सुनकर उसके लंड ज़ोर से चूसते हुए अपने हाथ से तेज़ी के साथ सहलाने लगी ।
“ओहहहह बेटी आअह्हह्ह” अनिल का जिस्म झटके खाने लगा और उसके लंड से वीर्य निकल कर उसकी बेटी के मूह में गिरने लगा । मनीषा ने अपने पिता के लंड से निकलते हुए वीर्ये की एक बूँद भी नीचे नहीं गिरने दी, वह अपने बाप के लंड से निकलती हुयी हर बूँद को अपने मूह से सीधा अपने पेट में उतार रही थी।
अचानक दरवाज़ा खटकने लगा जिसकी आवाज़ से अनिल चोंक गया। मगर मनीषा को कोई फर्क नहीं पडा वह अपने बाप के लंड को अपने मूह से निकालकर अपने हाथ से आगे पीछे करने लगी जिस वजह से अनिल के लंड के सुपाडे से फिर से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी । मनीषा ने अपना मूह खोलकर अपने पिता के लंड के सुपाडे को फिर से अपने मूह में भर लिया और उसे ज़ोर से चूसते हुए उसमें से बचा हुआ वीर्य भी निचोडकर पीने लगी ।
मानिषा ने अब अपने बाप के लंड को अपने मुँह से निकाल दिया और खुद बाथरूम में चलि गयी । दरवाज़ा अब ज़ोर से खटखटाने लगा था, अनिल को ऐसे महसूस हो रहा था जैसे उसके पूरे जिस्म को निचोड दिया गया हो। वह बुहत ज़ोर से हांफ रहा था ।
अनिल अपनी साँसों को सँभालते हुए दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा और अपने हाथ से दरवाज़े का लॉक खोल दिया।
“क्या बाबुजी इतनी देर क्या कर आहे थे?” रेखा ने अंदर आते ही अपने ससुर से आँखें नचाते हुए सवाल किया।
“कुछ नहीं बेटी वह ज़रा उठने में देर हो गई मनीषा बेटी भी बाथरूम गयी हुयी थी” अनिल ने रेखा का सवाल सुनकर उसे जवाब देते हुए कहा।
“च मनीषा दीदी यहीं है सॉरी मुझसे गलती हो गई जो आप दोनों को डिसट्रब किया” रेखा ने अपने ससुर से माफ़ी माँगते हुए कहा ।
“रेखा दीदी मैं तो बापू से उसकी तबीयत पूछने आई थी मुझ क्या पता आप आने वाली है” मनीषा ने बाथरूम से निकलते हुए कहा।
“दीदी मैं भी बापू से बाते करने आई थी” रेखा ने मनीषा को बाथरूम से निकलता हुआ देखकर कहा।
“मुझे पता है दीदी की आप क्या बाते करने आई है ” मनीषा ने रेखा की आँखों में देखते हुए मुसकुराकर कहा।
“मानिषा दीदी फिर बैठिये न मिलकर गप मारते है” रेखा ने मनीषा का हाथ पकडते हुए कहा और दोनों साथ बैठकर बाते करने लगीं ।
रात का खाना खाने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरों में जाकर सोने की तैयारी करने लगे । विजय और नरेश ने आईडिया बना लिया की किस तरह आज वह अपनी बहनों को एक दुसरे के सामने चुदते देखेंगे, इधर मनीषा भी सभी के सोने का इंतज़ार कर रही थी ताकी वह जल्द से जल्द अपने बापू की सेवा कर सके
“क्या बात है मेरी जान आज बुहत सुंदर लग रही हो” मुकेश ने रेखा को अपनी बाहों में भरते हुए कहा।
“आपको हमें देखने का टाइम कहाँ मिलता है” रेखा ने अपने पति से मूह बनाते हुए कहा।
“यार अब छोड़ो न इन बातों को तुम्हें तो पता है की मैं सारा दिन ऑफिस के कामों से थक जाता हुँ” मुकेश ने अपनी बीवी की नाइटी को उसके आगे से खोलते हुए कहा।
रेखा अपने पति का मूड ख़राब करना नहीं चाहती थी इसीलिए वह चुपचाप मुकेश के अंडरवियर में क़ैद उसके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी।
“आह्ह्ह्ह मेरी जान” मुकेश ने अपनी बीवी का हाथ अपने लंड पर लगते ही सिसकते हुए कहा। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों से ब्रा को हटाते हुए उसकी एक चूचि को अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।
रेखा का पूरा जिस्म अपनी चूचि को अपने पति के मुँह में जाने से गरम होने लगा और वह सिसकते हुए अपने हाथ से मुकेश के बालों को सहलाने लगी । मुकेश ने अपनी बीवी की दोनों चुचियों को जी भरकर चाटने के बाद सीधा होते हुए अपना अंडरवियर उतार दिया । और अपनी पत्नी की टांगों के बीच आते हुए उसकी पेंटी को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया।
रेखा की चूत अब उसके पति के सामने बिलकुल नंगी थी जिसमें से पानी की बूँदे निकल रही थी।
“आज तो बुहत ज्यादा गर्म हो रही हो मेरी जान” मुकेश ने अपनी बीवी की चूत को देखते हुए कहा और नीचे झुकते हुए उसकी चूत को चूम लिया ।
“आह्ह्ह्ह बुहत दिनों बाद आपने सही तरीके से हमें गरम किया है” रेखा ने सिसकते हुए कहा । रेखा अपने पति को उसकी दीदी के साथ रात को देख चुकी थी और उसके साथ सेक्स करते हुए उसे वह सब याद आ रहा था इसीलिए वह बुहत जयादा गरम हो रही थी । मगर वह इस वक्त अपने पति को कुछ नहीं कहना चाहती थी इसीलिए वह ऐसा कह रही थी।
मुकेश ने अपनी बीवी की टांगों को उसके घुटनों तक मोड़ दिया और नीचे झुकते हुए रेखा की चूत के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा।
“आजहहह ओह्ह्ह्हह अपना वह डाल दो न क्यों तडपा रहे हो” रेखा ने अपने पति की जीभ से अपनी चूत को चूसने से तड़पते हुए कहा ।
“डालिंग अभी डालता हूँ आज तो तुम्हें इतना गरम देखकर मैं भी बुहत एक्साइटेडट हो गया हू” मुकेश ने अपनी पत्नी की चूत से अपना मुँह हटाते हुए कहा और अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखकर एक झटके के साथ उसकी चूत में पेल दिया।
“आहहह डार्लिंग आज तो तुम्हारी चूत बुहत ज्यादा गरम लग रही है और गीली भी” मुकेश ने अपने लंड को अपनी पत्नी की चूत में ज़ोर से आगे पीछे करते हुए कहा।
“ओहहहह ज़ोर से करो बुहत मजा आ रहा है आज आपका भी बुहत ज्यादा तना हुआ है” रेखा ने भी अपने पति की बता सुनकर अपने चूतडों को उछालते हुए बोली।
मुकेश अपनी पत्नी की बात सुनकर उसे बुहत ज़ोर से चोदने लगा । 5 मिनट बाद ही रेखा का जिस्म काम्पने लगा।
“आह्ह्ह्हह मैं आ रही हू” रेखा ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । मुकेश अपनी पत्नी को इतना जल्दी झरता हुआ देखकर ख़ुशी से उसे बुहत तेज़ी के साथ पेलने लगा।
“आह्हः डार्लिंग ओह्ह्ह्हह आहहहः” रेखा का जिस्म झटके खाने लगा और वह अपने चूतडों को उछालते हुए मज़े से झरने लगी । रेखा की चूत झरते हुए सिकुड़कर अपने पति के लंड को ज़ोर से जकड लिया जिस वजह से मुकेश भी अपने आप को रोक नहीं पाया और ज़ोर से हाँफते हुए अपनी बीबी की चूत में झरने लगा।
“आह्ह्ह्ह डार्लिंग मैं भी आया” मुकेश झरते हुए ज़ोर से चिल्ला रहा था । मुकेश झरने के बाद अपनी बीवी के ऊपर ढेर हो गया।
“क्या हुआ जान थक गए क्या?” रेखा ने अपने पति को अपने ऊपर से हटाते हुए कहा।
“ओहहहह डार्लिंग तुम्हारी चूत का तो जवाब नहीं। झडते वक्त ऐसे सिकूड़ती है जैसे मेरे लंड को कोई हाथ से मसल रहा हो” मुकेश ने रेखा की साइड में लेटते हुए कहा।
“क्यों जान मनीषा दीदी की चूत झरते वक्त नहीं सिकूड़ती क्या” रेखा ने मुकेश की आँखों में देखते हुए कहा।
“क्या कहा?” मुकेष ने परेशान होते हुए कहा रेखा की बात सुनकर उसके चेहरे का रंग उड़ने लगा था।
“वही जान जो तुमने सुना” रेखा ने अपने पति के शॉकड हुए लंड को सहलाते हुए कहा ।
“तो रात को तुमने हमें देखा था?” मुकेश ने वैसे ही परेशानी वाली हालत में अपनी बीवी से कहा।
“अरे आप तो परेशान हो गये । मैं आपसे नाराज़ नहीं हू” रेखा ने सीधा होते हुए कहा और अपने पति के वीर्य से सने हुए सिकुड़े लंड को अपने मूह में ले लिया।
“आह्ह्ह्ह डार्लिंग तुम तो सच में महान हो” मुकेश अपने लंड को अपनी बीवी के मूह में जाते ही सिसकते हुए बोला।
“नही जान में महान नहीं हूँ मगर मेरी सोच कुछ अलग है मरद और औरत को अपनी जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए जो वह किसी से भी ले सके” रेखा ने अपने पति का लंड अपने मुँह से निकालते हुए कहा और अपनी जीभ निकालकर उसे चाटने लगी ।
