विधवा मां और बेटा Chapter 5
जैसे के आपके पिचले अपडेट में देखा के मामले द्वारका से आने के बाद अपने बेटे नमन के साथ थोड़ा और खुल गई थी अपने बदन की छेदखानी नमन से करने के बुरे उसे मोटे तगड़े लुंड का यह सब करने के लिए हमें टाइम मुथ मार्के पानी गिराया था और नाह कर रात गौं पहन कर दोपहर की रसोई बनाने में लगी थी और उधार नमन 12 बजने को आए थे और नंद पूरी कर के बिस्तर पे लेटा था और उसकी विधवा मां के बदन को मसाला में मसाला समय उसे याद कर के लोडा सहला रहा था और उसे उसकी मां की गंद चौड़ी गद्रायी थी जिस्का वो दीवाना था उसे याद कर कर के लुंड को हिला रहा था और तबी रसोई में से आवाज आती वह उसकी जो थी और प्लेटफॉर्म आखिरी काम निता रही थी गर्मी की वजह से उसे अपने गांव को आला से ऊपर उठा के कमर पे बंध था और साथ ही अंदर कहने पेटीकोट को भी जो की उसकी जांघो को दिखा रहा था इतना से उस में कोई भूत नहीं था जगने के लिए आवाज दिया
बिंदु – नमन ओ नमन बेटा उठ जा मुझे पता वह 2 दिन से घुमने की वजह से थकन के मारे सो रहा वह लेकिन खाना खा ले और फिर तो जाना बेटा देख आलू की सब्जी बनायी हु तेरे लिए चल आजा….
नमन – अपनी विधवा मां की आवाज सुन के अपने ख्यालो से बहार आटा वह जो की वो कल उसकी विधवा मां की गदराए भारी बदन को मसाला रहा आठ और उसकी मां को उसे दिलई लेगिंग्स मुझे चुतड उसे मसाला को को जोर से मसाला रहा था लेकिन उसने जैसी ही उसकी मां की आवाज सुनी वो बोला में आ रहा हूं बस उठ ही गया हूं इसे ही पाडा था और वो लोड को मसाला बंद कर के खड़ा होता है और वह मारा होता है। जाने लगता है पर उसका लोडा अभी भी आधा खड़ा था जोकी उसे पहनना रात के कपड़ो में बिना चड्डी के बड़ा तंबू बना रहा अथा मानो बाहर आना चाहता हो वो बहार जाने लगता है वह ठुक सामने किचन था और उसके बगल में बाथरूम था और उसके बगल में किचन में उसकी मां पे तो उसका लोडा 1 सेकेंड में लोहे के खंभे जीता हो गया क्यो की वहा बिंदु गद्रेई विधवा घोड़ी जुक के प्लेटफॉर्म के आला से कुछ बार्टन निकल रही थी और उसके मनसल गदरये चुत व जाने न फेल यह विफल रहा के सामने आ चुके थे और उसके चुत द इतने फेल के उठ गए थे की मनो नमन के लुंड को सलामी दे रहे हो और नमन का खंभा भी उसकी विधवा गद्रेयी मां के चौदे चुतद को देख के हमी भर रहा था गंद और लुंड दोनो आप में वायरलेस बना रहा द और बिंदु साली पूरी कुक के एक हाथ की कोनी को अपने घुटनो पे टेक के और दसरे हाथ से कुछ निकल रही थी प्लेटफॉर्म से और पेटीकोट और गांव इतना ऊपर उठ चुका था की उसकी पिच से जुकने की उसे रहा था आला से चिकन मनसक गद्रेई जंघे पासिन से तर हो चुकी थी गरमी की वजह से किचन के गैस की। याह तक की बिंदू पुरी पासिन से तार हो चुकी थी और थोड़ी देर ऐसे ही रहने की वजह से उसका अपना ही थुल थुला गद्रया मंसल पालतू अपनी परी मंसल गदराई जांघो से उसे उह उह्ह्ह आआह विध्वा घोड़ी तेरा पेट कर के आहे भर रही थी और आला से कुछ निकल रही थी पूरी पासिन से तार थी और बिंदास थी उसे पता नहीं था उसका बेटा अपनी विधवा मां के फेल हो गया कुछ चुराद पिच कर के धीरे-धीरे अपनी मां के पास आ रहा था
ऐसे नमन अपना चिपकने वाला विधवा घोड़ी गदरी मां के पास जटा वह अब तो वो दोनो थोडे ज्यादा खुल चुके थे तो नमन ने अपनी विध में पास खड़े होके सिद्ध अपना एक हाथ उसे सही चुतड पे रखा और बोला
नमन – मेरी प्यारी विधवा घोड़ी क्या कर रही है वह आ गया ट्यून बुलाया मुझे चलो मां खाना खाते हैं वह बहुत भुख लगी वह चल ऐसा कह के छूतड़ो पे दोनो हाथ घुमने लगता है और बारी बारी दोनो चुतद वह और लगता है के बिच रख के याकिन कर्ता ही उसकी माँ ने पैंटी तो नहीं पहिनी ना……..
बिंदु – अपने बेटे के हाथ का स्पर्श अपने आगे बढ़ने पर वह और अपना काम जारी रखता है और कहता है ….उठ गया मेरा राजा बहुत निंद मारी मुझे पता वह बस में मेरे लिए खराब है साड़ी जगा रोक ली द बेटा उसके लिए माफ़ी मांगती हु वेसे भी तूने बहुत सी मेरी बस में कास के मेरे बदन की मलिश कर के दबया अभी भी दबा रहा वह क्या… ये बिंदु ने नमन को पता चला हम मुझे पता ही की धुन बस में मेरे इतने जाने के बाद मेरी गंद की दरर में लेगिंग के ऊपर से बहुत रागद करी थी और दोनो चुतडो को बेरेहमी से मसाला था पूरी यात्रा में सोया बिना मां के कम से कम खराब गदरे को देखा था कास के के….
बिंदु – अभी भी मन नहीं भरा क्या तेरा जो आज भी उठी सेवा में लग गया बेटा थोड़ा और जुकी तकी पिचे से रात और ऊपर उठ जाए
नमन – आर माँ अब क्या अबु मुझे तू इतनी अच्छी लगती है मेरा इतना ख्याल रखती है वह मुझसे सेवा करुंगा ही ना बोल और क्या सेवा करू ऐसा कह के दोनो छुटड मसाला हुए बोला तू कह तो मलिश कर दू कल मस्त लेगिंग्स लग रही थी एक दम वो वाली…..
बिंदु – क्या वो वाली मेरे बेटे? कैसी लग रही थी बता अच्छी तो नहीं लगती थी वो मुझे पाट वह घोड़ी गताई जो हु फेली हुई ओ सब बुरी नजर से देख रहे थे.. तू वो छोड तुझे केसी लग रही थी वो बता… किसका रखू एक तू ही तो मेरे जीना का सहारा है विधवा घोड़ी का और कोई वह भी तो नहीं है दुनिया में बेटा.. ऐसा खा के छूत को नमन की और दबये प्रति पिचे कर के तकी नमन उसकी गदराए भी चुतड और। .
नमन – कुछ नहीं कोई वो मां आप वो वाली का मतलब वह आप एक दम पटाखा लग रही थी मां… हैं मां कितनी बार बोला वह घर में इतने कपडे क्यो पहंती वह आपको गर्मी सहं अन्हि होती वह ना तो सिरफ पेटीकोट और ब्लाउज मैं रहा करो ना आपको तो बोला ही वह ना मेरे अलावा कोई वह भी तो नहीं घर पे तो फिर भी क्या आपको आपको गर्मी में सेक रही हो देखी पिचवाड़ा जंघे सब तर हो चुका है क्या नहीं चुकी हो और इतना जुकी क्या राही हु कमर दुख जाएगी वेसे भी आप भारी हो आपको जुका नहीं जाता काम नहीं होता है तो क्या इतना जुकी हो खादी हो जाओ ना … ऐसा घोड़ी क्यो बनी हो कब से ऐसा कहते हैं भी नमन उसे गदराई गांदराहा को कितनी बार बोला ही आप अब मेरे बाप के साथ नहीं मेरे साथ रह रही हो आप अपने आपको आरामदायक रखो मां आप जिसे चाहो वे से रहो को देखेंगे हमारा घर कोई आता जाता नहीं और पुरा घर पैक ही पता भी आप….
बिंदु – आर बीटा पर मैं अभी नहीं के बाद में मोहल्ले के नके पे दूध लेने गई थी ये लिए ये रात और अंदर पेटीकोट पाना था बीटा चल दूर टोपी खादी होने दे और जा मुह हाथ धोके ब्रश कर के आ तेरे लाये खाना था
नमन – जोर से चपत मारबिंदू के छुटडो पे मार के चला जाता वह ताजा होने टैब तक बिंदू आला थाली लगा के तयर रखती वह और कहता है बेटा नमन जल्दी आना मुझे भी भुख लगी वह जल्दी खाना खाते वह ……
जैसे की आप पिचले अपडेट में पढ़ा की बिंदू खाना लगाना है और नमन बाथरूम से ब्रश कर के हग के वापिस आ ही तो उसकी मां ने खाना लगा दिया था और वो वापस आके मां के सामने बेथ जाता है और दोनो, आ बे बिजी द और टैब ही नमन ने बिंदु से कह
नमन – क्यो माँ कैसा लगा द्वारका घूम के मेरे साथ?
बिंदु – अरे बेटा क्या बतूउ ट्यून मेरे मन की मुराद पूरी कर दी में कभी हमारे शहर से बहार नहीं गई तू तेरी है विधवा मां बस में सुला के लेके गया मेरे लाल तेरे बाप ने मुझे कहीं नहीं घुमाया ट्यून है विधवा बेटा हमें के को लिए बहुत खुश हूं बेटा में
नमन – अरे मां मेरे बाप को याद मत करो अच्छा हुआ वो मर गया जो आपको अपनी नहीं मानता था आपको जरूर था उसे याद कर के आप अपना आज मत खारब करो अब आप मेरे साथ जियो आपको अपनी बाकी की जिंदगी में से खुशी दूंगा आप जहां कहोगी वहा घुमूंगा मेने सोचा वह हम मेरे बाप की अस्थिया विसर्जन करेंगे हरिद्वार जाएंगे वहा से आपको मस्त ठंडी पहाड़ी पर जहां आपको गर्मियो के मस्त छुटकारा मिलेगा और आपको फिर से एक समय मिलेगा के लिए खड़े होंगे मां क्योकी तेरे इस भारी बदन को मेरे पिचे बाइक पे बेथने में तकलीफ होती वह ना तो कार की सीट पे तेरी चौड़ा गद्रया पिचवाड़ा आराम से आएगा फिर तू और मैं घुमने जाएंगे तुझे बहुत अच्छा घुमूंगा मेरे चालू रखा…
बिंदु – हे भगवान केसा बेटा दिया वह धुन है घोड़ी विधवा से कितना प्यार करता है भगवान तेरा लाख लाख शुक्रा ही जो घोड़ी विधवा को चाहने वाला रखने वाला एक लड़का दिया ये कह के बिंदु नमन से कहती है कि वह है सच में घुमाएगा मेरे लाल मगर मेरा बेटा मेरे पास घुमने के लिए वह नहीं कार लेने के लिए बेटा कहा से लेगा तू कार तूने बताया था की तुझे स्कॉलरशिप मिली वह उस में से ना?