“ओहहहह मैं समझा नहीं क्या तुम भी किसी से” मुकेश ने सिर्फ इतना कहा।
“हाँ मेरी पति देव मगर मैं अपनी मर्यादा जानती हूँ इसीलिए मैंने घर से बाहर कुछ नहीं किया” रेखा ने सीधी होकर अपने पति की आँखों में देखते हुए कहा।
“घर में मगर किस से” रेखा की बात सुनकर मुकेश के लंड में हलचल होने लगी थी और उसने एक्साइटेडट होते हुए रेखा से पूछा।
“बापु, विजय और नरेश सब के लन्डों का मजा ले चुकी हूँ मैं” रेखा ने बड़ी बेशरमी से कहा।
“क्या कहा मुझे यकीन नहीं हो रहा है” रेखा की बात सुनकर मुकेश का लंड पूरी तरह तनकर झटके खाने लगा और उसने हैंरानी से अपनी बीवी की तरफ देखते हुए कहा ।
“जान इतना हैंरान क्यों हो रहे हो। अभी जो बात मैं तुम्हें बताने वाली हूँ तुम और ज्यादा हैंरान हो जाओगे” रेखा ने अपने पति के लंड को तना हुआ देखकर अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर उसे अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए बोली और उसपर अपने वजन के साथ बैठ गई ।
“आह्ह्ह्ह डार्लिंग अब इस से ज्यादा चौकाने वाली क्या बात है की तुम अपने ससुर बेटे भांजे सब से चुदवा चुकी हो” मुकेश ने अपना लंड अपनी बीवी की चूत में घूसने से सिसकते हुए उसकी चुचियों को अपने हाथों से दबाते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह जान तो सुनो तुम्हारी बड़ी बेटी अपने भाई विजय से तुम्हारी बहन अपने बेटे नरेश से और नरेश अपनी बड़ी बहन शीला को चोद चूका है” रेखा ने अपने पति के लंड पर ज़ोर से ऊपर नीचे होते हुए कहा।
“डालिंग मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है” मुकेश ने अपनी पत्नी की बात सुनकर उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को बुहत ज़ोर से दबाते हुए कहा । रेखा की बाते सुनकर मुकेश का लंड लोहे की तरह सख्त और मोटा होता जा रहा था ।
“ओहहहह जान मेरी बाते सुनकर तुम्हारा लंड तो बुहत ज्यादा मोटा और सख्त होता जा रहा है” रेखा ने मज़े के मारे सिसकते हुए कहा।
“डारलिंग बस यही राज़ हैं या कुछ और भी है” मुकेश को रेखा की बातों से बुहत मजा आ रहा था इसीलिए उसने अपने चूतडों को उछालकर रेखा की बुर चोदते हुए कहा ।
“जान अब क्या सुनना चाहते हो तुम्हारी बहन बापू और विजय से भी चुदवाना चाहती है। हो सकता है अभी वह बापू से चुदवा ही रही हो” रेखा ने मस्ती में ज़ोर से उछलते हुए कहा । उसका जिस्म अब अकडने लगा था।
“आजहहहह डार्लिंग तुम्हारी बाते सुनकर मेरा लंड झरने वाला है” मुकेश ने रेखा की बात सुनकर ज़ोर से सिसकलते हुए कहा।
“जान मैं भी आने वाली हूँ बस एक मिनट” रेखा अपने पति की बात सुनकर उसके लंड पर पागलोँ की तरह कुदने लगी।
“आह्ह्ह्ह ओहह ओहहहहहह जान” कुछ ही देर में रेखा का जिस्म झटके खाते हुए झरने लगा और उसकी चूत ने फिर से सिकुडते हुए अपने पति के लंड को दबा दिया।
“आआह्ह्ह डार्लिंग ओह्ह्ह्हह” मुकेश भी ज़ोर से चिल्लाते हुए झरने लगा । रेखा अपनी आँखें बंद किये हुए झर रही थी और झरते हुए अपने पति के लंड पर ज़ोर से उछल रही थी, मुकेश ने भी झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थी और उसके लंड से आज जाने कितनी देर तक वीर्य की बूँदे निकल कर उसकी पत्नी की चूत में गिरने लगी।
कुछ ही देर में दोनों पति पत्नी शांत होकर एक दुसरे से लिपटे हुए पड़े थे । मुकेश का लंड सिकुड़ कर उसकी पत्नी की चूत से निकल चूका था।
“ओहहहह डार्लिंग आज तो तुमने मुझे निचोड ही दिया” मुकेश ने अपनी पत्नी के होंठो को चूमते हुए कहा ।
“आप ही तो अपनों के बारे में सुनकर उत्तेजित हो गये थे इसीलिए तो आज पहली बार आपने मुझे भी शांत कर दिया है” रेखा ने अपने पति की बात सुनकर हँसते हुए कहा । दोनों पति पत्नी बुहत थक चुके थे इसीलिए वह दोनों कुछ ही देर में ऐसे ही नंगे एक दुसरे की बाहों में नींद की आग़ोश में चले गये।
विजय और नरेश प्लान के मुताबिक अपने कमरे से उठते हुए अपनी बहनों के कमरे में जाने लगे।
“भइया आप और नरेश भाई आप दोनों यहाँ कैसे” कंचन जो अभी बाथरूम से फ्रेश होकर निकली थी बोलू। वह नाईट गाऊन लपेटे हुए थी उसने अपने दोनों भाइयों को एकसाथ देखकर हैंरान होते हुए कहा ।
“कंचन ऐसे ही हम बोर हो रहे थे तो सोचा आज साथ बैठकर बातें करते है” विजय ने दरवाज़ा अंदर से बंद करते हुए कहा।
“बिल्कुल सही सोच भाई। हमने एक साथ कभी बात ही नहीं की है” विजय की बात सुनकर शीला जो बेड पर नाईट गाऊन में लेटी हुयी थी उठकर खुश होते हुए बोली।
नरेश सीधा जाकर शीला के साथ बेड पर बैठ गया । विजय भी जाकर बेड की दूसरी तरफ बैठ गया, कंचन अपने बाल सुखाने के बाद अपने भाई विजय के पास जाकर बैठ गयी और चारों आपस में बातें करने लगे ।बातें करते हुए विजय ने अचानक अपने हाथ को कंचन की जाँघ पर रख दिया ।
कंचन ने फ़ौरन विजय का हाथ पकड़कर दूर झटक दिया।
“अरे यार अब हम सब से कुछ छुपा तो नहीं है फिर हम एक दुसरे से क्यों शर्मा रहे हैं ।चलो खुलकर एन्जॉय करो” नरेश ने कंचन की तरफ देखते हुए अपना हाथ शीला की जाँघ पर रखकर उसकी जाँघ को सहलाते हुए कहा।
“नरेश सही कह रहा है दीदी अब हमें एक दुसरे से नहीं शरमाना चाहिये” विजय ने कंचन को कमर से पकडकर अपनी गोद में बिठाते हुए कहा।
“छोड़ो बदमाश तो आप दोनों इसीलिए यहाँ आये हो” कंचन ने अपने भाई की गोद से उठते हुए शीला के पास जाकर बैठते हुए कहा ।
“हाँ दीदी यह बेशर्म इसीलिए यहाँ आये हैं” शीला ने भी नरेश का हाथ अपनी जाँघ से हटाकर उसे धक्का देते हुए विजय की तरफ करते हुए कहा।
“यार हमने क्या गलत कहा है” विजय ने दोनों लड़कियों की तरफ हैंरानी से देखते हुए कहा।
“हाँ विजय सही कह रहा है । तुम दोनों ज़्यादा नखरे मत करो” नरेश ने भी विजय का साथ देते हुए कहा।
“वाह भाई उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” कंचन ने दोनों की बात सुनने के बाद उसकी तरफ देखते हुए कहा और शीला और कंचन ज़ोर से हंसने लगीं ।
“च तो आप दोनों ऐसे नहीं मानेंगी?” विजय ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।
“अरे भैया कुछ तो शर्म करो। शीला दीदी भी यहीं है” कंचन ने विजय का इरादा समझकर हैंरान होते हुए कहा।।
“विजय तुम सही कह रहे हो यह ऐसे नहीं मानेंगी” नरेश ने भी अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।
“दीदी लगता है दोनों पागल हो गये है” शीला ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
“हाँ हम पागल हो गये है” विजय ने कहा और अपनी पेण्ट को भी उतार दिया ।
नरेश ने भी अपनी पेण्ट को उतार दिया।
“देखो आप दोनों ऐसे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते अगर तुम दोनों से कुछ ज़बर्दस्ती करने की कोशिश की तो हम चिल्ला देंगी” कंचन ने दोनों लड़कों को देखकर उन्हें वॉर्निंग देते हुए कहा।
हाँ दीदी आप सही कह रही हैं हम चिल्ला देंगे” शीला ने भी कंचन का साथ देते हुए कहा।
“तो चिल्लाओ किसने रोका है” विजय ने आगे बढ़कर कंचन की नाइटी को पकडकर ज़ोर से खींचते हुए कहा। । कंचन की नाइटी बुहत पतली थी विजय के ज़ोर देने पर वह फटकर कंचन के जिस्म से अलग हो गई ।
“देखो भाई मैं सच कह रही हूँ । मैं चिल्ला दूंगी मुझे छोड दो” कंचन ने अपने हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को छुपाते हुए कहा । कंचन की नाइटी उतरने के बाद उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ उसकी ब्रा में ही आधी नंगी होकर विजय और नरेश के सामने आ गयी थी। जिन्हें वह अपने हाथों से ढकने की कोशिश कर रही थी।
“नरेश यह सिर्फ धमकियाँ दे रही हैं कुछ नहीं करेंगी। आप भी शीला दीदी की नाइटी को उतारो। साले ऐसे क्या मेरी दीदी के जिस्म को घूर रहे हो” विजय ने नरेश को चुपचाप खडे कंचन को घूरता हुआ देखकर उसे टोकते हुए कहा।
“हाँ भैया अभी उतारता हूँ” नरेश ने विजय की बात सुनकर अपनी नज़रों को कंचन के जिस्म से हटाते हुए कहा ।
“नही भैया मेरी नाइटी को मत फाड़ना। मेरे पास एक ही है” शीला ने नरेश को अपनी तरफ आता हुआ देखकर चिल्लाते हुए कहा।
“दीदी फिर क्या हुआ वैसे भी अब आपको हर रात नंगा ही सोना पडेगा” नरेश ने शीला की तरफ बढते हुए मुसकुराकर कहक़।
“भइया एक मिनट रुको।इसे मैं खुद उतार देती हूँ” अचानक शीला ने नरेश से कहा ।
“दीदी आप क्या कह रही हो” कंचन ने शीला की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
“दीदी हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है” शीला ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
“दीदी यह हुयी न बात आप कंचन से ज्यादा चालाक है” विजय ने शीला की तारीफ करते हुए कहा।
“विजय तुम्हें तो मैं देख लूंग़ी” कंचन ने विजय की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
“दीदी आप गुस्से में कितनी अच्छी लगती हो। मैं भी तो आपको देखने दिखाने आया हूँ” विजय ने अपनी बहन की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
“दीदी आप अपनी नाइटी जल्दी से उतार दो। यह दोनों बहन भाई आपस में ऐसे ही प्यार करते है” नरेश ने शीला को चुप खडा देखकर कहा । शीला नरेश की बात सुनकर अपनी नाइटी को उतारने लगी।
“नरेश शीला दीदी का जिस्म भी कुछ कम नहीं है इसे देखकर तो मेरा मन ख़राब हो रहा है” विजय ने शीला की नाइटी उतरने के बाद उसकी तरफ घूरते हुए कहा।
“थैंक्स यार पर मुझे तो कंचन दीदी का भरा हुआ जिस्म देखकर कुछ हो रहा है” नरेश ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
“चुप हो जाओ तुम दोनों क्या कह रहे हो” कंचन ने अचानक गुस्से से चिल्लाते हुए कहा।
“नरेश अभी तो दोनों को हमने पूरा नंगा नहीं देखा है। पूरा जिस्म देखने के बाद ही पता चलेगा की कौन ज्यादा ख़ूबसूरत है” विजय ने कंचन के चिल्लाने की कोई परवाह न करते हुए नरेश से कहा ।
“हाँ विजय तुमने सही कहा । चलो जल्दी से इनके कपडे उतारते है” नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा और दोनों अपनी बहनों की तरफ बेड की तरफ बढ़ने लगे।
“ठहरो तुम दोनों हमें थोडा टाइम दो” अचानक शीला ने चिल्लाते हुए कहा।
“हम्म्म्म शीला तुम बुहत चालाक हो । जल्दी से कंचन को समझाओ जब तक हम बेड पर लेटते हैं” विजय ने शीला की बात सुनकर कहा और नरेश के साथ बेड पर जाकर बैठ गया।
“कंचन दीदी यह दोनों वैसे भी मानने वाले नहीं हैं । हमें इनकी बात माननी होगी” शीला ने कंचन को समझाते हुए कहा ।
“दीदी यह गलत कर रहे है” कंचन ने गुस्सा करते हुए कहा।
“कंचन तुम कुछ ज्यादा ही नखरे दिखा रही हो । तुम भी तो मजा लेना चाहती थी। इसी तरह वह भी मजा लेने के लिए यह सब कर रहे है” शीला ने कंचन की बात सुनकर अपना मुँह बनाते हुए कहा।
“लेकिन दोनों के सामने मुझे नंगा होने में शर्म आ रही है” कंचन ने शीला की बात सुनकर कहा।
“दीदी वह दोनों हमारे भाई हैं और वैसे भी वह हमें आधा नंगा तो देख चुके हैं आओ अब शर्म छोड़ो” शीला ने कंचन का हाथ पकडते हुए बेड की तरफ ले जाते हुए कहा ।
“नरेश लगता है वह दोनों मान गई” विजय ने दोनों को बेड की तरफ आता हुआ देखकर खुश होते हुए कहा।
“शीला क्या हुआ तुम दोनों ने क्या फैसला किया?” नरेश ने दोनों के बेड के पास आते ही सवाल किया।
“हम दोनों राज़ी हैं मगर हमारी भी एक शर्त है जब तक हम नहीं कहेंगी आप दोनों हमें हाथ नहीं लगाओगे” कंचन ने इस बार बोलते हुए कहा।
“ये क्या शर्त हुई” विजय ने बीच में बोलते हुए कहा।
“हाँ हमें मंज़ूर है तुम दोनों जल्दी से नंगी हो जाओ” नरेश ने विजय की बात को काटते हुए कहा ।
“नरेश यह ज़रूर कोई चालाकी कर रही है” विजय ने फिर से नरेश से कहा।
“अरे यार इस में कौन सी चालाकी हो सकती है । तुम चुप हो जाओ” नरेश ने विजय को डाँटते हुए कहा । विजय को मजबूरन नरेश के सामने चुप होना पडा।
“शीला दीदी पहले आप अपने कपड़े उतारिये” कंचन ने शीला की तरफ देखते हुए कहा।
“दीदी आप मेरे ब्रा के हुक खोल दें” शीला ने कंचन की बात सुनकर अपनी पीठ को कंचन की तरफ करते हुए बोली । कंचन शीला की ब्रा को अपने हाथों से खोलने लगी, विजय की हालत शीला की तरफ देखते हुए खराब होती जा रही थी ।
कंचन ने ब्रा के हुक खोलकर शीला की ब्रा को उसके जिस्म से हटा दिया । शीला की ब्रा तो उतर गयी मगर उसकी पीठ बेड की तरफ होने की वजह से विजय को कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था।
“शीला अब सीधी हो जाओ। क्यों इतना नखरा कर रही हो” नरेश को कंचन का नंगा जिस्म देखने की जल्दी से जिस वजह से उसने शीला को टोकते हुए कहा।
शीला अपने भाई की बात सुनकर सीधा होने लगी । शीला सीधा तो हो गई मगर उसके हाथ उसकी चुचियों के सामने थे।
“शीला दीदी अपने हाथ तो हटाओ ना” विजय से रहा नहीं गया और उसने शीला को देखते हुए कह दिया,
“शीला दीदी अब हाथ हटाओ न देख नहीं रही हो साला की तुम्हें देखने के लिए मरा जा रहा है” नरेश ने अपनी बहन को देखते हुए कहा ।
“भइया मुझे बुहत शर्म आ रही है” शीला ने अपना सर नीचे करते हुए कहा।
“यार तुम अपनी आँखों को बंद कर लो फिर तुम्हें शर्म नहीं आएगी” नरेश ने अपनी बहन को सलाह देते हुए कहा।
“ठीक है भइया” शीला ने अपने भाई की बात मानते हुए अपनी आँखों को बंद करते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी चुचियों से हटाकर अपनी आँखों पर रख दिये ।
“क्या यार तेरी बहन की चुचियां तो बुहत मस्त है मेरा दिल तो इन्हें छुने का हो रहा है” विजय ने शीला की चुचियों के नंगा होते ही उत्तेजना के मारे शीला की तरफ देखते हुए कहा।
“साले तुम्हें किसने रोका है आ ज़रा नज़दीक से देख ले” नरेश ने अपनी बहन के बाज़ू को पकडते हुए उसे बेड पर बिठाते हुए कहा ।
शीला अपने बाज़ू को खींचने से लडख़ड़ाती हुयी बेड पर गिर गयी और उसके दोनों हाथ उसकी आँखों से हटी गये।
“नरेश भैया आप उसकी इजाज़त के बिना उसे नहीं छु सकते” कंचन ने अचानक चिल्लाते हुए कहा।
“सॉरी दीदी मगर जब तक आप दोनों पूरी नंगी नहीं हो जाती हमें अपने हाथों का इस्तेमाल तो करना पडेगा” कंचन की बात सुनकर विजय ने मुस्कराते हुए कहा ।कंचन अपने भाई की बात सुनकर चुप हो गयी,
“भइया आप बुहत बेशरम हो गये हो । अपनी बहन का नंगा जिस्म अपने दोस्त को दिखाते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती” शीला ने अपनी आँखें खोलकर नरेश को डाँटते हुए कहा ।
“शीला दीदी मैं कोई पराया थोडे हूँ जैसे यह तुम्हारा भाई है वेसे में भी हूँ” विजय ने शीला की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा।
“पता है मुझे तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो” शीला ने विजय को टोकते हुए कहा।
“अरे दीदी आप समझदार हो । हम जीतनी शर्म कम करेंगे उतना ज्यादा मजा ले पाएँगे” विजय ने शीला के बिलकुल नज़दीक आते हुए कहा ।