नमन – आर हा मां तू सही समजी हो मुझे छात्रवृत्ति 5 लाख मील वह अब कॉलेज खतम होगी तब मुझे नोकरी भी मिल जाएगी मां अब हमारी गरीबा दूर होगी मां तुझे मस्त कपडे दिलाउंगा घुमूंगा और मैं तुझे सुखा हर यह कह के नमन हसन लगा और खाने लगा
बिंदु – केसी किस्मत मिली वह मुझे विधवा होने के बाद क्या सुख आया वह मेरे जीवन में बेटे आखिर तू ही सहारा ही मेरा जिन का ये तेरा अपना विध्वा मां को रखने का आशीर्वाद वह बेटा तू तेरी घोड़ी घोड़ी गद्रे रखता वह हमें लिए तुझे भगवान ने इतना ज्यादा पेसा दिया मेरे लाल.. लोग सही कहते हैं जो मां को खुश रहते हैं वो संतान कभी दुखी नहीं होता बेटा.. ये बात तू सच कर दी मेरे..
नमन – हा मां जो होता वह अच्छे हुआ तुम विधवा हो गई अब तेरे और मेरे जीवन में सुख आया वह बहुत गरीब भोगी वह मां तू अब देख तेरा बेटा तुझे मस्त मजा करेगा मां…
बिंदु – उसकी आंखो में खुशी के आ गए थे और वो कह रही थी बेटा अगर ये तू ना भी करता घुमाता नहीं फिर भी में तेरे से खुश ही हु क्योकी मेरे लिए दुनिया में तू ही वह तेरे लिए ही तो जी रहा तुझको ही मानता हूं बेटा तेरी बूढ़ी विधवा गढ़रायि घोड़ी को तू प्यार से रखता है वो ही सबसे बड़ी बात वह तुझे बहुत बहुत आशीर्वाद देता है। .
नमन – आर मां अब रो मत चलो अब निंद बहुत आ रही है वह मुझे 1 घंटा सो जाटा हू तू सोच के रख पापा की अस्तिया विसर्जन करने कब हरिद्वार जाना वह अब तो कोरोना के मामले भी कफी कम हो गए वह मुझे प्रशिक्षित करेंगे निकले लगे भी टिकट मिलना मुश्किल ही जल्दी सोच के रख में टिकट बुक कर दूंगा फिर दोनो चलेंगे मस्त घुमने मेरी मां तब तक मैं सो लेटा हूं तू सोच के रख और नमन वह से उठा के चला जाता है कामरे में उस बिस्तर पे सोने
बिंदु – इधर आने वाली खुशी के नंगे में सोच ने बिंदू बहुत खुश थी क्योंकि उसे गंगा में नहने का बहुत मन था ऊपर से ट्रेन में जाना था इतनी दूर तो सब उसके लिए जीवन में पहली बार था उसके लिए वह और बहुत बहुत राही थी बरतन धो रही थी और सोच रही थी हाय विध्वा अब नसीब खुले तेरे और अब वो सोच में पैड गई की कब जाए अपने पति की अस्थिया विसर्जन करने क्योकी पति घोड़ी 1 माहिना हो गया था वो इतनी भी चली जाये तो आदमी ही मन खुश होके उसे पैकिंग का समय रहा उसके कारण से अगले हफ्ते में यानि की 3 दिन खराब सोमवार था तब जाने को सोचा तकी तयारी हो जाने की कुछ खड़ीरी हो जाए तो वो सोचने के लागी बहार मस्त होके…मन हाय मन सोच रही थी की लोग क्या सोचेंगे बहार उसका मस्त गदराय बदन देख के और तबी उसे नमन ने चुतडो को मसाला था वो याद आ गई तो सोची की हाय कितना पागल ही वो मेरे इस गडरे ले छुटडो बहुत दबाता है लेकिन अपनी मां पर गंदी नजर नहीं डालता मेरा एल अदला में ही गलत सोच रही हूं उसके लिए चुतड मसाला की ऋत ने मुझे गरम कर दिया केसे अपनी विधवा मां के चुटडो को पागलो की तरह मसाला रहा था में यह सोच सोच के बिंदु की वह और पनिया जवान बेटे साथ अकेले दूर इतनी जाएगी फिरगी घुमेगी रहेगी क्या सोचेगी वो सोच के कब बरतन धूल गए पता भी नहीं चला…
बिंदु तो यही सोच रही थी की नमन केसे अच्छे से उसका ख्याल रखता वह अपनी विधवा घोड़ी मां का जो की उसके पति ने कभी पसंद ही नहीं किया उसके गदरराय बदसूरत बदन की वजाह से उस को नमन इतना और इतना नहं चाहता था द कड़क डंडा अपने गंद पे महसूस हुआ था तब से वो नमन के प्रति कुछ अलग ही अक्षरित हो रही थी हलकी उसने लोडे को नंगा नहीं देखा था लेकिन चिपकने वाला उमरा की थी तो अपने बदन से प्रभाविता जनता था तो बहुत वह और वो भी पनिया गई थी याही सोच रही थी की बस में केसे लोगों कास के मुझे प्यार कर रहा था तो वो हरिद्वार ले जाएगा तो न जाने क्या करेगा हलकी लेगिंग्स नमन के कहने पर उसमें उसे बहुत मन समा रहे थे ऊपर कुर्ते में उसका बड़ा बड़ा से एक चुचा भी बाहर आने को हो गया था और सांवली मोती गद्रई भाई बन के अपने जवान बेटे के साथ वो फिर से ऐसे ही हरिद्वार जाएंगे वो यही सोच रहा था नहीं कर्ता था अपने ये लोग मां के साथ वो सोच के नमन के बहुत बहुत ही मस्त है तो बड़ी गंदी हवासी नजरों से देखते हैं उसके सामने गंदे इसे और भी लोग क्या करेंगे, हम क्या करेंगे, हम क्या करेंगे कर सकता था खुद का जवान बेटा वह उसी के लिए ही तो जीती थी वो ही सहारा था जिन का और बिंदु के भी कुछ शॉक द कि अच्छे कपड़े पहनने की लेगिंग्स वगेरा लेकिन पति ही खराब था तो अब पति की मौत के बाद रहने में उसे मजा भी आ रहा था… ये सोचते सोचते घर की साफ सफाई कर रही थी 3 दिन से नहीं कर रही थी इसके लिए शाम के 5 बज चुके अब नमन भी उठने वाला था वो नमन को टिकट बुक कर लिए कहने वाली थी अब वो पेटीकोट और ब्लाउज में ही थी जिसमे वो काम वली बाई कोठे की रंडी जैसी छिन्नल घोड़ी लग रही थी उसे भी मालिम था लेकिन गरमी सहं नहीं कर पति थी और बेटे ने उसे आजादी दे दी थी साड़ी से घर में तो अब वो आदमी में आए ऐसे पुराने पटल से कपड़ों में था ऐसे … जिसमे आपको औराजा लगे की केसे स्तन दिख रहे हैं और गंड केसी दिख रही थी और आप कल्पना कर सकते हैं उसके लिए पिक्स दले वह (सारे तस्वीरें नेट से धुंढे वह मेहंदी कर के निवेदन वह अच्छे से देखे और पाए और लाइक करे याहा गन और बूब्स दोनो के औरजे के लिए अलग तस्वीरें वह)
(ये तस्वीर केवल औरजे के लिए वह सच में बीनू के घुना कामुक और गद्रेई घोड़ी लगती वह कोठे की रंडी जैसी वो जब पेटीकोट बंधती वह तो नाडा उसका अपने मंसल गदरये और लटके हुए पेट के साइड मा बंधती है वो जिससे जब भी अंदर चड्डी पहनी होती है तो वो दिख जाती है और अगर पेटीकोट का मुह सिद्ध नाभी के निचे रख दे ओ उसे जंगल उगी हुई जनता दार चुट का दर्द और उसे ऊपर बना वो देखता है तो वह बांध देता है नहीं बंधती थी और उसका ठुलथुला गहरी नाभि वाला चीज किसी छुट के चीर जितना गहरा लगता था मानो किसी की चुत ही हो पूरी उनगली घुसा के रोज बिंदु उसमे से मेल निकलती थी…)
अब नमन उठा था वो आया वह बहार देखता वह उसकी विधवा घोड़ी मां बहार केवल पेटीकोट और ब्लाउज में ही थी और बिलकुल नंगी थी और वो और पासिन से सनी होने किवाजह से हुआ पर होके और पेटीकोट हर उसका आरा मटक रहा आहे वो दिख रहा है और बिंदू बिंदास होके मटका मटका के गांद हिला हिला के कभी यह कभी वहा घोड़ी बन बन के काम में लगी थी बिना परवाह किए जवान बेटे की ये तो नमन ही था अपना हवा को कभी होता है कबका बलातकर गुजर देता बिंदु घोड़ी पे….नमन उठ के आके बोलता हे
नमन – वाह मेरी घोड़ी कितना कम करेगी ठक जाएगी मेरी प्यारी मां
बिंदु – (नमन की तरफ देख के बोलती वह एक गंदी मुस्कान देके और अपने पेटीकोट को पक्का अपने पासे वाले गिले हाथ को पोच लेति वह पेटीकोट को पकाने से वो बदन को और तंग कर लेटा वह जिसे उसे साफ गद्रायी जाति ही और बूब्स तो ब्लाउज से बहार ही आ रहे हैं पाताल से ब्लाउज और पुराना ढिला 2 हुक भी टूट गए थे बेचारा एक हुक पानी की तहे जेसे लटके हुए स्तन को नहीं संभल पा रहे थे और पासिन से स्तन का निप्पल और उसके आस पास का काला सर्कल साफ दिख रहा था बिंदु सब जनता थी लेकिन पासिन को न सह शक्ति थी और बेटे ने उसे छू दे दी थी ऐसे घर में रहने के लिए तो आजाद होके घुमती था घरे नमन को देख के बोलि … तेरी ही राह देख रही थी तूने कहा थाना की जब जाना हो हरिद्वार तब सोच के बताने में सोच लिया वह आज से ठीक 3 दिन बाद सोमवार वह तब निकले वह न अभी 3 दिन म तैयरिया भी कर लेने बड़ी भी लेनी लिए पेटीकोट और ब्लाउज और मेरी चड्डी भी पुरानी हो चुकी ही सब वो भी ले लेंगे और कपड़े रखने के लिए बैग भी लेनी ही ना बीटा तो इसी लिए तयारी में 3 दिन लगेंगे सब लेन में पैक करने में तेरे भी कपड़े ले लेना
नमन – अरे मां सब दिल दूंगा में आज भी ही टिकट बुक करवा देता हूं कितने दिन रुकना ही वही 1 माहीना (नमन ने जान ज्यादा के मां से मस्ती करने के लिए कहा)
बिंदु – 1 महिना कह के मुह फड़ा और कहा न बाबा न हरिद्वार में 1 माहिना क्या करेंगे बेटा
नमन – आर मेरी घोड़ी 15 दिन की कर देता है बस मजा कर रहा था 4 5 दिन वही रुकेंगे बाकी में तुझे बोला था न पहाड़ो पे घुमने लेके जाउंगा हिल स्टेशन पे मेरी मां को
बिंदु – घुमने की बात सुन के शर्मा गयू और कहीं और मत सर पे चड्ढा अपनी विधवा गढ़रायी मां को कितना रखागा बेटा क्या बुद्धि विधवा को?