“क्या चाहते हो भैया। हमारी चुचियों को तो ऐसे घूर रहे हो जैसे खा ही जाओगे” शीला ने विजय को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा।
“मेरी तो चाहत कब से इन्हें खाने का है मगर मैं इन्हें छु नहीं सकता” विजय ने अपनी जीभ को निकालकर अपने होंठो पर फिराते हुए कहा।
“भइया आप तो बुहत बदमाश हो। कंचन दीदी की चुचियों से मन नहीं भरा क्या जो मेरे पीछे पड़े हो” शीला ने अपने हाथों से अपनी चुचियों को छूपाकर मुस्कराते हुए कहा।
“दीदी यह मरद होते ही ऐसे हैं इनका मन एक जगह नहीं भरता” कंचन ने उनदोनों की बाते सुनकर अपने भाई को टोकते हुए कहा ।
“कंचन दीदी आप लड़कियां भी कुछ कम नहीं हो। तुम्हारा मन तो हर किसी के लंड को लेने का होता है मगर डरती हो की कहीं किसी पता न लग जाए” विजय ने अपनी बहन को करारा जवाब देते हुए कहा।
“दीदी आप इसे छोड़ो और मुझसे बात करो। यह साला मेरी बहन को देखकर पागल हो गया है” इस बार नरेश ने बीच में बोलते हुए कहा।
“हाँ हाँ जाओ मुझे तो सिर्फ शीला दीदी से बात करनी है” विजय ने कंचन को चिढाते हुए कहा ।
“मुझे भी तुमसे बात करने का कोई शौक नहीं है नरेश भैया है न मुझसे बात करने के लिये” कंचन विजय की बात सुनकर जल उठी। इसीलिए उसने विजय को जलाने के लिए सीधा जाकर नरेश के पास बैठ गई।
“दीदी आप का जिस्म कितना गोरा और भरा हुआ है मुझे तो आप दुनिया की सब से अच्छी लड़की नज़र आती हो” नरेश ने कंचन को अपने पास बैठने से उसकी तारीफ करते हुए कहा।
“क्या कहा नरेश भैया। मैं आपको इतनी अच्छी लगती हू” कंचन ने नरेश की बात सुनकर खुश होने की एक्टिंग करते हुए कहा ।
“हाँ दीदी । मैं सच कह रहा हूँ क्या मैं आपकी चिकनी जाँघ को हाथ लगा सकता हूँ” नरेश ने कंचन की गोरी चिकनी जाँघ की तरफ देखते हुए कहा।
“हाँ भैया। आपको मैं कैसे रोक सकती हूँ ।आप मेरी इतनी तारीफ कर रहे हो । मैं आपके लिए इतना तो कर सकती हूँ” कंचन ने नरेश की बात सुनकर वैसे ही एक्टिंग करते हुए कहा।
नरेश को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था । उसने कंचन की बात सुनते ही अपना हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और वह कंचन की मोटी मखमली जाँघ को अपने हाथों से सहलाने लगा । शीला अपने भाई को कंचन के पीछे ऐसे लटू होते देखकर बुहत गुस्सा आ रहा था। मगर वह कुछ कर भी नहीं सकती थी ।
“शीला दीदी देखो वहां तुम्हारी सहेली को। तुम्हारे भैया का साथ दे रही है तुम क्यों इतना शर्मा रही हो” विजय ने जानबूझकर शीला को जलाते हुए कहा।
“भइया शायद आप सही कह रहे हो” शीला ने अपने हाथों को अपनी चुचियों से हटाते हुए कहा।
दीदी यह हुई न बात क्या मैं आपकी इन नरम नरम गोरी चुचियों को छु सकता हूँ” विजय ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए कहा।
“हाँ भैया क्यों नहीं आप मेरे लिए इतना मर रहे हो। क्या मैं आपका इतना भी ख्याल नहीं रख सकती” शीला ने विजय की बात सुनते ही मुस्कराते हुए कहा ।
“दीदी आप सच में बुहत अच्छी हो” विजय शीला की बात सुनकर खुश होते हुए बोला और अपने दोनों हाथों को आगे बढाते हुए शीला की दोनों गोरी चुचियों को पकड लिया।
“आहहह भैया आराम से आपका हाथ कितना सख्त है” शीला अपनी चुचियों पर विजय के हाथ पडते ही सिसकते हुए बोली।
“ओहहहहह दीदी आपकी चुचियां कितनी छोटी और नरम हैं आअह्ह्ह मेरा मन इन्हें चूमने का कर रहा है” विजय ने शीला की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए कहा । शीला की चुचियां छोटी होने के कारण विजय के हाथों में पूरी तरह समां रही थी ।
“आआह्ह्ह भैया आपकी हरक़तों से मुझे कुछ हो रहा है” शीला ने सिसकते हुए कहा।
“दीदी प्लीज एक बार चूमने दो न। आपको अगर बुरा लगा तो मैं फिर नहीं चूमूंगा” विजय ने शीला की चुचियों को वैसे ही अपने हाथों से मसलते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया आपको जैसे अच्छा लगे करो । मगर मुझसे बैठा नहीं जा रहा है” शीला ने वैसे ही सिसकते हुए कहा।
“ओहहहह दीदी आप मेरी गोद में आ जाओ ना” विजय ने अपने हाथों को शीला की चुचियों से हटाते हुए उसके सर को पकडकर अपनी गोद पर रखते हुए कहा ।
“आहहह भैया आप कितने अच्छे हो” शीला ने विजय की गोद में सर रखकर लेटते हुए कहा मगर अगले ही पल उसे वहां पर अपना सर रखकर जो गलती की थी उसका अहसास हो गया । शीला जहां पर अपना सर रखे हुए थी उसके नज़दीक ही विजय के अंडरवियर में उसका लंड पूरी तरह तनकर झटके खा रहा था।
विजय शीला को अपनी गोद में सुलाते ही नीचे झुककर उसकी एक चूचि को अपने हाथ से पकडकर अपने होंठो से चूम लिया और कुछ देर तक उसे चूमने के बाद अपना मूह खोलते हुए उसकी चूचि के दाने को अपने मूह में भरकर चूसने लगा।
“आहहह बदमाश क्या कर रहे हो तुमने सिर्फ चूमने को कहा था” शीला विजय के मुँह में अपनी चूचि के जाते ही सिसकते हुए बोली ।
“ओहहहह दीदी क्या करू आपकी चूचि का रस इतना मीठा है की मुझे उसे चूसने का मन कर रहा है” विजय ने शीला की चूचि को अपने मूह से निकालते हुए कहा।
“भइया आप झूठ बोल रहे हो । मेरी चुचियों में रस कहाँ है” शीला ने विजय की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।
दीदी सच कह रहा हूँ आपकी चुचियों में बुहत रस है जो बिल”दीदी यह हुई न बात क्या मैं आपकी इन नरम नरम गोरी चुचियों को छु सकता हूँ” विजय ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए कहा।
“हाँ भैया क्यों नहीं आप मेरे लिए इतना मर रहे हो। क्या मैं आपका इतना भी ख्याल नहीं रख सकती” शीला ने विजय की बात सुनते ही मुस्कराते हुए कहा ।
“दीदी आप सच में बुहत अच्छी हो” विजय शीला की बात सुनकर खुश होते हुए बोला और अपने दोनों हाथों को आगे बढाते हुए शीला की दोनों गोरी चुचियों को पकड लिया।
“आहहह भैया आराम से आपका हाथ कितना सख्त है” शीला अपनी चुचियों पर विजय के हाथ पडते ही सिसकते हुए बोली।
“ओहहहहह दीदी आपकी चुचियां कितनी छोटी और नरम हैं आअह्ह्ह मेरा मन इन्हें चूमने का कर रहा है” विजय ने शीला की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए कहा । शीला की चुचियां छोटी होने के कारण विजय के हाथों में पूरी तरह समां रही थी ।
“आआह्ह्ह भैया आपकी हरक़तों से मुझे कुछ हो रहा है” शीला ने सिसकते हुए कहा।
“दीदी प्लीज एक बार चूमने दो न। आपको अगर बुरा लगा तो मैं फिर नहीं चूमूंगा” विजय ने शीला की चुचियों को वैसे ही अपने हाथों से मसलते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया आपको जैसे अच्छा लगे करो । मगर मुझसे बैठा नहीं जा रहा है” शीला ने वैसे ही सिसकते हुए कहा।
“ओहहहह दीदी आप मेरी गोद में आ जाओ ना” विजय ने अपने हाथों को शीला की चुचियों से हटाते हुए उसके सर को पकडकर अपनी गोद पर रखते हुए कहा ।
“आहहह भैया आप कितने अच्छे हो” शीला ने विजय की गोद में सर रखकर लेटते हुए कहा मगर अगले ही पल उसे वहां पर अपना सर रखकर जो गलती की थी उसका अहसास हो गया । शीला जहां पर अपना सर रखे हुए थी उसके नज़दीक ही विजय के अंडरवियर में उसका लंड पूरी तरह तनकर झटके खा रहा था।
विजय शीला को अपनी गोद में सुलाते ही नीचे झुककर उसकी एक चूचि को अपने हाथ से पकडकर अपने होंठो से चूम लिया और कुछ देर तक उसे चूमने के बाद अपना मूह खोलते हुए उसकी चूचि के दाने को अपने मूह में भरकर चूसने लगा।
“आहहह बदमाश क्या कर रहे हो तुमने सिर्फ चूमने को कहा था” शीला विजय के मुँह में अपनी चूचि के जाते ही सिसकते हुए बोली ।