नमन – अरे माँ अब आप मेरे साथ हो अब मेरे बाप के साथ नहीं चिंता मत करो और वापसी हमको दिल्ली से कार लेके आना ही मस्त पुरानी कार खड़ींगे जिसमे और तू दोनो घुमने चले सही से बेथ पायेगी केए के) सही से बाइक पे समति नहीं ऐसा कह के बिंदु के पास जेक चुतड को मसाला के चपत मार दी और दोनो कटद जोर जोर से थिरकान खा के वसंत की तरह ऊंचे करने लगे और बिंदु आह कर दी… चलो आज शाम के 6 बाजे वह आज जाना हे शॉपिंग करने फिर? कल ही जाएंगे बोलो आप कब घर का कम खतम करोगी?
बिंदु – बीटा आज बैग लेके आते वह न कल उसमे जोजो चिजे याद आएंगे वो रखेंगे वो .. पहले नहीं ले जा तू तब तक में भी तयार हो जाती हूं 6 बज गए वह जल्द दुकान बंद न हो जाएंगे ये कहेंगे से चुतड को मटका के जाने लगी…..
नमन – [ख] और नमन भी उसके मटकाटे चुतड़ और गद्रेई पीठ को देख और देखा बदन पे पासिन की बिंदे देख के चुड़वासा हो गया और नहने चला गया वहा देखा बिंदू की पुरानी हुई कुछ पुरानी शैली में एक पुरानी चड्डिया थी और चड़िया उसके बदन पे चाड के सिकुद जया कर्ता थी हमसे वजाह से उस्पव बहुत सिल्वते पैड गई थी पूर्णी चड्डिया थी वहा से चुत का पानी बहने से वो जग पे ढेर ढबबे पद गए और हमें वहां जाने के लिए उसे धोते वक्त बहुत ब्रश लगा था ब्रश घिसने की वजह से सब चड़िया चुत वाले उनके से फटी पड़ी थी और बड़े बड़े छेद हो गए थे मानो किसी ने जनमच के लिए ऐसे बड़े छिड़ और एक मैं बिंदू के मसाला गढ़राय बदन की अच्छी खासी खुशबू नमन को आ रही थी और उसे चुड़वासा बना रही थी नमन ने हमें हर चड्डी को सुन और अपने लोग पे रगड़ा अब ब्रा देखी तो वो भी कहीं से वहां गई थी क्यो नहीं फत्तती पानी की थाली जैसा बड़ा ए बड़े चूचे को आखिर कब तक ये सस्ती पुरानी ब्रा संभल पति सब गरीब की वजह से सात लेति थी विधवा बिंदु…. कर के नहीं लग जाता वह……[/b]
पिचले अपडेट मी आपने देखा की बिंदू नमन को नहीं भेजेंगे वह और नमन भी नहीं चला जाता है वह वही बिंदु की पुरानी फटी हुई ब्रा पैंटी देखता वह उसके साथ थोड़ी देर खेलता वह फिर उसे याद आता वह की उसे भी टिकट वह और अभी बैग लेने भी जाना मां को लेके तो वो जल्दी से नहीं लगता है वह नहीं नहीं लुंड को अच्छे से साफ करता है वह मुठियाता वह हिलाता वह और वो देखता वह उसकी जाने बहुत ज्यादा जाने थी तो वो सोचता था को काट दूंगा और ये भी योजना करता वह की हरिद्वार में साली को रागद रागद के पेलुंगा साली विधवा मेरी बिंदू मां को और ये भी सोचा वह की बारिश में थोड़ा मोका मिल जाए तो अच्छा ही वह ट्रेन में कुछ बड़ा जुगाड़ से खेलने का… मुझे ट्रेन करो एसी की टिकट करने की सोचता है केबिन की तो उसका टिकट बहुत ज्यादा होगा वह तो वो वापस हमारी योजना को ताल देता है और वो सोचता ही मां को हरिद्वार मुझे लगता है वह अब नहीं रहा जाता के भी कर के बस अब उसका गद्रया बदन भोगना ही उसे वो ये सोच के नहना खतम कर देता वह और वो तौलिया लापेट के बहार आटा वह तौलिया मुझे हरिद्वार में मा की छुडाई की बात सोच सोच के उसे बहुत हवा में वह उसे लोडा आधा खड़ा हो गया था तो लोडा में भारी बना था मैं जटा वह वहा उसकी विधवा मां ने एक विधवा जेसी साड़ी पनी थी और वो तैयर होके बैठा और बाल बना रही थी जैसे ही नमन आता वह बिंदू का मुह उसे पदा हे
बिंदु – उसके नज़र नमन के आधार खड़े लोड पे पदी वह और तूरंत उसकी चुत में हलचुल मच जाति वह और पनियाने लगती वह उसकी चुत और वो वही नज़र गढ़े बेथे बेथे बाल बना रही थी और लाह नह तू देख थोड़ा खा पाई में मोती भाई और तू कितना दुबला वह बेटा के ऊपर पता वह मुझे बाइक पे ये लड़का वह भगवान ये सोच सोच के ये भी सोची वह जैसा भी हो है विधवा को रखता है प्यार से और… गया उसका डंडा कितना बड़ा वह बस मुझे बहुत मोटा और सख्त वह पक्का हरिद्वार में ये नमन मेरे बदन को कितना रगडेगा वह भगवान है विधवा का बहुत बुरा हाल होने वाला वह नमन का लोहे जैसा भी बड़ा होता है मैं ही गंदी सोची हूं.. बहार के लोगो को कच्चा छबा जाए ऐसे देखते हैं तो ये तो मेरा खुद का जिगर का जवान टुकड़ा वह इतनी गदरायी घोड़ी को देख के जवानी में ये तो होगा ही ना यही तो दिन वह उसकी जवानी है तो होगा ही न बहुत अच्छा संस्कारी लडका वह मेरी तरह वर्ना कॉलेज के लड़के तो बहुत बड़े होते होते वह आज कल न जाने कितनी लंदनिया पे पे पेसे उड़ते वह मेरा लाडला नमन अपनी विधवा मां को रहता है वह कितना अच्छा लड़का दिया हे भगवान ट्यून है विधवा को ये बाल सोच मुद्रा से देख नमन तब तक शर्ट और पंत पाहन के बाइक की छबी लिए तैयार था और बोला
नमन – चलो मेरी घोड़ी किताब हो गई टिकट सोमवार की दोनो की स्लीपर की कर दी वह हम दोनो को सोने के लिए हमारी जगह मिलेगी जिसमे एक में और एक में तू सो खातिरगे
बिंदु – क्या सच में बेटा ! आह मेरा लाडला बेटा तूने खुश कर दिया तेरी विधवा को मैं तो भगवान से ये प्रार्थना कर रही थी की टिकट मिले सोमवार की, तू बोला था ना की टिकट मिलना मुश्किल वह देखना तू अपनी विधवा मां को लेकर जाना चाहता था दिया न मेरे लाल, ये कहते हैं बिंदु ने नमन के गाल पे हाथ घुमाया और माथे पे किस किया और कहा चल अब जल्दी कर 7 बजने को आ गया वह जल्दी चलते हैं… बीटा 1 मिनट रुक एक बता जैसे बस में ले द वैसे ही होता वह क्या ट्रेन में भी?
नमन – आर ना मेरी ग्वार घोड़ी बस में एक ही सोफा था हलकी था वो 2 लोगो का लेकिन तू वह इतनी बड़ी काली भाई जिसमे तू ही आ साकी थी मेरी जग बहुत बहुत काम थी वह से में तेरे पे सोने आया था तेरी ख़ूब सेवा की तेरे बदन को कस कास के मस्त मसाला के थकन दूर की थी इसमे तारिन में ऐसा नहीं होता इसमे 6 लोग एक कामरा टाइप का कम्पार्टमेंट होता वह इस्मे 3 एक साइड और 3 उसके सामने की साइड सोटे वह 1 बिस्टार पे 1 हाय सो सक्ता वह उसके ऊपर के बिस्तर पे दसरा और उसके ऊपर तिसरे में तिसरा ठिक उसके सामने सामजी मेरी विधवा घोड़ी ये कह के नमन छुटड पे चपत मार देता वह….
बिंदु – matlab isme me और तू अलग अलग सोयांगे ?
नमन – हा मां में सही से तो पौंगा
से भी दुखी थी हलकी उसे भी नमन का छेदखानी करना और अपना बदन उसके बदन से रागदवाना और उसके लोहे के दांडे को महसुस करना उसे बहुत पसंद था लेकिन अब इसमे ये सब नहीं होने … हाश में भी और तू भी अच्छे से तो आएंगे वर्ना 2 दिन गुजरात से हरिद्वार तक केसे निकलते ऐसी छोटी बिस्तर पे ना बेटा
नमन – हा माँ आराम से सोना अब फेल के.. फिर से कमर सेहला के हलकी सी चिमटी काट देता है…
बिंदु – हा मेरे घोड़ा बार मेरी सेवा नहीं कर पायेगा तू मेरे लाल तेरी माँ तेरी सेवा याद करेगा पूरी ट्रेन सफ़र में..
नमन – अरे मां करुंगा सेवा तेरी है तो तेरा बेटा हूं सेवा करुंगा पूरी तुझे मस्त कर दूंगा देखता हूं ट्रेन में कुछ जुगाड़ होता है तो मां याह कह के बिंदु को माथे पे चुम के दोनो हाथ पिछड़े ले जाता है। लगे पेट के ऊपर कर के बूब्स पे हलका सा दबा के बोलता ही… सफर में तुझे नहीं ठकने दूंगा जरा सा भी मां
बिंदु – ठक जाति हू तो ठक जाने दे नमन के कंधे पे मठ रख के बोलती हे.. लेकिन मुझे घुमा मस्त घुमा के ला तेरी विध्वा मां तुझे बहुत आशीर्वाद देंगे और रैंडी जैसा मस्त बना दे सा हलका सा घुमा के चेक कर्ता हे डंडा खड़ा हे या लेय लेकिन पति वह लोडा आधा खड़ा अपनी मां के आघोष में होते हुए…
नमन – चल माँ फिर जल्दी ताला लगा दे घर पे में बहार जेक बाइक निकला हु…. फिर नमन बहार आ जाता ही और नमन बाइक निकला हे
मैं बहार मोहल्ले में उसके घर के सामने वयस्कों की महिला देखता हूं कि वह बिंदु के घर का दरवाजा बिंदू का पति भद्रेश मारा उसके बाद बंद ही रहता है वह बिंदु बहार निकलती ही नहीं ज्यदा सब पदोसी महिला बिंदू से जलती है। माल की सबी औरतो के पति बिंदू के बदन को देखते हैं बिंदू को इस लिए उसकी बिवियो को पता था वो आप में बिंदू से जलती थी तो बात करती थी की बिंदू केसे विध्वा होके और गदरा गई वह बहार साथ में वह दूर है दिन बाइक पे घडी की तरह गंद फेला के चढ की जाति वह जरा भी उसे पति की मौत का दुख नहीं वह साली को तबी बिंदू बहार आके ताला लगा वह सबी औरते उसकी गदरायि गंद को ही देख रही बिंदू फुल साइज पैंटी पुरणी होती है। फुल दिखी वह और चुतड बहुत मटके होते हैं और वो किसी के सामने न देखे सिद्ध नमन को कहते हैं वह बीटा बाइक जुका तेरी घोड़ी चढ नहीं मिलेगी और नमन बाइक जुका देता वह और बिंदू एक प्रति उसके घर के दरवाजे पर एक बाइक बाकी पे रख के एक हो आठ नमन के कांधे पे रख के जोर से कुड़के मिट्टी जाति वह और अपना बड़ा गद्रया 46 का बहार निकला के फेल हुआ हुआ पिचवाड़ा अपने पति की मौत के बाद उसका बेटा चलता था वह पिचे की सीट पे नमन के पिचवाड़े वह
बिंदु – हाय राम वह भगवान आआह बेटा चढ गई तेरी विधि घोड़ी आ बहुत मुश्किल वह चढ़ना रे है बड़े पिचवाड़े को बाइक पे बिठाना आआह बहुत बड़ी हो गई वह रे मेरी…
नमन – बस मां अब 15 दिन ही वह हम कार खारिद लेंगे फिर बैठा जाना कोई दीकत नहीं होगी अब की सीट पर जोड़ी फेला के जितना चाहते हैं उतना खुल के बेथ जाना…
बिंदु – हा बेटा फिर तो कोई दीकत नहीं वह बेटा मेरी जंघे तेरे पिचवाड़े पे धासी पड़ी वह अभी तू सही से चला पाएगा न आगे मत खिसक जाना वर्ना गिर जाएंगे हम बेटा…
नमन – आर मुझे कोई दीकत नहीं वह मुझे तो आदत हो गई ही अपनी विधवा मां को ले जाने की बाइक पर ये तो तुझे बैठाना नहीं इसपे और मैं तुझे कार में घुमन बैठा चाहता हूं इसलिय पे सही से और तुझे पिचवाड़े से कोई घुरे नहीं मेरी घोड़ी…
बिंदू – वह राम कितना ख्याल रखता है वह विधवा घोड़ी का तेरा बाप है तो अधिकारी था मुझे और तू मेरी एक से एक छोटी बटो का ध्यान रखता में मेरे घोड़ा याह कह के नमन की पीठ पे थोड़ा और वह वहां से सही है चूचा नमन की पीठ पे दब जाता वह और बिंदू मस्त होके बैठा के बाइक का सवारी करते हुए मोहल्ले से निकल जाती वह
मोहल्लेवाले सब बड़ी गंदी नजर से देख रहे होते वह मर्द भी उसमे महिलाओं भी लेकिन किसी के सामने बिंदु नहीं देखती और वो बस आगे देख के निकल जाती वह…
थोड़े डेर बाद दोनो मां बेटा एक दुकान के पास पाहुच जाते ही वहा पे बैग वगेरा मिला था तो दोनो वहा से 2 बैग व्हील वाली ले लेटे है बहार आते देखते वही पे एक नोवेल्टी वाले की दुकान थी जिसमे हेयर ऑयल सबुन मिलाता क्रीम सबुन मिलाता वह तो नमन बोलता है चल मा इस्मे हमारे लिए ट्रेन में हाथ धोने के लिए सबुन वगेरा ले ले ले वह और नमन और बिंदु चले जाते वह वहा नमन बोलता हे
नमन – भैया जरा हेयर ऑयल 2 बोतल देना 1 हेयर रिमूवल क्रीम 1 रेजर 1 पैकेट पेपर सोप दे देना.. मां तुझे जो याद आता है वो बोल दे साथ ही ले ले ले..
तबी वहा पे एक सेल्स गर्ल लड़की थी वो कहती है
सेल्स गर्ल – आंटी आपके लिए भी फुल साइज इनर वियर हे
बिंदु – matlab ?
सेल्स गर्ल – जी आंटी मतलाब ब्रा चड्डी
बिंदु – अच्छा कह के शर्मा जाति वह और कहती वह नहीं वो हम कल आएंगे मुझे नेल पॉलिश दे दिजियेगा खतम हो गई वह
और वो सेल्स गर्ल लेक देती वह और बिंदु नमन ने ली हुई चिजो के साथ रख देती है और सब चिजो का बिल बना के नमन और बिंदु सब चिजो को ली हुई बैग में रख देते हैं और दोनो बहार आके बाइक पे बेथ जते नमन साइड एक बुरा लता देता है और एक बैग को बाइक की टंकी पर रख देता है और नमन बोलता है चल बेथा जा घोड़ी बिंदू और बिंदू आआह वह भगवान कर के बैठा गई और वापसी बिंदु अपना एक हाथ नमन की जांघो पर रख देता है मुझे घर की तबी सामने उसे धोसा वाला दिखई देता वह और नमन वह बाइक दौडा देता वह और कहता है मां आज बहुत काम किया वह ट्यून आज धोसा घर लेके वही वही कहेंगे आज तुझे रसोई नहीं बनेगा दूंगा…
बिंदु – हा मेरे लाल चल तू जैसा कहा वे बस में खुश तू भी खुश
और दोनो मां बेटे घर की तारग धोसा लेके निकल जाते वह थोड़ा रास्ता खराब था जान ज्यादा कर ब्रेक मरता और बिंदू के बदन को अपने बदन से रागद खिलाड़ी और धीरे धीरे चला के 8.30 बजे दोनो पा हुआ बेटा घर दोनो घर में आके सिद्ध चल जते वह और घर में जेक धोसा की जयफत उडते वह हसी मजाक करते हुए बिंदु को नमन विधवा होने का जरा भी भंक नहीं लगने देता था…
नमन – मां चल अब ये साड़ी आज ली हुई चिजे और कल हम जो लेने जाएंगे वो बैग में रख देंगे।
बिंदु – कल क्या लेने बेटा?
नमन – भूल क्यो गई मां तेरे लिए 2 3 बड़ी और लेगिंग कुर्ता भी लेना वह और हा अच्छे से चप्पल भी ले लेना वह और एक अच्छी की शॉल भी ले लेना वहा थंड होती वह अच्छी खासी मस्त गुलाबी हो थंड होती है। लिए भी तो कपड़े लेने वह कल और हा मां 15 दिन के हरब से कपड़े लेना तुझे वहा धोने हैं फिर थोड़े ज्यादा लेने मां… ये देख आज लाई हुई तरफ वाला है बैग में डे
बिंदु – जाने साफ करने वाली क्रीम उठा के पुछी वह ये क्या है बेटा ये समान औरत का तो नहीं?
नमन – अरे नहीं माँ ये अच्छाे बालो को हटाने के लिए क्रीम ही उसे अच्छा बालो पे लगा देने से बाल जल्दी से निकले जाते हे ये उस्तरा वो इसी बाल हटा देते हैं…
बिंदु – (मेरे भी जंगल बढ़ गया वह कल नहीं, निकल दूंगा नमन तो सुबा सोया होगा टैब बाथरूम में ये क्रीम ले जाऊंगी) अच्छा बेटा अब समजी तेरी अनपढ़ ग्वार मां चल ले रख दिया ये अब खाने में मैं हूं पास बेटा परसो सब बैग में पैकिंग कर के सोमवार के लिए ट्रेन में खाने के लिए बनाऊंगा और फिर निकल जाएंगे बेटा कितने बजे की ट्रेन वह?
नमन – माँ सोमवार को सुबह 5 बजे की हे
बिंदु – फिर तो बेटा कल और पारसो रविवर वह बहुत जल्दी सब पैकिंग कर लेंगे बहुत खुश वह तेरी विधवा कल भी सबह ही ले आएंगे सब बेटा
नमन – हा मां कल हो खातिर उतनी जल्दी दोपहर तक सब ला के रख देंगे फिर रविवर को आराम से सो जाएंगे सुबह सोमवार को जलदी उठा जो वह
बिंदु – जा बेटा चल सो जा जल्दी और नमन नेट पे कहानी पढ़ने लगता है और बिंदू बिस्तर बिच्छा देती वह और इतनी जाति वह
जैसे की आपने पिछले अपडेट में देखा की दोनो मां बेटे रात को बैग और कुछ कुछ झील धोसा खा के सो जाते ही अब उम्र…
सुबाह का 7 बाजा था बिंदू अपने समय के मुताबिक उस छुकी थी और नमन ने डर रात तक ना जाने मोबाइल में क्या देखा और ना जाने क्या पढ़ा न जाने था तो वो नहने जा रही थी तब उसे अचानक याद आया की नमन ने वो बाल हटाने का क्रीम लिया वह उसे वो लेके आया वह और साथ ही साथ वो एक कैची लेके बाथरूम में घुस जाति वह और नाथ ही एक वाले कपडे भी लेके चली जाति वह वहा आपके आप को नंगा कारती है और फिर बिंदु एक पाता ले मुझे अपने चौदी गद्रायि गांद को रख के बेटी वह जिस वजा से वो पतला तो वही दिख रहा है के मोहे गढ़रे चुतद और जंघे ही दिख रही थी फिर वो अपने दोनो मंसल गडराय जांगो वाले पर को फेला लेटि वह जिसे उसे बालो वाला एक दम काला भोसड़ा सामने आया था लेकिन कुछ बड़ा नहीं वही दिख रहा था बालो को हाथो से काट देती है फिर अब छोटे छोटे बाल द डब्ल्यू ओह चुभे नहीं उसके लिए बिंदु हमें क्रीम को निकल के चुट पे और उसके आस पास उग बालो पे क्रीम लगा देती है और हाथो से मसाला की राखी वह थोड़ी देर में ही सारे बाल बिखर के गिर जाते हैं और वहां बस अब उसमें बस 1 एमएम जितने बाल बचे होते वह उसे वो रहने देता है और चुत पे पानी मार के उसे साफ कर देता है और वो अब चुत में उनगली घुसा घुसा के साफ करने में लगी थी जिस्की वजाह से उसके बदन में करंट था दौड़ा वो साफ कर के हाथ बहार निकल लेटी वह और वो नजर दौदती वह उसकी दोनो जांघो के अंदर की तरफ बहुत ही काले काले ढाबे गए थे लेकिन सोचती वह है उमर में ये होता ही वह और जांघे गडरा के फेल तो वह गया को अच्छे से मल देता है वह सब से शुद्ध बदन पे साबुन मल के नाहा के 20 मिनट बाद वो बहार आती वह और बाथरूम में गिर उसके चुत के बड़े बड़े बालो को साफ कर देता है वह तकी नमन को गंदा नहीं लगा और वो क्रीम बैग के खाने में रख देती हूं और वो अब एक दम अपने देसी स्टाइल में केवल एक ब्लाउज और पेटीकोआ त पहन के पूजा करने लग जाति वह भगवान के रोज की तरह और सब काम करने लगती वह तबी 11 बजे नमन उठ के आता वह और सिद्ध अपनी मां को प्यार से चुम्ता वह और थोड़ा आपके बोलो मैं ले और मेरे लिए कपड़े लेने?