“ओहहहह दीदी क्या करू आपकी चूचि का रस इतना मीठा है की मुझे उसे चूसने का मन कर रहा है” विजय ने शीला की चूचि को अपने मूह से निकालते हुए कहा।
“भइया आप झूठ बोल रहे हो । मेरी चुचियों में रस कहाँ है” शीला ने विजय की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।कुल मीठा है” विजय ने शीला की आँखों में देखते हुए कहा।
“भइया आप भी न छोड़ो अब। आप जब इन्हें अपने मुँह में लेते हो मुझे अपने पूरे जिस्म में कुछ होने लगता है” शीला ने विजय की आँखों में देखते हुए कहा ।
“दीदी बस एक बार और इन्हें चूसने दो” विजय ने बच्चे की तरह ज़िद करते हुए कहा।
“भइया आप ऐसे नहीं मानेंगे अच्छा बस एक बार ही” शीला ने विजय के सामने हार मानते हुए कहा । विजय की आँखें शीला की बात सुनकर चमक उठी।
विजय ने शीला की चूचि को फिर से अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर से चूसने लगा । विजय इस बार कुछ देर तक शीला की चूचि के दाने को चाटने के बाद उसकी चूचि को पूरा अपने मुँह में भरकर चूसने लगा,
“ओहहहह भइया अब छोड़ो ना” शीला की हालत विजय से चूचि के चुसवाते हुए बुरी होती जा रही थी इसीलिए वह ज़ोर से सिसकते हुए कहा रही थी ।
विजय तो जैसे पागल ही हो चूका था। वह शीला की चूचि को ज़ोर से चूस रहा था । अचानक विजय ने शीला की चूचि को अपने मूह से निकाल दिया और उसकी दूसरी चूचि को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा।
“आहहह भैया ओह्ह्ह्हह” शीला की मुँह से ज़ोर से सिस्कियाँ निकल रही थी और उसने अपने हाथ को विजय के बालों में डाल दिया था जिन्हें वह सहला रही थी।
“दीदी देखो तो कैसे बेशर्मों की तरह दीदी की चुचियों को चूस रहा है” अचानक नरेश ने अपने हाथ से विजय और अपनी दीदी की तरफ इशारा करके कंचन को ज्यादा जलाने की कोशिश करते हुए कहा ।
“हाँ नरेश भैया यह तो सच में पागल हो गया है” कंचन ने गुस्सा होते हुए कहा।
“दीदी यह दोनों ऐसे मज़े ले रहे हैं और हम बस इन्हें देख रहें है” नरेश ने अपने हाथ से शीला की जाँघ को सहलाते हुए अपने हाथ को उसकी पेंटी तक ले जाते हुए कहा।
“क्या मतलब भइया” कंचन ने अचानक चौकते हुए नरेश के हाथ को अपने हाथ से पकडकर कहा।
“दीदी मेरा मतलब है क्या मैं आपकी चुचियों को भी नहीं देख सकता” नरेश ने कंचन की आँखों में देखते हुए कहा।
“भइया क्यों नहीं देख सकते। जब यह इतने बेशरम हो सकते हैं तो हम थोडी बुहत मस्ती तो कर सकते है” कंचन ने नरेश की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा ।
कंचन अपने भाई को शीला की चुचियों को चूसते हुए देखकर बुहत ज्यादा जल रही थी। जिस वजह से उसने नरेश को हाँ कह दिया।
“दीदी आप अपनी ब्रा को उतार दो ना” नरेश ने कंचन को विजय की तरफ घूरते हुए देखकर कहा।
“भइया आप ही खोल दो ना” कंचन ने नरेश की बात सुनकर अपनी पीठ को उसकी तरफ करते हुए कहा ।
“दीदी आप बुहत अच्छी हो अभी उतार देता हूँ” नरेश कंचन की बात सुनकर ख़ुशी से उछलता हुआ बोला ।नरेश ने अपने दोनों हाथ आगे बढाते हुए कंचन की ब्रा के हुक खोल दिए।
“दीदी मैंने पीछे से खोल दिया है” नरेश ने अपने हाथों को वापस नीचे करते हुए कहा । नरेश का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था उसका लंड कंचन की नंगी चुचियों को देखने के ख़याल से ही ज़ोर से उछल रहा था।
कंचन विजय की बात सुनकर सीधा होने लगी । कंचन अब सीधे नरेश के सामने बैठी थी मगर उसकी ब्रा अभी तक उसकी चुचियों में अटकी हुयी थी।
“दीदी अब तो ब्रा को हटा दो ना” नरेश ने कंचन को देखते हुए कहा । नरेश कंचन की नंगी चुचियों को देखने के लिए मरा जा रहा था ।
“भइया मुझे शर्म आ रही है आप खुद ही हटा दो” कंचन ने अपना सर झुकाते हुए कहा।
“दीदी आप भी न । मैं अभी हटाता हूँ” नरेश ने अपने हाथों को आगे बढाते हुए कंचन की चुचियों से उसकी ब्रा को खींचकर उसके जिस्म से अलग कर दिया।
कंचन ने जैसे ही देखा के नरेश अपने हाथ से उसकी ब्रा को उसकी चुचियों से हटाने वाला है उसने शर्म के मारे अपनी आँखों को बंद कर लिया।
“दीदी मैं बता नहीं सकता आपकी चुचियां कितनी ज्यादा सूंदर हैं” नरेश ने कंचन की बडी बड़ी गोरी चुचियों के नंगा होते ही अपने गले में थूक को गटकते हुए कहा । कंचन की चुचियों को देखकर नरेश का लंड उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा तनकर उसके अंडरवियर में झटके मार रहा था ।
दीदी आपने अपनी आँखें क्यों बंद कर ली हैं?” नरेश ने कंचन की आँखों को बंद देखकर उससे सवाल किया।
“भइया मुझे शर्म आ रही है” कंचन ने वैसे ही अपनी आँखों को बंद किये हुए कहा।
“अरे दीदी जितना ज्यादा शर्म करोगी उतना ही तुम्हारा नुकसान होगा” नरेश ने कंचन की बात सुनकर उसकी चुचियों को घूरते हुए कहा ।
“भइया आपको मेरी कितनी चिंता है” कंचन ने अचानक अपनी आँखों को धीरे धीरे खोलते हुए कहा।
“दीदी आपकी चुचियां कितनी बड़ी और सीधी हैं मुझे तो यह बुहत ज्यादा अच्छी लग रही है” नरेश ने कंचन की चुचियों की गौर से देखते हुए कहा।
“भइया आप भी न मेरी इतनी तारीफ मत करो। मुझे शर्म आ रही है” कंचन ने नरेश की बात सुनकर शर्म से अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा।
“अरे दीदी आप हो ही इतनी सूंदर तो आपकी तारीफ ही करूँगा ना” नरेश ने अपने हाथ को आगे करते हुए कंचन के सर को पकडकर ऊपर करते हुए कहा ।
“भइया आप बुहत अच्छे हो” कंचन ने नरेश की आँखों में देखते हुए कहा।
“दीदी देखो आपके होंठ कितने गुलाबी और सेक्सी है” नरेश ने अपनी ऊँगली को कंचन के होंठो पर रखकर फिराते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया क्या कर रहे हो मुझे गुदगुदी हो रही है” कंचन ने सिसकते हुए कहा । अपनी ऊँगली को कंचन के होंठो पर फेरते हुए नरेश के पूरे जिस्म में भी गुदगुदी और अजीब मज़े का अहसास हो रहा था।
“दीदी आप मेरी गोद में आ जाओ न मैं आपके जिस्म को क़रीब से देखना चाहता हू” नरेश ने कंचन के होठो से अपनी ऊँगली को हटाकर उसके काँधे पर फिराते हुए कहा ।
विजय और शीला अब चुपचाप कंचन और नरेश को देख रहे थे । शीला विजय की गोद में लेटी हुयी थी । और विजय उसकी चुचियों के दाने को अपनी उँगलियों से मसलते हुए अपनी बहन और नरेश को देख रहा था।
“भइया आपके हाथ से मुझे पूरे जिस्म में कुछ हो रहा है” कंचन ने नरेश की बात मानकर उसकी गोद में अपना सर रखकर लेटते हुए कहा ।
“दीदी आप चुपचाप लेट जाओ । थोड़ी ही देर में आपको मजा आने लगेंगा” नरेश ने कंचन को अपनी गोद पर सर रखकर सोते ही कहा । नरेश ने अपनी ऊँगली को कंचन के काँधे से नीचे ले जाते हुए उसकी बड़ी बड़ी चुचियों के उभारों के बीच तक आ गया । और अपनी ऊँगली को कंचन की चूचीयों के बीच में फिराने लगा।
“दीदी आपकी चुचियां कितनी नरम है” नरेश ने अपनी ऊँगली को वैसे ही कंचन की चुचियों के बीच फिराते हुए कहा।
“हाहहह भैया मुझे अपने जिस्म में कुछ हो रहा है” कंचन ने नरेश की ऊँगली को अपनी चुचियों के बीच महसूस करते ही सिसककर कहा ।
“आह्ह्ह्ह दीदी आपकी चुचियों का दाना तो कितना सख्त है” नरेश ने अचानक अपनी ऊँगली को कंचन की एक चूचि के दाने पर रखते हुए कहा और उसे अपनी दोनों उँगलियों के बीच लेकर दबाने लगा।
“ओहहहह आह भैया यह क्या कर रहे हो” कंचन ने अपनी चूचि के दाने को दबने से ज़ोर से सिसकते हुए कहा
“दीदी कहा न चुप हो जाओ और मजा लो” नरेश ने कंचन की एक चूचि के दाने को अपने हाथों से मसलने के बाद उसकी दूसरी चूचि के दाने को ज़ोर से दबाते हुए कहा ।