बिंदु – हा बेटा क्यों नहीं जाना ही वह मुझे तू ले चल बस बहुत बेसब्री वह सोमवार के मेरे घोड़े
नमन – आर मेरी विधवा घोड़ी बस आज चल तेरेको तेरी पसंद के मस्त कपड़े दिलता हु ऐसा कह के दर्द चुतड पे हाथ रख के उसे प्यार से मसाला के थोडी सी चपत मार के उसको माथे पे चुम के बाथरूम में मुझे पता चला और तैयर होके बहार आता ही
तब तक बिंदू ने दोपहर का खाना बनाया होता है और वो खाना पारोस के तैयार राखी वह ….. तब नमन 10 मिनट बाद आता ही बहार और देखता जी बिंदू आगे को जुक के खाना पारोस रही होती वह जिसी वजह से ब्लाउज के 2 हुक खुले होने की वजह से पपीते जैसे पानी की थाली की तरह लटके हुए हिचकोले खा रहे थे ऐसा लग रहा था कि किसी ने रोज इसे खिचा वह और लता दिया वह वो हलत अपनी ही नाम को दे रहा था पर अपनी हवा पर कबू रख के बोलता ही…
नमन – अरे बिंदू घोड़ी मेरी तू क्यो इतना ज्यादा जुक के घोड़ी बन के पारोस रही वह मुझे ले लुंगा मेरी प्यारी मां तू कश्त मत लेना…
बिंदु – एक तू ही तो जिसके लिए कश्त लेति हु मेरे जीवन में मेरे लाल बस उसमे भी तू मुझे तोकेगा तो आखिर में क्या काम की मेरे लाल…
नमन – आर मेरी मां तू मेरी घोड़ी तू बड़ी काम की ही बस चल अब जल्दी खाना खा लेटे ही बाद में चलते हैं वह दोपहर मार्केट में भी काम होगी और कपड़े मस्त ले जाएंगे तेरे और मेरे लिए
ऐसा कह के दोनो मां बेटे खाना खा के तयार हो जाते हे
नमन ने टीशर्ट और पंत और बिंदु ने ठेठ विधवा देसी स्टाइल साड़ी पनी होती है वह ब्रा और पैंटी के साथ दोनो घर के बहार आ जाते वह धूप में कोई उसे देखने वाला बहार नहीं था दोनो फटक से बाइक लेके बाजार की और निकल जाते मुझे आप में बैचित चल रही होती वह बाइक चलाने के दौर…
नमन – मम्मी तू कितनी जोड़ी को से कपडे लेगी बता ?
बिंदु – बीटा ट्यून मुझे द्वारका जाने से पहले 5 लेगिंग कुर्ता दिलया था और कुछ सरिया भी पेटीकोट और ब्लाउज के साथ दिलवेई थी ना तो अब में क्या लू समाज नहीं आ रहा मेरे बेटा।
नमन – अच्छा मां वहा बस 2 साड़ी लेले ज्यदा मत ले क्योकी साड़ी में ब्लाउज पेटीकोट पहन्ना पद वह तो उसे वजह से बैग ज्यादा भर जाएगी तो बस 2 साड़ी ले और बाकी की पहली दिलवेई लेगिंग कुर्ती और आज 5 जोड़ी लेगिंग्स कुर्ती और आज भी 5 जोड़ी लेगिंग्स और एक मेरी बात सुन?
बिंदु – हा बोल बेटा…
नमन – माँ तेरे पास कोई पूरी लाल साड़ी घर में वह क्या?
बिंदु – नहीं बेटा वो तो तेरा बाप मारा उसके तूरंत बाद में गरीब को दे दी थी
नमन – क्यो ?
बिंदु – मेरे बुद्धू घोडे विधवा औरत ऐसे कपडे नहीं पहन शक्ति ना इस लिए…
नमन – बस अब नहीं अब तू जो चाह और मैं चाहु वो ही कपड़े पहननेगी.. मुझे तुझे पूरी लाल साड़ी में घुमाना वह एक दिन वही तो आज वो भी दिलवाऊंगा तुझे मस्त और लाल ब्लाउज और पेटीकोट तो लिए वो ही वह ले जाएगा और हा एक बात कहू बुरा नहीं मानेगी न मेरी कसम खा?
बिंदु – आर मेरे लाल तू जेसा कहे वेसा अब पहनुगी आखिर तेरे सहे तेरे लिए ही ती जीती हू पां लुंगी तेरे लिए लाल साड़ी भी वहा पे और घुमूंगा तेरे साथ… और हा तू मुझे जो चाहता है तेरी साथ। बुरा नहीं लगेगा बोल बेटे….
नमन – आर माँ केसी चड़िया पहन रही वह तू मैंने बाथरूम में देखा है आज तू कुछ नहीं बोलेगी 5 जोड़ी चड्डी और ब्रा भी ले लेगी ये कह के बोला समजी मेरी घोड़ी….
बिंदु – बिंदु ने पिचे बेथे बेथे नमन की जांघो पे एक चपत मार दी समाज गई में मेरा घोड़ा… आज कल बहुत ध्यान रखता है तू मेरा राजा अपनी विधवा का
नमन – मैं ना रखू तो कोन रखागा है विधवा घोड़ी का ख्याल मेरी मां चल अब आ गया कपड़ों का दुकान
बिंदु – तो पुरानी चड्डी और ब्रा को फेक दू ना मेरा बेटा?
नमन – अरे बिलकुल नहीं माँ उसे मैंने मस्त उपय सोचा ही घर जा के बताउंगा मेरी घोड़ी उतर अब चल और
ऐसा बोल के नमन की बात मन के बिंदु उतर जाति वह और नमन को देख के छूत में फसी हुई साड़ी को निकल के कहते हैं वह आहा बहुत बहुत बुरी तरह चुभता वह बाइक के पिचे का करियर मेरे अंदर
नमन – आर मेरी घोड़ी तेरी ही इतनी चौड़ी की पूरी कैरियर के ऊपर चढ़ जाता है एक हिसा तो चुभेगा ही ना इसी वजाह से ही कार लुंगा मां तेरे लिए ही सही से चलने के लिए और चल अब और चल
दोनो मां बेटा लेडीज कपड़ो की दुकान में जाते हैं और वह नमन अपनी मां को लेगिंग्स कुर्ता लेने में मदद करते हैं वह 5 जोड़ी लेगिंग कुर्ता ले लेता है और बिंदू भी खुशी खुशी अपने बेटे के दिलवे लेगिंग्स वह कुर्ते भी ऐसे लेते हैं द हलकी उसे पता था इस्मे गद्रेई घोड़ी और भी गद्रायी लगती वह पर नमन को अपनी मां के चुतड जंघे बहुत पसंद थे वो बिंदू भालिभाती जनता थी अपने बेटे को देखने के लिए ही बड़ा उसे पहंती थी। लेगिंग्स कुर्ते में शीश में देख के खुद भी शर्मा जाति थी लेकिन एकलोते बेटे के लिए वो पहनने को राजी थी और अब वो अपने बेटे की मर्जी के मुताबिक एक लाल शादी करने वाले को रजी वह जो एक लाल शादी करने वाली थी पे जाते वक्त औरत पहंती वह वेसी साड़ी थी वो लेकिन वो ले लेटी वह उसे ये सब करना और से बहुत ही अजीब सी खुशी और एक अजीब सा और से रोमांचित कर देने वाला महसूस करता था…
में बिंदु भालिभाती जनता थी की वो अपने बेटे के साथ जा रही वह न की अपने पति के साथ जो ये सब ले रही वह लेकिन अजीब सी महसूस कर रही थी वो भी विधवा होके जा रही थी छती तो अपने आपको कुछ नहीं रोक कहीं बहुत अच्छा लगा रहा था….
फिर नमन कहता हे
नमन – माँ अब में जो बोला वो भी लेलो 5 जोड़ी… नमन धीरे से कहता है चड्डी ब्रा..
बिंदु – शर्मा के बोलती वह बदमाश घोड़ा सबके सामने शर्मिंदा मत कर है विधवा घोड़ी को ले लुंगी..
नमन – बेशरम होके सेल्स गर्ल को बोलता हे मैडम इस्के गडरे बदन के लिए फुल साइज सिंपल देसी स्टाइल चड्डी और ब्रा दिखो… और बिंदू की तरफ मिट्टी के कहता है मां अपनी साइज बता दो
बिंदु – शर्म से एक दम लाल होके कहते हैं वह और सेल्स गर्ल से कहते हैं वह जी 38 की ब्रा और 42 की चड्डी और नमन की तारफ एक दम गुसे से देख के आंख निकल के कोहनी मार देता है
ये सब सेल्स गर्ल भी देख लें वह और बिंदू के सामने है ले कहती है वह चाची बहुत खुश किस्मत हो जो ऐसा बेटा मिला वह आपका वारना आज कल के पति भी अपनी पत्नी को ये सब चिजे नहीं बात और जान।
सेल्स गर्ल – आंटी जी आप भले ही 42 की चड्डी बोलो आपकी कमर और आपका पिचवाड़ा का फेलव और प्यार देख के नहीं लगता है 42 की चड्डी है भारी भरकम चिज को संभल मिलेगी जबर्दस्ती करने की आपको ही आपको चड्डी बिच में फास के सिकुद के आपको चुभेगी और दाररे घुस के और थोड़े दिन बाद वो चड़िया का इलास्टिक एक दुक लूज हो जाएगा आपकी चारबी और फेलव देख के लगता है आपको पिक काम से काम 46 आया 48 फिर रखना हो तो 46 साइज की लो वर्ना 48 आपको कंफर्टेबल लगेगा बोलो कोंसी डू?
नमन – हा मां मैडम बिलकुल सही कह रही वह अभी में बताया न आपको की बाथरूम में केसे एक दम सुकुद के तंग थी आपकी सभी छड़िया इसी लिए आप ये बड़ा साइज हाय ले लो
बिंदु – आर बीटा वो सब 40 की वह जो अभी पहनी ही वो 40 की हाय वह बहुत चुबती वह क्या करू आज तू दिलवेगा तब लुंगी वर्ना मेरे पास पेसे कहा ऊपर से मुझे कोसा घर में पहंती हु बहार जाते वक्त ही पहंती हु ना कोई टेंशन नहीं हे
सेल्स गर्ल – आंटी क्या बोली आप 40 की ये तो आपकी साइज के उसके बहुत से छोटी वह मौसी की ऐसी टाइट मैट पहनो कमर और पिचवाड़े पे नुकासन हो सकता है अब तो आपका साइज और भी बढ़ गया वह ये 46 ले लेगिंग्स भी वेसे पहनोगी तो टाइट कसाव रहेगा और आपके पिचवाडे मटकेंगे ज्यादा कुर्ते से बहार निकल के उसके लिए आप 46 हाय लो टाइट राखेगा और ज्यादा मोटा नहीं लगेगा थोड़ा चुभेगा लेकिन 40 की चड्डी से कम ही चुभेगा
बिंदु – हा वो लेगिंग्स का शोक वह आज कल बहुत फैशन वह ना लेगिंग की तो पसंद है वह है की लेली मैडम जी मेने
सेल्स गर्ल – हा वो तो कोई बात नहीं और ब्रा 38 की केसी दिखाउ नॉर्मल कोन्स कलर की?
बिंदु – मैडम में सिंपल वाइट हाय पांति हू तो वाइट फुल साइज हाय डू सिंपल
सेल्स गर्ल – वो बिंदू के कहने के मुताबिक 5 46 की पैंटी फुल साइज सिंपल प्लेन कलर की और 38 की व्हाइट ब्रा 5 पीस पैक कर देती वह और लेगिंग्स कुर्ता और लाल साड़ी भी पैक कट के बिल बना देता वह नमन पेसे चूका देता है मैं और
नमन और बिंदु बहार आ जाते हैं…
मैं बिंदु – बहुत शर्म आ रही थी बेटा कोई अपनी मां की चड्डी ब्रा लेने साथ चलता वह देखा नहीं वो लड़की केसे गंदी हसी मेरे ऊपर मुझे बहुत शर्म लगी बेटा अब मैं नहीं चलूंगी तेरे बोलत और एक तू आया बस… ये आज हुआ इसमे लोग मुझे बदलेंगे मिलेंगे…
नमन – आर मां तू अब मेरे साथ रहती है, ये सब बात शहर में नॉर्मल वह तू बस चिंता मत कर बिंदास रे कोसा वो लड़की हम को जनता वह बस तू चिंता मत कर तू हरिद्वार चली जाएगी और मेरे साथ पहाड़ी ना तब पता चलेगा क्या करते हैं वह चल अब सामने मेरे कपड़े ले ले जाते हैं
बिंदु नमन के सामने एक मस्त मुस्कान देके नकली गुसेवाला मुह बना के नमन के हाथ पे मार्ती वह और चलती ही उसके पीछे गंद मटका के और नमन के लिए दिनो 5 जोड़ी जींस पंत और उसके ऊपर मैचिंग 3 शर्ट और 4 टीशर्ट लेके चले जाते ही घर की तरह मुझे नमन पुछता हे..
नमन – माँ तुझे अब कुछ लेना ही मैंने सब ले लिया तुझे वहा के लिए मेकअप लेना ही तो बोल दे कही बाइक रोक डू बोल
बिंदु – हैं बीटा मुझे चप्पल लेना वह और मेकअप का मुझे कुछ बता नहीं सकता वो में तुझे वही जेक बोलूंगी वह मुझे वातवरन लोगो का थिक लगा तो वही से दिलवा देना मुझे अभी चप्पल दिलवा दे तेरी घोड़ी घोड़ी
नमन – हा मेरी घोड़ी जेसा तू कहे वेसा करेगा तेरा घोड़ा .. और ये कह के चप्पल की दुकान में नमन बाइक रोक देता है और वह से बिंदू के लिए थोड़े से बड़े हिल वाले चप्पल ले वह
दोनो मां बेटा घर की तरफ जाते ही और शाम के 5 बजे द मोहल्ले में लोग बहार बैठे थे उन दोनो को देख रहे थे कोई मर्द पिचवाडे घुर रहा था बिंदु का कोई औरत बिंदु को देख रही थी और घर के सामने के लिए कल की तरह पड़ौसी सब महिला बेथ के दोनो मां बेतो को घुर राही थी लेकिन ये दोनो को कुछ किसी से मतलब ही नहीं था दो चुपचप बाइक रख देते वह और बिंदू के हाथ में थाली वह वो घर थी जो बाहर खड़ा था बैठी औरतो के सामने था और बिंदू के दो हाथो में थाली थी तो बिंदू ने बाइक से आगे बढ़ने के बाद अपने बड़े मंसल पिचवाड़े की दार में घुसी पड़ी अपनी साड़ी को नहीं निकल पाई जो की पिचे बैठी औरते में वही दे के बिंदू की भर के बुरे करते थे की देखो कितना फेल हुआ हुआ पिचवाड़ा हो गया वह बदचलन और लगता है पति की मार्ने के बाद देखो केसे बिंदास होके अपने जवान बेटे के साथ पिचे अपना गद्रया पे बिंदास बाइक मर गया ना जाने क्या काम कर के पैसे कामती वह ऐसी गंदी बात कर कर के आप में बिंदु की बुरी कारती थी सब औरते तब नमन ने दरवाजा खोला और दोनो और चले जाते वह और फटक से दरवाजा नमन बंद कर देता है और होके बैठे जाते हैं और बिंदू उठ के कामरे में चली जाती वह और साड़ी निकल के पेटीकोट को ऊपर कर के अंदर कहीं छुपी हुई 40 की पुरानी घीसी पड़ी फटी पैंटी को निकल के जो गई से गिली हो गई वह बाथरूम में और ब्लाउज निकल के ब्रा को भी पैंटी के साथ निकल के बाथरूम में तांग देता वह और वापसी ठेठ देसी कोठे की रंदी की तरह पेटीकोट और ब्लाउज घर के कपड़ों में आ जाति वह और बहार आके नमन के सामने से चल के जा के नमन के लिए पानी झील देती वह और पानी का ग्लास किचन में वापस रख के नमन के सामने आके बैठा वह….
जैसे की आपने पिचले अपडेट में पढ़ा की नमन और उसकी मां सुबह उठ के कपड़े उन दो के लिए आते हैं और ठक हर कर आके बैठे जाते ही अब आगे…
नमन – माँ तू भी पानी ढेर मुझे पिलाया तो और हा खाना बना ले में तब तक कामरे में मोबाइल देखता हूँ
बिंदु – हा बेटा में भी वही कहने वाली थी भुख भी लगी वह और थकन भी तू जा काम में आराम कर में हमरे लिए मस्त सब्जी रोटी बना दी और फिर खाना खाने के लिए बुलाती हु..
नमन – अपनी मां का कहा कर के नमन ओके मां कह के वहा से उठ के काम में चला जाता हे
और बिंदू भी अपने गढ़रे बदन को कोस्ते हुए गरमी में काम कर के अपने पति से ब्लाउज और पेटियोकोट में अपने गढ़रे बदन को जबर्दस्ती फिट कर के मटका मटका के काम कर रही थी और वहा नमन से अपना मा बदन को याद कर के गंदी वीडियो देख कर लोडा सहलता वह और खाना बनाने का इंतजार करता है
दोपहर के 2 बज गए थे टैब किचन से आवाज आती ही
बिंदु – अरे ओ बेटा आजा चल खाना लगा रही हूं चल हाथ मुह धो ले और बैठा जा खाना खाने और फिर पारसो की पैकिंग भी करनी ही
नमन – आया मां याह कह के नमन खड़ा होके अपने लोड को बिठा कर और गंदी वीडियो को बंद कर के अपने मोबाइल को चार्ज पर लगा के बहार आ जाता वह और अपनी मां की तरफ देख के सिद्ध बाथरूम में हाथ में बाथरूम में हाथ खाना खाने बैठा जटा हे
ऐसे ही आधे घंटे तक विधवा मां और बेटे के बिच बाटे चलती रही और दोनो मां बेटे खट्टी मीठी बात होती रही और खाना खतम हो गया और नमन वहा से उठ के आके कामरे में वापस लागने गढ़ने और वापस लागने और घर का बच्चा कुछ काम करके नमन के पास जा के कामरे में जाने तब तक नमन सो चूका था दोपहर के 3 बज रहे थे दो मां बेटे ऐसे ही तो गए थे 4 बजे बिंदु उठी तो देखा नमन वह नहीं था और वो आप अलमारी से निकल रहा था ये देख के बिंदु बैठी हुई और बोली..
बिंदु – उस गया मेरा लाडला घोड़ा और कपड़े भी निकल रहा वह ला में बैग लेके आती हूं और वो उठा के गंद मटका के बैग लेने गई और दोनो बैग अलमारी के पास रखे हुए उसमे पुराने से पलंग पे ला के रख दिया और नमन ने अपने 10 जोड़ी कपड़े रख दिए
नमन – मां चल तू भी तैय्यारियां कर तेरे कपड़े ज्यादा होते हैं कोई ना कोई रह जाएगा चल आजा अलमारी से कपड़े निकल
बिंदु – हा बेटा वही कर रही है वो कह के बिंदू उठी और अपने कपड़े और सदिया लेके पलंग पे रख दी और बोली बेटा तू रख देना बैग मुझे इतनी अच्छे से पैक करना नहीं आता
नमन – आर मेरी घोड़ी वो में कर दूंगा तू बस कपड़े रख दे बैग के बाजू में… और नमन ने अपने सारे कपड़े और तेल ब्रश टूथ पेस्ट सब अपने लिए और पानी मां के लिए बैग में रख दिए और अब बिंदु के कपड़े रख के लिए देखा और बोला मां तेरे कपड़े मेरी बैग में आधे आएंगे और आधे ये दसरी बैग में मेरी बैग भर चुकी ही और तेरे कपड़े भी ज्यादा वह और बाप की अस्थिया भी तेरे साथ मेरे साथ में रहेंगे कपड़े भी बस 2 ही बैग करेंगे वपिस आते वक्त कार से आएंगे तो जो कुछ खराबी करेंगे वो 3 सा बैग होगा उसके लिए कार ही उठने की कोई जरूरत नहीं… ला दे कपडे…
बिंदु – ये ले ये सफेद साड़ी ब्लाउज और उसका पेटीकोट और ये तेरे बाप की अस्तिया..
नमन – क्या मेरी घोड़ी वहा भी तू ये विधवा के जेसे क्यो जानेगी वह तुझे पहने के लिए इतने मत मस्त कपड़े दिलाए फिर भी ये विधवा की सफेद साड़ी क्यो?
बिंदु – हैं मेरा घोड़ा तेरे बाप की अस्तिया विसर्जन करते वक्त में ये विधवा की सफेद साड़ी पहनूंगी जो में ये तेरे बाप की अंतिम संस्कार में पहंती थी यही साड़ी वह और फिर आशी विसर्जन कर के में गंगा में ही वहां हूं। … ये औरते विधवा होने के बाद अपने पति के लिए ये कार्ति वह बेटा है सफेद साड़ी ली वह मैने समजा मेरा घोड़ा ऐसा कह के एक रंडी जैसी कामुक मुस्कान देके चुतडो को खुजाके सफेद ब्लाउज नमन को दिया और कहा दे। ..