“उईई भैया आराम से दर्द हो रहा है” नरेश के हाथों से अपने चूचि का दाना ज़ोर से मसलने से कंचन ने हल्का चीखते हुए कहा।
“सॉरी दीदी में कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया था” नरेश ने कंचन से माफ़ी माँगते हुए कहा।
“कोइ बात नहीं भैया” कंचन ने नरेश की आँखों की तरफ घूरकर मुस्कुराते हुए कहा और अपनी एक आँख को बंद करते हुए नरेश को आँख मार दी।
नरेश जो पहले से बुहत ज्यादा उतेजित था। वह कंचन की इस अदा से बिलकुल पागल हो गया और उत्तेजना के मारे उसने कंचन के सर को अपने दोनों हाथों में लेते हुए नीचे झुककर अपने होठ अपनी बहन कंचन के गुलाबी होठो पर रख दिये ।
कंचन नरेश के अचानक हमले से पहले तो बौखला गयी मगर उसको ही पल वह मज़े के सागर में डुबकियाँ लगाने लगी और उसके हाथ अपने आप नरेश के बालों में जाकर उसके बालों को सहलाने लगे।
नरेश कंचन के दोनों गुलाबी होंठो को बारी बारी चूस रहा था उसे कंचन के मीठे होंठ शहद से ज्यादा मजा दे रहे थे । नरेश न जाने कितनी देर तक वैसे ही अपनी बहन के होंठो को चूसते रहा । अचानक उसकी और कंचन की साँसें फूलने लगी जिस वजह से मजबूरी में उसे अपने होंठ कंचन के होंठो से हटाने पडा, एक दुसरे के होंठो के अलग होते ही कंचन और नरेश बुहत ज़ोर से हाँफने लगे। दोनों हाँफते हुए बुहत ज़ोर से साँसें ले रहे थे ।
सांसों के दुरुस्त होते ही दोनों की नज़रें जैसे ही आपस में मिली कंचन ने शर्म से अपनी नज़रों को नरेश की नज़रों के सामने से फेर लिया । नरेश समझ गया की कंचन को भी आगे बढ़ना है मगर वह शरमा रही है।
“दीदी फिर से सॉरी। मगर आपके होंठो का रस शहद से ज्यादा मीठा था” नरेश ने कंचन के सर को पकडकर अपनी तरफ करके अपने होंठो पर जीभ को फिराते हुए कहा ।
“भइया आप बुहत बदमाश हो। मेरे होंठ में भला कोई चीनी थी जो वह आपको मीठे लगे” कंचन ने अपनी आँखों को ऊपर करते हुए नरेश की तरफ देखते हुए कहा। उसका भी उत्तेजना के मारे बुरा हाल था उसकी चूत से इतना पानी निकल चूका था की उसकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी ।
“दीदी कसम से आपके होंठ बुहत मीठे हैं। मेरा तो इन्हें छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था मगर” नरेश ने कंचन की बात सुनकर इतना ही कहा और चुप हो गया।
“भइया फिर आपने मेरे होंठो को क्यों छोड़ा?” कंचन ने नरेश की आँखों में देखते ही कहा।
कंचन की बात सुनकर नरेश की हालत और ज्यादा खराब हो गई और उसने अपने होंठो को फिर से कंचन के रसीले होंठो पर रख दिया और नरेश इस बार अपना पूरा मूह खोलकर कंचन के दोनों होंठो को चाट रहा था।चूस रहा था और कंचन भी उसका पूरा साथ दे रही थी।
कंचन बुहत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी टपक रहा था । अचानक कंचन ने अपनी जीभ को नरेश के मूह में डाल दिया। नरेश कंचन की जीभ को अपने मूह में महसूस करते ही उसे पागलोँ की तरह चाटने और चूसने लगा और अपने हाथों से उसकी दोनों चुचियों को बुहत ज़ोर से मसलने लगा।
नरेश और कंचन कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठो को बुरी तरह चूसने के बाद एक दुसरे के होंठो को आपस में से हटा दिए । नरेश ने इस बार कंचन के होंठो से अलग होते ही अपने होंठो से उसके गालों को चूमते हुए नीचे होते हुए उसके गले से होता हुआ कंचन की चुचियों तक आ गया और कुछ देर तक कंचन की चुचियों को ग़ौर से देखने के बाद अपना मूह खोलकर उसकी एक चूचि के दाने को अपने मूह में भर लिया ।
नरेश कंचन की चूचि को दाने को बुहत ज़ोर से चूस रहा था और अपने हाथ से उसकी दूसरी चूचि को दबा रहा था।
“आह्ह्ह्ह भैया आप तो बुहत गंदे हो” कंचन ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा। नरेश ने कंचन की बात सुनकर उसकी चूचि को अपने मूह से निकालकर उसकी दूसरी चूचि के दाने को अपने मूह में भर लिया और कुछ देर तक उसे चूसने के बाद अपने मुँह से निकालकर कंचन की दोनों चुचियों के उभारों को बारी बारी अपने दाँतों से काटने लगा ।
“आईई ईस भैया क्या कर रहे हो” कंचन ने अपनी चुचियों को काटने से ज़ोर से उछलकर चीखते हुए कहा ।नरेश कंचन के चिल्लाने से उसकी चुचियों को काटना छोडकर बारी बारी अपने मूह में जितना हो सकता था भरकर चूसने लगा।
“ओहहहह भैया आपने तो मुझे पागल बना दिया। मुझे नीचे कुछ हो रहा है” कंचन ने नरेश को बालों से पकडकर अपनी चुचियों से हटाते हुए कहा ।
“दीदी कहाँ पर?” नरेश ने अन्जान बनते हुए सवाल किया।
“भइया नीचे वहां” कंचन ने शरमाते हुए कहा।
“अरे वही तो पूछ रहा हूँ कहाँ पर” नरेश ने फिर से अन्जान बनते हुए कहा।
“भइया पेट के नीचे” कंचन ने अपना हाथ अपनी पेंटी पर रखते हुए कहा ।
दीदी क्या यहाँ पर दर्द हो रहा है” नरेश ने अपना हाथ कंचन की पेंटी के थोडा ऊपर रखते हुए कहा।
“नही भैया थोडा और नीचे” कंचन ने वैसे ही अपनी नज़रें झुकाये हुए कहा।
“यहाँ पर दीदी” नरेश ने अपना हाथ थोडा नीचे करके कंचन की पेंटी पर रखते हुए कहा ।
“हाहहहहह हाँ भैया यहाँ पर कुछ हो रहा है” कंचन ने नरेश का हाथ अपनी पेंटी पर पडते ही ज़ोर से सिसकते हुए बोली।
“दीदी यह तो बुहत गीली हो गई है । क्या मैं इसे उतारकर देखूँ की आपको यहाँ क्या होरहा है” नरेश ने उत्तेजना के मारे अपने गले से थूक को गटकते हुए कहा।
“भइया जैसे आपको सही लगे वैसे ही करो। बस मुझे सुकून मिलना चाहिये” कंचन ने नरेश को इजाज़त देते हुए कहा । नरेश का लंड कंचन की बात सुनकर उत्तेजना के मारे ज़ोर से ठुमके मारने लगा। नरेश कंचन की चूत को नंगा होने के ख़याल से ही बुहत उत्तेजित हो रहा था ।
“दीदी आप अपना सर इस तकिये पर रख दो । मैं आपकी पेंटी को खोलकर देखता हुँ” नरेश ने एक तकिया उठाकर कंचन के सर के पास रखते हुए कहा । कंचन ने अपना सर नरेश की गोद से उठाकर तकिये पर रख दिया।
नरेश की गोद से अपने सर को उठाते हुए कंचन की नज़र नरेश के अंडरवियर में बने उभार पर गयी जिसे देखकर कंचन को अपने पूरे जिस्म में एक झुरझुरी सी महसूस होने लगी । नरेश कंचन की टांगों के बीच आ गया था। वह कंचन की पेंटी में दोनों तरफ से अपनी उँगलियाँ फँसाकर उतारने लगा ।
कंचन ने अपने चूतडों को उठाकर अपनी पेंटी उतारने में नरेश की मदद की।
“वाह दीदी यह तो बुहत ख़ूबसूरत है” नरेश ने कंचन की चूत के नंगा होते ही उसकी तारीफ करते हुए कहा।
“भइया आप भी” कंचन ने इतना कहा और शर्म के मारे अपनी नज़रों को नीचे करते हुए अपनी टांगों को सिकोड़ने लगी । मगर अपनी टांगों के बीच नरेश के होने के सबब वह ऐसा नहीं कर सकी।
“दीदी सच कह रहा हूँ देखो यह कितनी गुलाबी है और बेचारी भूरे बाल इसे और ज्यादा ख़ूबसूरत बना रहे है” नरेश ने अपने हाथ को कंचन की चूत पर रखकर उसकी चूत के बालों को सहलाते हुए बोला।
“आहहह भैया” कंचन ने नरेश का हाथ अपनी चूत पर पडते ही सिसकते हुए कहा।
“क्या हुआ दीदी आपको अच्छा नहीं लग रहा है” नरेश ने अपने हाथ से वैसे ही कंचन की चूत को सहलाते हुए कहा।
“ओहहहहह भैया बुहत अच्छा महसूस हो रहा है” कंचन ने इस बार मज़े से अपनी आँखों को बंद करते हुए कहा । कंचन की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था ।
“दीदी इस में से तो कुछ निकल रहा है” नरेश ने अपने हाथ को कंचन की चूत के छेद पर रखते हुए कहा। जहाँ से पानी की बूँदे निकल रही थी।
“आह्ह्ह्ह भैया यहीं तो कुछ हो रहा है” कंचन ने अपने भाई का हाथ अपनी चूत के छेद पर लगने से काँपते हुए बोली।
“ओहहहह दीदी आपकी चूत की स्मेल कितनी अच्छी है” नरेश ने इस बार झुककर अपना मूह अपनी बहन की चूत के पास करके अपने नाक से साँसों को पीछे की तरफ खींचते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया मेरी हालत तो ज्यादा ख़राब हो रही है प्लीज कुछ करो ना” कंचन ने नरेश के मुँह से आती हुयी साँसों को अपनी चूत के इतना क़रीब महसूस करने से सिसकते हुए कहा ।
“दीदी क्या मैं इसे चूम सकता हूँ” नरेश ने अपने हाथ से कंचन की चूत के दाने को सहलाते हुए कहा।
“ओहहहह भैया मुझसे कुछ मत पूछो” कंचन ने नरेश की बात सुनकर सिसकते हुए कहा।
“ओहहहहह दीदी आप कितनी अच्छी हो” नरेश ने इतना कहा और अपना मूह नीचे करते हुए कंचन की चूत के छेद के पतले लबों को अपने होंठो से चूम लिया,
“आहहह शह भैया” नरेश के होंठ अपनी चूत के छेद पर लगते ही कंचन का पूरा जिस्म मज़े से सिहर उठा और उसने सिसकते हुए कहा।
“दीदी क्या हुआ आपको अच्छा नहीं लगा क्या?” नरेश ने कंचन की चूत को गौर से देखते हुए कहा।
“आहहह भैया मुझे बुहत अच्छा लगा था । वैसे ही करो ना” कंचन ने उत्तेजना के मारे अपने चूतडो को उछालते हुए कहा।
नरेश कंचन को गरम देखकर खुश होते हुए अपने होंठो को फिर से उसकी चूत के छेद पर रख दिया । नरेश इस बार अपने होंठो को कंचन की चूत के छेद पर रखे हुए ही उसके दाने को अपने हाथ से सहलाने लगा, कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । वह ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था ।
नरेश के होंठ कंचन की चूत से निकालते हुए पानी से भीग चुके थे । नरेश ने अपने होंठो को कंचन की चूत से थोडा अलग करते हुए अपनी जीभ को निकालकर उसकी चूत के छेद से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।
“ओहहहहह आहहह भैया” नरेश की जीभ को अपनी चूत पर लगते हुए कंचन उत्तेजना के मारे अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए सिसकने लगी । नरेश कुछ देर तक अपनी जीभ से कंचन की चूत को चाटने के बाद अपना मूह खोलकर उसकी चूत के पतले होंठो को पूरा अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।
नरेश की इस हरकत से कंचन का पूरा जिस्म अकडने लगा । वह मज़े की एक नयी दुनिया में पुहंच चुकी थी। नरेश कंचन की चूत के होठो को बुहत ज़ोर से चूस रहा था । अचानक नरेश ने कंचन की चूत को अपने मूह से निकालते हुए उसकी चूत के लबों को अपने दांतों के बीच लेकर हल्का हल्का काटने लगा।
“उई भैया आहहहह काट क्यों रहे हो ओह्ह्ह्हह्ह्” कंचन नरेश की इस हरकत से ज़ोर से चीख़ने लगी। मगर अगले ही पल वह सब कुछ भूलकर अपनी आँखें बंद करते मज़े की एक नयी दुनिया में खो गई । कंचन की चूत से बुहत सारा पानी निकलने लगा और वह झरने लगी, नरेश ने कंचन को झरता हुआ देखकर अपनी जीभ से उसकी चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा ।
कंचन झरते हुए बुहत ज़ोर से सिसक रही थी और उसने अपने दोनों हाथों से नरेश के सर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया था । कुछ देर बाद जब कंचन का झरना ख़तम हुआ तो उसने नरेश के सर से अपने हाथों को हटा दिया।
नरेश ने कंचन के हाथों के हटते ही अपना चेहरा ऊपर उठा दिया और कंचन की तरफ देखते हुए अपने होंठो पर लगे हुए उसके पानी को अपनी जीभ से चाटने लगा। नरेश का पूरा मूह कंचन की चूत के पानी से भीगा हुआ था, कंचन ने नरेश को अपनी तरफ घूरता हुआ देखकर शर्म से अपनी नज़रों को नीचे कर लिया ।
नरेश ने अपनी शर्ट उठाते हुए अपना मूह पोंछ दिया और कंचन के साइड में उसके साथ लेट गया । इधर इतनी देर से कंचन और नरेश का खेल देखकर शीला और विजय की हालत बुहत बिगड चुकी थी, वह एक दुसरे से अलग होकर बैठे थे विजय ने तो अपना अंडरवियर उतार दिया था और अपने हाथों से अपने लंड को सहला रहा था।
शीला भी अपनी चूत को पेंटी के ऊपर से सहला रही थी । विजय ने शीला के हाथ को पकडकर अपने लंड पर रख दिया, शीला भी बुहत गरम हो चुकी थी। अपना हाथ विजय के लंड पर पडते ही उसका हाथ अपने आप उस पर ऊपर नीचे होने लगा।
“आह्ह्ह्ह दीदी ज़रा इसे अपने मुँह में लो” शीला का नरम हाथ अपने लंड पर पडते ही विजय ने सिसकते हुए कहा ।
शीला विजय की बात सुनकर उसके नज़दीक आ गयी और नीचे झुकते हुए विजय के लंड के गुलाबी सुपाडे को चूम लिया।
“आह्ह्ह्ह साली मुँह में ले ना” विजय ने गरम होते हुए कहा । शीला ने इस बार अपनी जीभ निकाली और विजय के लंड के सुपाडे पर फिराने लगी ।
“ओहहहह साली क्यों तडपा रही हो” विजय ने शीला को बालों से पकडते हुए अपने लंड पर दबाते हुए कहा ।शीला ने फिर भी विजय के लंड को अपने मुँह में नहीं लिया और अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाटते हुए अपने हाथों से विजय की घंटे की तरह लटकती हुयी दोनों गोटियों को सहलाने लगी।
“ओहहहह साली तडपा क्यों रही हो। मुँह में ले ना” विजय ने सिसकते हुए कहा। शीला ने विजय की बात सुनकर अपना मुँह खोलते हुए उसके सुपाडे को अपने मूह में ले लीया और बुहत ज़ोर से चूसते हुए फिर से अपने मूह से निकाल दिया।
“आह्ह्ह्ह साली रंडी। इस अपने मुँह में लेती है या मैं ही कुछ करुं” विजय ने इस बार गुस्से से शीला की तरफ देखकर चिल्लाते हुए कहा ।
शीला ने इसबार विजय को धक्का देते हुए सीधा लिटा दिया और अपनी जीभ बाहर निकालकर विजय के लंड को ऊपर से नीचे तक चाटते हुए उसकी गोटयों की तरफ बढ़ने लगी । शीला विजय की गोटियों को अपनी जीभ से चाटते हुए उन्हें बारी बारी अपने मूह में लेकर चूसने लगी।
शीला की इस हरकत से विजय का पूरा जिस्म मज़े से काम्पने लगा और वह मज़े को बर्दाशत न करते हुए अपनी आँखों को बंद करके सिसकने लगा । शीला कुछ देर तक ऐसे ही उसकी गोटियों को चाटने के बाद अपने मुँह को खोलते हुए विजय के लंड को चूसने लगी ।
विजय कुछ देर तक शीला से लंड चुसवाने के बाद उसे बालों से पकडकर अपने ऊपर गिरा दिया और उसकी चुचियों को पागलो की तरह चाटने लाग, विजय ने शीला की चुचियों को चाटते हुए उसे सीधा बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया।
विजय शीला की चुचियों को कुछ देर तक चूसने के बाद नीचे होते हुए उसके पेट को चूमते हुए उसकी पेंटी तक आ गया और अपने हाथों से शीला की पेंटी को उसके जिस्म से अलग कर दिया । शीला की पेंटी के उतरते ही उसकी रस टपकाती चूत नंगी होकर विजय के सामने आ गयी जिसे वह बड़े गौर से देखने लगा ।
विजय ने एक नज़र शीला की रस टपकाती चूत पर डाली और अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये।
“आआह्ह्ह्ह भैया” विजय के होंठ अपनी चूत पर महसूस होते ही शीला के मुँह से एक सिसकी निकल गयी । विजय शीला की चूत को अपने होंठो से चूमने के बाद अपना मूह उसकी चूत से थोडा ऊपर कर दिया ।
विजय के होंठ अपनी छूट से ऊपर उठते ही शीला उत्तेजना के मारे अपने गाँड को उछालते हुए विजय की तरफ देखने लगी । विजय ने अपनी जीभ को निकाला और शीला की चूत के दाने से लेकर उसकी चूत के छेद तक फिराते हुए फिर से अपना मुँह उसकी चूत से थोडा ऊपर उठा दिया।
“आह्ह्ह्ह विजय भैया क़ीक़ कर रहे हो” शीला ने इस बार उत्तेजना के मारे सिसककर अपने चूतडो को उछालते हुए विजय से कहा।
“क्या हुआ दीदी?” विजय ने शीला को ज्यादा तडपाते हुए कहा।
“ओहहहहहह भैया अपना मूह क्यों हटाया” शीला ने वैसे ही उत्तेजना के मारे सिसकते हुए कहा ।
विजय ने शीला की बात सुनकर अपनी जीभ को फिर से शीला की चूत के छेद पर रख दिया और उसकी चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।