नमन – आर मेरी ग्वार घोड़ी ऐसा नहीं रखते पहले सब साड़ी रखेंगे उसके बाजू में तेरे पेटीकोट और फिर ब्लाउज सब साथ में रखते हैं वह तकी लेने में आसनी हो और हा ये सफेद साड़ी को अस्थि विसर्जन के बाद साड़ी लेना और फिर घुमूंगा तुझे में हरिद्वार में…
बिंदु – लाल साड़ी की बात सुन के बिंदु शर्मा गई और बोली टोपी बदमाश कहिका अपनी विधवा मां को अंजन जग में लाल साड़ी में घुमाएगा ऐसे गदरायि विधवा को
नमन – अरे माँ कितनी बार कहा अपने आपको कोसो मत जैसी भी मुझे बहुत प्यारी हो मेरी रानी चल ला लाल ब्लाउज दे याह रख दू, और हा इसे खराब एक और साड़ी भी दे पिली टोटल 3 साड़ी ही लेनी ही माँ बस.. सब लेगिंग्स कुर्ता ही वह वहा आपको आपको फ्री समजो कोई पहचानने वाला नहीं वह मां अब बिसरी हुई दुखी जिंदगी भूल जाओ….[बी] मां चल अब लेगिंग कुर्ते दे सब…[/बी]
बिंदु – ये ले बेटा सब रंगिन लेगिंग देके बोलती हे भगवान ना जाने केसे मेरे बदन को जकड के रखते हे ये पाटली सी छोटी सी लेगिंग्स ना जाने केसी मोती भद्दी काली भैस लग्ती बत्तू इसमे?
नमन – आर माँ तू चिंता मत का आज कल लेगिंग्स फैशन हाय वह ये तो मेरे बाप ने तुझे घुमाया नहीं ना है तुझे नहीं पता वहा देखना तुझ जैसी बड़ी बड़ी घोड़िया भी लेगिंग्स में मैं घुमती होई और जीन्स भी तू चिंता मत कर बदन की…
बिंदु – हाय राम लोगो की बदन की जरा भी परवाह नहीं है उमरा में जींस केसा लगता है बेटा
नमन – आर माँ वो सब आम बात वह तू चिंता मत कर तू बस सज धज के अपने बेटे साथ घूम फिर और खा पि अब तेरा बेटा हे ना…
बिंदु – वह भगवान है विधवा को कितना खुश रखता है मेरा लाडला..
नमन – ये कह के बाथरूम जटा वह और वापसी आता वह और अपनी मां की साड़ी ब्रा पैंटी गंदी फटी हुई सिखड़ी हुई सब झील मां के पास गिरा देता है…
बिंदु – शर्मा के हाय बदमाश ये क्यो लाए तू छी गन्दी ही मेरी चड्डिया अपनी चड्डियो पे अपने ही चुत रस का धबा देख के और मोटी हुई छड़िया और सिली हुई ब्रा देख के बिंदू शर अहर मन मैं बिंदू मैं जवान बेटा वह फिर भी स्नानघर में ये सब रखती है…
नमन – आर माँ तू पुच रही थी ना आज सबह की मेरी छाड़िया और ब्रा का क्या करना वह पुरानी वाली का तो ये सब चड्डी ब्रा के पोछे बना ले और हा माँ जो अल्मारी में पुराने पेटीकोट के नैपकिन बना जो और हा हम लेंगे उसमे रखने के लिए 2 ब्रा और 2 चड़िया बैग में दाल दे कार को साफ करने के लिए रख दे घर में पोछे बहुत कम हो गए वह ये तेरी छड़ियां और ब्रा ही काम आएगी और पुराने पेटीकोट बना को मृत…
बिंदु – ये सब देख के सुन के बिंदु शर्मा के लाल हो जाति वह और कहती वह या भी कोई कपडे वह बेटा ऐसे गंदे कपड़े से कोई पोछा बना वह क्या?
नमन – अरे माँ ये क्या तू भी ना तेरे ही पुराने कपड़े हैं रोज़ धोती वह तू मोटा जरुर गए हे लेकिन उसका मतलब ये तो नहीं की इसे हम फेक दे और हा कार को साफ करने के लिए चप्पल साफ करने के लिए मस्त काम ये के आएगी कॉटन की कार को घीसेगी भी नहीं ज्यादा… ये कह के बिंदू के थिक सामने पड़ी छुट वाले उसके पे ढाबे वाली फटी पैंटी को नमन चुत वाले हिसे से दबोश के उठा है और हमें सही को सही है अपने कपड़े रखे बैग में अपने कपड़े की भी घुसा देता है …. ऐसे ही फिर 1 चड्डी को और फिर 2 ब्रा को लेके समत के अपने कपड़ों के बिच अपनी विधवा मां के सामने ही रख देता वह और एक चड्डी वह या ट्रेन की सीट पोचने के लिए ये चड्डी को बैग के बहार की जेब में रखता हूं तकी जल्दी मिल जाए मां…
के बिंदु – हे भगवान केसा लडका वह तू बेटे केसी बात करता है तू तुझे दत्तू प्यार कारू या क्या करू समाज नहीं आ रहा और मन ही उसे कुछ अलग ही चुदस चदी थी जो नमन अपनी उसे चकड़ियो को कपड़ो के बिच घुसा देता था ये लिए वो शर्मा के ला होके दुसरी चड्डी ब्रा समेट रही थी…
नमन – अब ये बच्ची हुई चड्डिया ब्रा घर में रख ले पोछे बनाना और चप्पल साफ करने वगेरा के लिए मां
बिंदु – हा में सर हिला के अपने पति की अस्तियो को अपना बैग में राखे हुए कपड़ो के बिछ घुसा देता वह और कहती ही ये तू आज दिलायी हुई नई चड्डी ब्रा कहा रखू बेटा?
नमन – आर मेरी अनपढ़ ग्वार घोड़ी मां इसे तू अपने कपड़ों के बिच कहीं भी घुसे दे तुझे ही पहन्नी ही निकले के जैसे मैंने तेरी पुरानी राखी वे रख ले…
बिंदु – आर हा वो तो मुझे भूल ही गई ये कह के बिंदू वो साड़ी चड्डी ब्रा अपने कपड़ों के बिच घुसे के रख देती है और नमन और अपने गरम कपड़े रख के बोलती वह बेटा बैग भर गया लबलाब इसे बंद कर देता है
नमन – हा मां कर दे बंद और हा मां कल जो नशा बनेगा तू वो इसके पॉकेट में रख देना बहार वाले तकी ट्रेन में हम खा खातिर…
बिंदु – हा बेटा .. वैसा ही करुंगी मेरे लाल और कुछ?
नमन – नहीं माँ कल ज्यादा काम मत करना आराम करना और सो जाना परसो जल्दी जाने के लिए इतनी जल्दी उठ जाएगा
बिंदु – हा बेटा बस जल्दी ले चल तेरी इस विधवा को बहुत खुश हूं में याह कह के बिंदु नमन को अपने आघोष में लेके अपने स्तान को नमन की पाटली सी चाटी में दबोश देता वह और नमन भी हाथ है पीठ में के वपिस निकल के छुटडो को सहला के बोलता वह हा मेरी घोड़ी बस अब तेरे घुमने के दिन शुरू हुए मेरी घोड़ी और चपत मार देता वह चुतडो पे और नमन कास के मां को अघोष में लेके और दबोश लेटा वह लेटा वह बिंदु हल्की सी सिकी भर के नमन से दूर होती वह और पुछती वह…. क्या बनौ कल नाशते में तेरे लिए ट्रेन में खाने के लिए बोल?
नमन – बस पूरी सब्जी बना लेना थोड़ा सा मुझे तो ज्यादा ट्रेन में खाना नहीं खाऊंगा बस तेरी सेवा करुंगा
बिंदु – सेवा सुन के बिंदु को बस में अपने बदन को मसाला वाली बात याद आ जाती है और शर्मा की कहती वह यहा एक बिस्तर पे सोना वह अलग सोना वह ना हमको
नमन – वो तो कुछ जुगाड़ करेंगे मां
बिंदु – शर्म से लाल होके ज्यादा सेवा करके अपनी मां को सर पे मत चड्ढा पिछली हो जाऊंगी
नमन – तो हो जा ऐसी मा किसने रोका हे
बिंदु – चल टोपी बदमाश कहिका चल थोड़ी देर बात करते हैं और फिर रात का खाना खा के सो जाते हैं…
नमन – हा मां में भी अब तो पारसो जाएंगे तब ही मजा आएगा बहुत ही ऊंचावाला हो रहा मैं… ना जाने परसो कब होगा
बिंदु – हो जाएगा बेटा सबर कर जल्दी ही हो जाएगा….
ये कह के दोनो मां बेटे ऐसे ही बछोड़ी और बिना मतलब की बात कर के खाना खा के इतने जाते हैं कि वह और बिंदू आज यादा काम करने वाली नहीं थी उसने घर के काम था और ज्यादा आराम ही कर्ता है और नमन भी अपने कामरे में पड़ा रहता है और दिन भर नेट पे गंदी वीडियो और कहानी पढ़ के मां के ना की मुठ कर के लोडा शांत कर के दिन पास करता वह और ऐसा ही दोनो का और दिन दोनो मां बेटा रात का खाना खा के सो जाते ही उसकी रात के 3 बजे उठ के तयार भी होना था और समय रेलवे स्टेशन भी पहुचना था तो दोनो घोड़े बीच के सो जाते ही…
आपने पिचले अपडेट में पढ़ा के नमन और उसकी विधवा मां सो गए थे सुबह जल्दी हरिद्वार जाने के लिए सो गए और दोनो को निंद आ गई वह और अब 3 बजने का अलार्म नमन के मोबाइल में बजता ही और दोनो उठ जाते और नमन को हाथ से गडराये मंसल बाजुओ पे रखता हे उसकी मां को जगता वह और कहता हे
नमन – चलो माँ उठ जाओ जल्दी 2 घंटे में तैयर होके स्टेशन पहुचना ही हम..
बिंदु – बिंदु उठा के चलती जाती वह मुझे स्नान कराती है…
और नमन भी उठ के पहनने वाले निकल देता है वह साथ ही साथ अपनी घोड़ी बिंदू के लिए भी लेग्गीबग्स कुर्ता और ब्रा चड्डी निकल लेटा वह और मन में गंदे ख्याल जगता वह और सोचा वह आज ट्रेन में हूं और के मसाला दूंगा दूंगा तेरे भोसदे में आग लगा दूंगा बिना मेरा लोड लिए रह नहीं पाएगा इतना हवा दूंगा दूंगा तुझे और मेरे लोड के लिए तड़प उठी साली घोड़ी और लेगिंग्स कुरबा ऊपर बाथरुम में नहीं रही होती वह उसे बोलता है मम्मी तेरे कपड़े पलंग पे राखे वो वो पहन लेना….
बिंदु – हा बेटा बिंदू भी अंदर ट्रेन के सफर केसा होगा उसके नंगे में सोच के मस्त होके याद करता है और नमन की बात सुन के मन में कहती है पक्का ये घोड़े ने अपनी मां का गद्रया पिछवाड़ा देखा है लिए लेगिंग्स है न कहीं मुझे भी लेगिंग्स अच्छी लगती ही वह यह कह के रग भी मस्त होके चुट को और से साफ करते हुए अपना नहीं का काम खतम करता है अपने आपको अपने साथ ले वह पुराने घीसे हुए तौलिया से बदन के लिए वह और मस्ती से तोवलो को अपने बदन से चुचे और गंद ढके ऐसे निकल के गांद मटका के जंघे थिरकके कामरे में चली जाती वह वहा नमन नहीं होता नमन किचन में कुछ कर रहा होता है तबी पिचे से उसमें मां वह निकल को पाता है। रहता और नमन भी मिट्टी के देखता वह तो बाथरूम का दरवाजा खुला था और वो भी अपना तौलिया लेके बथोरोम में घुस के नहीं लगता वह
ऐसे ही नमन नहीं रहा होता है तब बिंदु पलंग पे बेथ के अपनी नहीं 46 की चड्डी अपने पेरो में दाल के जांघो के ऊपर खिच रही होती है और सोची वह अच्छा हुआ मैंने 46 कि फिर भी ये जांघोस ऊपर मेरे चढने हैं पिचवाडे को संभलने में बड़ी जबर्दस्ती कार्ति वह और ऊपर से ये लेगिंग पक्का विधा तेरा बस दिखता होगा जो की नमन पागल हो जाता है उसे देख के मैं गद्ररे जंघे देख केसे फेल हुई वह और वो खड़ी हो गई चड्डी जितने उसे जांगो समते दोनो चुतड चुत सब चड्डी में धस जते और एक चड्डी वाला शेप धारण कर ले वह और बिंदू अल्मारी के शीश में देखता वह चड्डी की वजाह से थोड़े से हुए चुतद और उसमे फेल भी हुए हैं ऐसे देखते ही ये देखते हैं कि बिंदु भी छूतड़ो पे हाथ ले जेक मसाला के हलकी सी छप मार के चुतड को कहते हैं वह मातकते हो बहुत तुम दो मेरे बेटे को रिजते हो मजबूर करता हो हमें एक और मैं उंगली घु सा के गांद की डर में जाने से बचाती वह और थोड़ी टंगे चौड़ी कर के चड्डी को बहार निकल ती वह और छोड देता है जिससे नई चड्डी होने के करन चुटडो पे चड्डी पाट पात कर वह एक चिपक है बिंदू की छुट भी सिसक उठी और रस उगलने के लिए बेटा होने लगी कोई मर्द होता तो पैंटी की ये पाट की आवाज सुन के चुडवासा हो ही जाता ऐसे ही बिंदु पे भी छुट वाले से ही से पैंटी को उठाई और ब्रा पहनने लगी जैसे ही ब्रा पहनी उसे पानी की थाली की तरह लटके चूचे ब्रा के हुक लगने की वजह से उठ के सामने आ गए और बिंदू के गदरए बदन के दोनो साइड से चुचे अपने निकले बिंदू गए और बारी बारी दोनो चूचे को जबर्दस्ती ब्रा के और डाबा के दशा दिए जिस्की वजाह से वो ब्रा में और मदक और उबर के बाहर आने लगे और बिंदू ने अपने आपको समलैंगिक ब्रा चड्डी में देखा और क्या कहा है विधवा घोड़ी केसी वह है कसूर बेचारा का क्या देख फेल के सब मर्द को लालर रहा वह ऐसा बढ़ गया वह सब तेरा ये कह के उसे लग गया कि उसे और पलंग पे बेथ के पहने लगी और लेगिंग का रंग भी चमकी जैसा ही था तो जैसा जैसा बिंदु लेगिंग्स उसे लगा उसे लगता है की वह लेगिंग्स जांगो पे चढ़ते वक्त बिलकुल ऐसा लग रहा था मानो लेगिंग्स पहनी ही नहीं बिलकुल चमड़ी जेसा कलर ये तो बिंदू के पर देखो तो पता चले की बिंदू थोडी सावली ज्यदा वह और ये लेगिंग्स थोड़ी थोड़ी ज्यादा है तो दे त्वचा का रंग ऐस अलगे की बिंदू आला से नंगी ही वह ऊपर से मंसल जंघे और इसपे चिपकी ये स्किन कलर की लेगिंग्स पुरी गद्रेई घोड़ी लगी थी बिंदू और उसे खादी होके जोर से लेगिंग्स में छुटडो को धासा दिए नए लेगिंग्स एक होने के लिए चुतडो पे एक दम नंगी ही लग रही हो वाइज ही थी आला से लेगिंग्स में थुल बहार निकला पेट था जिस्की नाभी को धक ले इस लिए लेगिंग्स को फुल ऊपर ही पनी थी और पुरा का पुरा चड्डी का शेप और डार्क कलर यह रहा था ये देख के बिंदु शर्मा गई और उसने चुतड़ पे हाथ घुमा के लेगिंग्स को सही कर के कुर्ता उठा और उसे डालने लगी कुर्ता भी दाल के उसने देख की मेरे लिए एक दम चिपका विधवा रंदी बनेगा पतंग का गया वह मेरे बदन पे ये कपड़े रे आह विदवा एक तो नए कपड़े ऊपर से लेगिंग्स अहा आज तू गई विधवा ये कह के बिंदू ने अपने बालो को बनाने के लिए कांगी द और हमें बना को मिलेगा भी नाह के वपिस आया और कामरे के दखिल हुआ उसने पटल से अपने बदन पे तोल लाता था और अपनी मां को देख के बोला मां लेगिंग्स नहीं कहने गी क्या ऐसी चली जाएगी तू के ऐसे त्वचा रंग की लेगिंग्स ली थी तकी माँ लेगिंग्स पहनने के बावजुद भी आला से नंगी लगे)
बिंदु – आर मेरा घोड़ा केसी बात कर रहा है वह यही कहता है कि बिंदू ने कुर्ता थोड़ा सा हटा तो नमन के सामने बिंदु का पिचवाड़ा और भी दिख गया जिसपे डार्क कलर की पैंटी और उसका आकार पुरा दिख रहा नहीं था। t लोहे जैसा लोडा सलामी देने लगा जो बिंदु ने वो लोडा देख लिया और उसकी चुत ने भी नमन के लोड को सलामी देने के लिए पानी चोदना शूरू कर दिया और मन ही मन बिंदू बोली है रे आज मुझे प्रशिक्षित करने के लिए यह दर्द है ये .. और ये सोचते हुए शीशे में नमन को देखते हुए बाल बनाना इलागी
नमन – बिंदू को देख के सोचा था ये तो घोड़ी कुछ ज्यादा ही नंगी लगने लगी वह त्वचा के रंग की लेगिंग्स में घोड़ी आज तो लोग बहुत घुरेंगे और वो भी सोचने लाग की ट्रेन में उन दोनो को कोई देखा नहीं ऐसा होगा ता की वो अपनी मां की अच्छे से सेवा कर खातिर कास के दबोच खातिर गांघ जाने कुछ सब ये सोचते हुए नमन ने भी टीशर्ट और जींस पाहन ली
तब तक बिंदू भी तैयर होके खादी थी और नमन की राह देख रही थी घाड़ी में देखी और बोली बीटा 4.15 हो चुका ही जल्द से रिक्शा लेके आ आज तो सब तो रहे होंगे तब मैं ये लेगिंग्स में बाहर निकलूंगा
नमन – अरे मां हा जा रहा हूं बस 5 मिनट ये कह के बोला तू समान बहार रख दे ताला लगा के बैठा में बाहर जा के रिक्शा लेके आता हूं बाइक से और बाइक रख के हम दो फटक से निकल जाएंगे और यह हमी भर दी और नमन निकल गया….
बिंदु – सब समान बहार लगा के रख दिया नमन रिक्शा लेके आ गया….
थोड़ी डेर में दोनो रिक्शा एमडब्ल्यू बैठा और समन की वजह से रिक्शा में दोनो सत के बैठे और बिंदू की जंघे साइड से चुतद नमन की जंगो पे धास गए और बिंदु बोली…
बिंदु – बेटा नमन मेरी ये लेगिंग्स बहुत अज़ीब सी वह तेरी ये विधा घोड़ी इस्मे आला से कुछ ना पहनी हो वेसा ही लगता है वह बेटा ना जाने लोग तेरी है विधवा घोड़ी को केसे देखेंगे?
नमन – नमं ने भी रिक्शा का फ़यदा उठता हुआ अपना एक हाथ पिचे ले जेक बिंदू के छुटडो पे फिरते हुए कहा मेरी रानी कुछ नहीं होगा आज कल ये फैशन वह तू एक बार बहार घुमेंगे फिर देख तू मैं भी अपना दूंगा कोई दीकत नहीं होगी संकोच मत रख मेरी घोड़ी बस बिंदास होगा तो ही घुमने का आनंद ले खातिर रे तू..
बिंदु – हा ये कह अपने छुटडो का डबाव नमन की जंघो पे डाला और शर्मा के कहने लगी है मेरा घोड़ा राजा बेटा…
ऐसे ही दोनो मां बेटे रिक्शा में बात करते करते रेलवे स्टेशन पहुच गए और रिक्शा से उतरे लगे और उतर के दो और जाने लगे …. तब नमन बिंदु को निहारने के लिए उसके पीछे चल रह आठ की उसकी मां हाय मटक रहे ते और बिंदू ने रिक्शा से उतरने के खराब गंद के छुटडो में फासी कुर्ती को बहार निकलना भूल गई थी वो जब चल रही थी तब ओछे चलने वाले लोग उसकी मदक गडरीन की त्वचा का रंग हम उठाकर लेगडौर में त्वचा को काटना था और चडी कोआ शेप और रंग और जहां तक कुर्ती घुसी थी दारर में वो देख के पता चल जाता है कि वह उसकी चुतद की दार बहुत गहरी है और ये घोड़ी बिंदास होके मटका मटका के चल रहा था तबी कुछ कुछ तो नमन ने भी मां के पास जेक कहां
नमन – मां लेगिंग्स में कुर्ता पिचवाड़े में फस गया वह बहार निकलो रिक्शा से उतरने के बाद तू भूल गई वह….
बिंदु – नमन की बात सुन के हाय राम ये कह के हाथ में पकड़ी बैग रख के दोनो हाथो से कुर्ता के छेड़े को पकड के बहार नियाकलती ही गंद की दर से और कहत वह बेटा कह तो देखता है की आदत नहीं वह..
नमन – हैं मां अब पद जाएगी आदत 15 दिन मेरे साथ घुमेगी न एक दम सुधार जाएगी तू घोड़ी
बिंदु – आर मेरे घोड़े तेरी ये विध्वा सुधारके तेरे जेसी हो जाएगी देख ना … चल अब कहा जाना वह बेटा याहा तो धर साड़ी ट्रेन लगी हुई वह हमरी कोसी ही बता
नमन – आर मां हमारी ट्रेन याही प्लेटफॉर्म पे आएगी 10 मिनट की डर वह… याहा बेथ जा तू बेंच पे समान का ध्यान रख में चिप्स लेके आता हूं और कोल्ड्रिंक भी
और नमन और अपनी मां को बिठा कर कोल्ड ड्रिंक लेके आटा वह और थोड़ी देर बाद कोल्डड्रिंक आटा वह और नमन और उसकी विधवा मां बिंदू ट्रेन में चढ जाते ही…