“आह्ह्ह्ह इसशहहहह भैया ऐसे ही ओह्ह्ह्हह्ह्” शीला विजय की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडो को उछाल रही थी।
विजय कुछ देर तक ऐसे ही शीला की चूत को चाटने के बाद अपना मुँह उसकी चूत से हटा दिया और शीला की टांगों को उसके घुटनों तक मोड़ दिया । शीला की चूत अब बिलकुल खुलकर विजय की आँखों के सामने आ गयी, विजय ने अपने फनफनाते हुए लंड को अपने हाथ से पकडते हुए शीला की चूत पर रख दिया और बुहत ज़ोर से उसकी चूत पर ऊपर से नीचे घीसने लगा ।
“आआह्ह्ह्हह ओहह भैया क्यों तडपा रहे हो” विजय के ऐसा करने से शीला ने सिसकते हुए कहा।
“दीदी फिर क्या करुं?” विजय ने शीला को तडपता हुआ देखकर उसकी चूत पर अपना लंड ज़ोर से घिसते हुए बोला।
कंचन और नरेश भी शीला और विजय की तरफ ही देख रहे थे। उन दोनों की हालत भी ख़राब होने लगी थी ।नरेश ने अपने अंडरवियर को उतारकर कंचन के हाथ को अपने खडे लंड पर रख दिया था, कंचन भी बुहत गरम हो चुकी थी अपना हाथ नरेश के गरम लंड पर पडते ही उसका हाथ अपने आप उसके लंड पर ऊपर नीचे होने लगा ।
“आह्ह्ह्ह भैया डालो ना” शीला ने वैसे ही सिसककर अपने चूतडों को उछालते हुए विजय से कहा।
“क्या डालों दीदी” विजय ने शीला की आँखों में देखते हुए कहा।
“भइया आप भी अपना लंड डालो ना” शीला ने अपनी नज़रों को विजय से हटाकर शरमाते हुए कहा।
शीला के मूह से लंड जैसे शब्द सुनकर विजय का पूरा शरीर सिहर उठा।
“ओहहहह दीदी मैं अपना लंड कहाँ डालुँ” विजय ने अपना लंड जानबूझकर शीला की चूत के छेद में थोडा फंसाते हुए कहा।
“ओहहहहह भैया अपना लंड मेरी चूत में डाल दो ना” शीला से अब बर्दाशत नहीं हो रहा था। जिस वजह से उसने सिसकते हुए विजय से कह दिया ।
“ओहहहह दीदी” विजय का लंड शीला के मुँह से यह सब सुनकर ज्यादा फूलकर मोटा और लम्बा हो गया था ।विजय ने शीला की टांगों को अपने हाथों से पकडते हुए एक धक्का मार दिया।
“ओहहहहह भैया आराम से आपका तो बुहत मोटा है” शीला ने हल्का चीखते हुए कहा । विजय का लंड एक ही धक्के में शीला की चूत में अपनी जगह बनाता हुआ आधा घुस चूका था ।
नरेश की हालत उस वक्त देखने जैसी थी । उसका लंड बुहत ज्यादा तनकर कंचन के हाथों में झटके खा रहा था । नरेश ने कंचन के सर को पकडते हुए अपने लंड पर झुका दिया, कंचन भी उस वक्त बुहत गरम थी। नरेश का लंड अपने मुँह के इतने क़रीब देखकर उसने अपनी जीभ निकाली और नरेश के लंड पर ऊपर से नीचे तक फिराने लगी।
कंचन ने कुछ देर तक नरेश के लंड पर अपनी जीभ फिराने के बाद अपना मुँह खोलते हुए नरेश का लंड अपने मूह में जितना हो सकता था ले लीया और उसे अपने होंठो और जीभ से चूसने लगी । अपना लंड कंचन के मूह में जाते ही नरेश मज़े से सिसकते हुए एक नयी दुनिया में पुहंच गया, नरेश का लंड चूसते हुए भी कंचन अपने भाई और शीला की तरफ देख रही थी ।
विजय शीला के मूह से चीख़ सुनकर अपने लंड को थोडा बाहर खींचा और बुहत ज़ोर के ३-४ धक्के मारकर अपना पूरा लंड शीला की चूत में घुसा दिया।
“उईई ओह्ह्ह्हह्हह भैया मेरी चूत आअह्ह्ह फट गई” विजय का पूरा लंड घुसते ही शीला के मूह से ज़ोर की चीख़ें निकलने लगी ।
“दीदी क्या हुआ अभी तो कह रही थी अपना लंड मेरी चूत में घुसाओ” विजय ने वैसे ही अपना पूरा लंड शीला की चूत में घुसाए हुए हँसकर कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया आप बुहत गंदे हो” शीला ने सुबकते हुए कहा।
“दीदी आप चिंता मत करो थोडी ही देर में आप मेरे लंड को उछल उछल कर अपनी चूत में लोगी” विजय ने शीला की बात सुनकर अपना लंड उसकी चूत से बाहर खीचकर फिर से जड़ तक पेलते हुए कहा।
“ओहहहह भैया आपका बुहत मोटा है मुझे तो लग रहा है यह मेरी चूत को फाडकर ही दम लेगा” शीला ने विजय का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर होने के कारण फिर से चील्लाते हुए कहा ।
“दीदी मेरा लंड आपकी चूत में पूरा तो घुस चूका है” विजय ने शीला की बात सुनकर अपने लंड को फिर से बाहर खीचते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया पूरा तो घुस चूका है मगर इसने मेरी चूत को बुहत बुरी तरह फ़ैला रखा है” शीला ने विजय का लंड अपनी चूत से बाहर होते ही आह भरते हुए कहा।
विजय शीला की बात सुनकर फिर से अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसा दिया। मगर इस बार विजय ने फिर से अपने लंड को बाहर खीँच लिया । और ऐसे ही वह तेज़ी के साथ अपना लंड शीला की चूत में अंदर बाहर करने लगा।
“आह्ह्ह्ह इशह भैया आपने सही कहा था ओहहहह प्लीज ऐसे ही तेज़ी से चोदो मुझे” विजय का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर होने से शीला ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । विजय का लंड अब शीला की चूत में अपनी जगह बना चूका था। इसीलिए शीला को अब विजय से चुदवाते हुए बुहत ज्यादा मजा आ रहा था ।
कंचन ने अब नरेश के लंड को अपने मुँह से निकाल दिया था और वह नरेश के साथ लेटकर शीला और अपने भाई की तरफ गौर से देखते हुए नरेश के लंड को सहला रही थी । नरेश भी अपने हाथ से कंचन की चूत को सहला रहा था और अपने मूह से उसकी चुचियों को चूमते चाटते हुए अपनी बहन और विजय को घूर रहा था ।
विजय अब अपने लंड को बुहत ज़ोर से शीला की चूत में अंदर बाहर कर रहा था और शीला ने भी अपनी टांगों को विजय की कमर में डाल दिया था और विजय के हर धक्के के साथ अपने चूतडों को उछालते हुए विजय से ताल से ताल मिला रही थी ।
विजय और शीला दोनों का जिस्म पूरी तरह पसीने से भीग चूका था । शीला झरने के बिलकुल क़रीब थी इसी लिए वह अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछालते हुए विजय का लंड अपनी चूत में ले रही थी।
“यआह्ह्ह्ह ईश भैया ज़ोर से पेलो। फाड दो अपनी बहन की चु ओह्ह्ह्हह ऐसे ही में झड रही हू” शीला का जिस्म कुछ ही देर में अकडने लगा और वह बुहत ज़ोर से बड़बड़ाते हुए झरने लगी।
शीला कुछ देर तक अपनी आँखें बंद किये हुए झडती रही और पूरी तरह झरने के बाद अपनी आँखें खोल दी। विजय अब भी शीला को वैसे ही चोद रहा था और शीला की टाँगें विजय की कमर में फँसी हुयी थी।
“दीदी मजा आया” विजय ने शीला की आँखें खुलते ही उसे देखते हुए कहा ।
“भइया बुहत ज्यादा” शीला ने शर्म से अपनी नज़रों को नीचे करते हुए कहा । विजय ने अपना लंड शीला की चूत से खीचकर बाहर निकाल दिया और शीला को उल्टा लिटा दिया। विजय ने ३-४ ज़ोर के धक्के मारते हुए पीछे से अपना लंड शीला की चूत में जड़ तक पेल दिया।
विजय शीला के चूतडो को पकडकर उसे बुहत ज़ोर से पेलने लगा । कंचन और नरेश वैसे ही लेते हुए उन दोनों की तरफ देख रहे थे।
“आजहहह भैया आप क्यों चुप बैठे हैं। कंचन दीदी को चोदीये ना” शीला ने विजय से चुदवाते हुए नरेश की तरफ देखते हुए कहा ।
नरेश अपनी बहन की बात सुनकर कंचन की तरफ देखने लगा । कंचन बिना कुछ कहे नरेश के साइड से उठते हुए अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर अपनी चूत को नरेश के लंड पर टीका दिया और अपने भाई की तरफ देखते हुए नरेश के लंड पर अपने वजन के साथ बैठने लगी।
कंचन जानबूझकर नरेश के लंड पर उल्टा होकर बैठी थी उसकी पीठ नरेश की तरफ थी और मूह विजय और शीला की तरफ।
“आह्ह्ह्ह नरेश भैया आपका लंड कितना सख्त है” नरेश का लंड अपनी चूत में जड़ तक घुसते ही कंचन ज़ोर से सिसकते हुए बोल रही थी ।